नीरव मोदी के करोड़ों रुपये के घोटाले के बाद जागा PNB, लेन-देन की जांच के लिए अब किया पुख्ता इंतजाम
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 13 Mar 2018 8:32 AM
नयी दिल्ली : हीरा कारोबारी नीरव मोदी आैर उसके रिश्तेदार मेहुल चोकसी की आेर से करीब 12,700 करोड़ रुपये की चपत लगाने के लिए पंजाब नेशनल बैंक की नींद खुली है. नीरव मोदी के करोड़ों रुपये के घोटाले से जूझ रहे पीएनबी ने अब लेन-देन के त्रिस्तरीय जांच के लिए स्विफ्ट प्रणाली की शुरुआत की […]
नयी दिल्ली : हीरा कारोबारी नीरव मोदी आैर उसके रिश्तेदार मेहुल चोकसी की आेर से करीब 12,700 करोड़ रुपये की चपत लगाने के लिए पंजाब नेशनल बैंक की नींद खुली है. नीरव मोदी के करोड़ों रुपये के घोटाले से जूझ रहे पीएनबी ने अब लेन-देन के त्रिस्तरीय जांच के लिए स्विफ्ट प्रणाली की शुरुआत की है. बैंक ने कहा कि उसने ‘स्विफ्ट’ लेन-देन के लिए त्रिस्तरीय प्रमाणीकरण की शुरुआत की है. उसने कहा कि वह बेहतर सॉफ्टवेयर प्रणाली बहाल करने की प्रक्रिया में है.
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बैंक ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि निदेशक मंडल की लेखा-समीक्षा समिति ने नियमित अंतराल पर सभी शाखाओं की बाह्य लेखा समीक्षा कराने का सुझाव दिया है. बैंक ने कहा कि स्विफ्ट (सोसाइटी फार वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन) लेन- देन के लिए त्रिस्तरीय प्रमाणीकरण को क्रियान्वयित किया गया है तथा मुख्य कार्यालय एवं क्षेत्रीय कार्यालय को लेन-देन की तत्काल निगरानी की सहूलियत दी गयी है.
वहीं, पीएनबी में हजारों करोड़ रुपये के घोटाले के बाद आर्इएमएफ ने भारत में बैंकिंग सुधार करने की वकालत की है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष( आईएमएफ) ने कहा कि ऋण शोधन संहिता तथा पूंजी डाले जाने जैसे बैंकिंग सुधार तब तक अप्रभावी रहेंगे, जब तक संचालन मानकों को बेहतर नहीं किया जाता. आईएमएफ के उप प्रबंध निदेशक ताओ झांग ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के एक कार्यक्रम में कहा कि दिवाला एवं ऋण शोधन संहिता तथा पूंजी डालने जैसे सुधार किये गये हैं.
हालांकि, सार्वजनिक बैंकों के संचालन को बेहतर नहीं किया जाता, ये प्रयास दूरगामी प्रभाव डालने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे. उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि बैंकों के संचालन जैसे गहन मुद्दे पर ध्यान दिये जाने की जरूरत है. पंजाब नेशनल बैंक का नाम लिये बिना उन्होंने कहा कि घोटाले ने आंतरिक नियंत्रण में सुधार की जरूरत को रेखांकित किया है. यह न केवल बैंकों में सुधार के लिए बल्कि वित्तीय स्थिरता के लिए भी जरूरी है.
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