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आरबीआर्इ मौद्रिक समीक्षाः घटेगी रेपो रेट या रहेगी यथावत, आज फैसला करेगा रिजर्व बैंक

Updated at : 07 Jun 2017 9:37 AM (IST)
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आरबीआर्इ मौद्रिक समीक्षाः घटेगी रेपो रेट या रहेगी यथावत, आज फैसला करेगा रिजर्व बैंक

नयी दिल्ली: रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति समीक्षा के तहत नीतिगत ब्याज दरों में कटौती करेगा या फिर उसे बरकरार रखेगा, इस पर बुधवार को फैसला किया जायेगा. इसके मंगलवार से आयोजित मौद्रिक समीक्षा समिति में रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल की अगुआर्इ में दो दिवसीय बैठक आयोजित की गयी है. केंद्रीय बैंक की आेर […]

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नयी दिल्ली: रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति समीक्षा के तहत नीतिगत ब्याज दरों में कटौती करेगा या फिर उसे बरकरार रखेगा, इस पर बुधवार को फैसला किया जायेगा. इसके मंगलवार से आयोजित मौद्रिक समीक्षा समिति में रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल की अगुआर्इ में दो दिवसीय बैठक आयोजित की गयी है. केंद्रीय बैंक की आेर से बुधवार को मौद्रिक नीति की द्विमासिक समीक्षा पेश की जायेगी. यहां यह बताना भी जरूरी है कि मौद्रिक समीक्षा समिति की यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब सरकार निजी निवेश बढ़ाने के लिए उधारी लागत को घटाने पर जोर दे रही है. वहीं, ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग प्रणाली में 60 अरब डॉलर से भी अधिक की अधिशेष नकदी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दर में किसी तरह का बदलाव अपेक्षित नहीं है.

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जो लोग नीतिगत ब्याज दरों में कटौती चाहते हैं, वे उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति के अप्रैल में घटकर 2.99 प्रतिशत रहने का हवाला दे रहे हैं. आर्थिक वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष में दो साल के निचले स्तर पर रही.वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को ब्याज दरों में कटौती की वकालत करते हुए कहा कि मुद्रास्फीति लंबे समय से नियंत्रण में है और अच्छे माॅनसून के उम्मीद के बीच इसके आगे भी कम बने रहेन की उम्मीद है. वित्त वर्ष 2016-17 में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर घटकर 7.1 प्रतिशत पर आ गयी है. ऐसे में भारतीय उद्योग जगत भी नीतिगत दरों में कटौती के लिए दबाव बना रहा है.

हालांकि, वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक चालू वित्त वर्ष की अपनी दूसरी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों में बदलाव नहीं करेगा. केंद्रीय बैंक पहले मुद्रास्फीति पर जीएसटी को लागू करने के प्रभाव को देखेगा. भारतीय स्टेट बैंक की उपप्रबंध निदेशक एवं मुख्य वित्त अधिकारी अंशुला कांत ने कहा कि मुद्रास्फीति के रुख और बाजार में पर्याप्त तरलता की स्थिति को देखते हुए इस बात की संभावना कम है कि ब्याज दरों में कटौती होगी. यूनियन बैंक आॅफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक विनोद कथूरिया ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इस समीक्षा में नीतिगत दरों में कटौती होगी. वे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़ों को देखना चाहेंगे.

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