निजी क्षेत्र में कर्मचारियों के कम पीएफ अंशदान पर ऐसे लगेगी लगाम, प्रस्ताव पेश

नयी दिल्ली : निजी क्षेत्र की कंपनियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी निर्धारित कर भविष्य निधि (पीएफ) में अपनी हिस्सेदारी कम रखने की चतुरार्इ अब अधिक दिन तक शायद चलने वाली नहीं है. सरकार ने निजी क्षेत्र की कंपनियों की आेर से कर्मचारियों की भविष्य निधि में उसकी हिस्से की रकम को लेकर सरकार ने कारगर […]
नयी दिल्ली : निजी क्षेत्र की कंपनियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी निर्धारित कर भविष्य निधि (पीएफ) में अपनी हिस्सेदारी कम रखने की चतुरार्इ अब अधिक दिन तक शायद चलने वाली नहीं है. सरकार ने निजी क्षेत्र की कंपनियों की आेर से कर्मचारियों की भविष्य निधि में उसकी हिस्से की रकम को लेकर सरकार ने कारगर कदम उठाना शुरू कर दिया है. सरकार की आेर उठाये जाने वाले कदम के बाद बेसिक सैलरी कम कर पीएफ अंशदान में कटौती करना अब कंपनियों के लिए आसान नहीं होगा.
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कंपनियों की चालाकी पर लगाम लगाने के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत बेसिक सैलरी का 50 फीसदी से अधिक भत्ते को भी बेसिक सैलरी का हिस्सा माना जायेगा और कंपनी को इस पर भी पीएफ काटना होगा. इससे पीएफ में कंपनियों का अंशदान तो बढ़ेगा ही, कर्मचारी की पेंशन भी बढ़ जायेगी.
मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार, सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के सदस्य बृजेश उपाध्याय ने कहा कि बेसिक सैलरी के आधार पर पीएफ का दायरा कम होगा. चार करोड़ में 1.25 करोड़ लोगों का योगदान बेहद कम है. उन्होंने कहा कि बेसिक सैलरी बढ़ने का टैक्स देने पर असर नहीं पड़ेगा, बल्कि इससे पेंशन आैर ग्रेज्युटी बढ़ जायेगी. रिटायरमेंट के बाद सबको पेंशन बढ़कर मिलेगी.
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