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Reserve Bank की दो दिवसीय मौद्रिक समीक्षा बैठक आज होगी शुरू, रेपो रेट में कटौती की संभावना कम

Updated at : 04 Apr 2018 9:39 AM (IST)
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Reserve Bank की दो दिवसीय मौद्रिक समीक्षा बैठक आज होगी शुरू, रेपो रेट में कटौती की संभावना कम

नयी दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआर्इ) के अधिकारियों आैर मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्यों की दो दिवसीय मौद्रिक समीक्षा बैठक बुधवार से शुरू की जायेगी. इस बीच, आशंका जाहिर की जा रही है कि आरबीआर्इ के वित्त वर्ष 2018-19 की पहली द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में बदलाव करने की संभावना […]

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नयी दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआर्इ) के अधिकारियों आैर मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्यों की दो दिवसीय मौद्रिक समीक्षा बैठक बुधवार से शुरू की जायेगी. इस बीच, आशंका जाहिर की जा रही है कि आरबीआर्इ के वित्त वर्ष 2018-19 की पहली द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में बदलाव करने की संभावना नजर नहीं आ रही है. माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक उद्योग जगत के दबाव में नहीं आयेगा. इसकी वजह यह है कि कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं, जिसके चलते ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश नहीं है. यह आम बजट के बाद पहली मौद्रिक समीक्षा होगी.

इसे भी पढ़ेंः मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दर को यथावत रख सकता है रिजर्व बैंक : रिपोर्ट

रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल की अगुवाई वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक 4-5 अप्रैल को होनी है. खुदरा मुद्रास्फीति में कमी तथा वृद्धि को रफ्तार देने की जरूरत की वजह से केंद्रीय बैंक पर नीतिगत दरों में कटौती का दबाव है. वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो रही है, जिसके मद्देनजर इस बात की संभावना कम ही है कि यहां नीतिगत दरों में कटौती की जाये.

पिछले महीने अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की वृद्धि करते हुए संकेत दिया है कि 2018 में वह दो बार और ब्याज दरें बढ़ायेगा. उद्योग मंडल फिक्की ने मौद्रिक नीति में नरम रुख की वकालत की है. फिक्की का कहना है कि अर्थव्यवस्था में सुधार अब दिखने लगा है, लेकिन वृद्धि के स्तर को और बढ़ाने की जरूरत है. विनिर्माण के मोर्चे पर सुधार की जरूरत है, जिससे निवेश चक्र भी सुधर सके.

कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस के कोष प्रबंधक कुणाल शाह ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति 2018-19 में मुद्रास्फीति के पांच फीसदी की ओर बढ़ने का उल्लेख करेगी. बैंक आफ अमेरिका मेरिल लिंच (बोफाएमएल) ने भी यही राय जतायी है. हालांकि, उसने कहा कि यदि मानसून अनुकूल रहता है, तो अगस्त समीक्षा में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती कर सकता है.

इसके अलावा, उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा कि रिजर्व बैंक के पास ब्याज दरों में कटौती की काफी कम गुंजाइश है. ऐसे में हमारा अनुमान है कि इसमें बदलाव नहीं होगा. फिलहाल, रेपो रेट छह फीसदी तथा रिवर्स रेपो रेट 5.75 फीसदी पर है. कोटक महिंद्रा बैंक का मानना है कि अभी रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में बदलाव नहीं किया जायेगा, क्योंकि 2018-19 में मुद्रास्फीति 4.5 फीसदी पर रहने का अनुमान है.

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