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Wealth Creation Report: 5 साल में भारत की 100 कंपनियों ने बनायी 71 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति

Updated at : 02 May 2022 9:55 PM (IST)
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Wealth Creation Report: 5 साल में भारत की 100 कंपनियों ने बनायी 71 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति

Wealth Creation Report: मोतीलाल ओसवाल की ओर से हर साल जारी किये जाने वाले वेल्थ क्रिएशन रिपोर्ट में बताया गया है कि यह पहला मौका है, जब 100 भारतीय कंपनियों ने रिकॉर्ड संपत्ति बनायी है. 56 फीसदी पूंजी सिर्फ 10 कंपनियों ने बनायी है.

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Wealth Creation Report: भारत की 100 कंपनियों ने पिछले 5 साल में करीब 71 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति बनायी है. मोतीलाल ओसवाल के 26वें वेल्थ क्रिएशन स्टडी (2016-2021) में ये आंकड़े जारी किये गये हैं. मोतीलाल ओसवाल की ओर से हर साल जारी किये जाने वाले वेल्थ क्रिएशन रिपोर्ट में बताया गया है कि यह पहला मौका है, जब 100 भारतीय कंपनियों ने रिकॉर्ड संपत्ति बनायी है. 56 फीसदी संपत्ति सिर्फ 10 कंपनियों ने बनायी है.

इस रिपोर्ट पर गौर करेंगे, तो पायेंगे कि वर्ष 2001-06 के दौरान भारतीय कंपनियों ने 14.3 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति बनायी थी. वर्ष 2002-07 के दौरान यह बढ़कर 163 लाख करोड़ रुपये हो गयी, जबकि वर्ष 2003-08 में 25.4 लाख करोड़ रुपये, वर्ष 2004-09 में सिर्फ 9.7 लाख करोड़ रुपये रह गयी. वर्ष 2005-10 में आंकड़ा बढ़कर 26.5 लाख करोड़ रुपये हो गया.

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वर्ष 2006-11 के दौरान 22.1 लाख करोड़ रुपये, वर्ष 2007-12 के दौरान 16.2 लाख करोड़ रुपये, वर्ष 2008-13 में 18.4 लाख करोड़ रुपये, वर्ष 2009-14 में 29.4 लाख करोड़ रुपये, वर्ष 2010-15 के दौरान 34.2 लाख करोड़ रुपये, वर्ष 2011-16 के दौरान 28.4 लाख करोड़ रुपये, वर्ष 2012-17 के दौरान 38.9 लाख करोड़ रुपये की कंपनियों ने संपत्ति बनायी.

वर्ष 2013-18 के दौरान यह बढ़कर 44.9 लाख करोड़ रुपये हो गयी, जबकि वर्ष 2014-19 में 49 लाख करोड़ रपुये. वर्ष 2015-20 के दौरान यह रकम घटकर 26.1 लाख करोड़ रुपये रह गयी, जबकि वर्ष 2016 से 2021 के बीच कंपनियों ने रिकॉर्ड 70.8 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति तैयार की.

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रिलायंस ने तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड

सबसे ज्यादा संपत्ति बनाने वाली कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज टॉप पर रही. वर्ष 2016-21 के दौरान सबसे ज्यादा पूंजी या संपत्ति बनाने वाली कंपनी रिलायंस लगातार तीसरे साल सबसे ज्यादा पूंजी बनाने वाली कंपनी बनी रही. कंपनी ने 2016-21 के दौरान 9.7 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति बनायी, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. कंपनी ने इस बार वर्ष 2014-19 के 5.6 लाख करोड़ रुपये के अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ा.

10 कंपनियों ने बनाये 56 फीसदी पैसे

रिपोर्ट पर गौर करेंगे, तो पायेंगे कि इन 70.8 लाख करोड़ रुपये में 40 लाख करोड़ रुपये (56 फीसदी) सिर्फ 10 कंपनियों (रिलायंस इंडस्ट्रीज, टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी, कोटक महिंद्रा और एचसीएल टेक) ने बनाये हैं.

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रिलायंस ने 9.7 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति बनायी, तो टीसीएस ने 7.29 लाख करोड़ रुपये, एचडीएफसी बैंक ने 5.2 लाख करोड़ रुपये, हिंदुस्तान यूनिलीवर ने 3.4 लाख करोड़ रुपये, इंफोसिस ने 3.3 लाख करोड़ रुपये, बजाज फाइनेंस ने 2.6 लाख करोड़ रुपये, आईसीआईसीआई बैंक ने 2.5 लाख करोड़ रुपये, एचडीएफसी ने 2.4 लाख करोड़ रुपये, कोटक महिंद्रा ने 2.1 लाख करोड़ रुपये और एचसीएल टेक ने 1.6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति बनायी.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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