बिहार में अब बच्चों को मिड डे मील में भी मिलेगा मोटा अनाज, किसानों की भी होगी अच्छी आमदनी, जानें क्या है योजना

Updated at : 27 Feb 2023 11:28 AM (IST)
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बिहार में अब बच्चों को मिड डे मील में भी मिलेगा मोटा अनाज, किसानों की भी होगी अच्छी आमदनी, जानें क्या है योजना

Bihar: बिहार के सरकारी स्कूलों में दोपहर के समय बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील में मोटे अनाज से बने भोजन को जगह दी जायेगी. इसके साथ ही स्कूलों में चेतना सत्र के दौरान शिक्षक मोटे अनाज और उसके फायदे बताते हुए घर के भोजन में भी शामिल करने के लिए जागरूक करेंगे.

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Bihar: बिहार के सरकारी स्कूलों में दोपहर के समय बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील में मोटे अनाज से बने भोजन को जगह दी जायेगी. इसके साथ ही स्कूलों में चेतना सत्र के दौरान शिक्षक मोटे अनाज और उसके फायदे बताते हुए घर के भोजन में भी शामिल करने के लिए जागरूक करेंगे. इसको लेकर विभाग की ओर से दिशा-निर्देश दिया गया है. वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज (मिलेट्स) वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. केंद्र सरकार की ओर से बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए मिड डे मील दिया जा रहा है. ऐसे में मेन्यू में एक दिन मोटे अनाज के लिए भी निर्धारित किया जा रहा है.

गुरूजी बताएंगे मोटे अनाज का 

मोटे अनाज में मुख्य रूप से तीन फसल ज्वार, बाजरा और मडुआ शामिल है. इसके बाद जौ, कोदो, सांवा, कुटकी, कांगनी चीना जैसे छोटे अनाज भी मोटे अनाज की श्रेणी में जोड़े गये हैं. डीपीओ एमडीएम डॉ इंद्र कुमार कर्ण ने बताया कि स्कूलों में बच्चों को मोटे अनाज के फायदे बताने का निर्देश सभी बीइओ व प्रधानाध्यापकों को दिया गया है. एमडीएम की मेन्यू में शामिल करने के साथ ही कब से लागू करना है, इसका निर्णय राज्य कार्यालय को खाद्य निगम के साथ सहमति बनाकर करना है. बता दें कि यूपी सहित कई राज्यों में स्कूलों के एमडीएम व आंगनबाड़ी केंद्र के पोषाहार में मोटा अनाज शामिल किये जाने के बाद जल्द ही राज्य में भी लागू होने की संभावना जतायी जा रही है.

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कैंटीन व मेस में भी शामिल होंगे मोटे अनाज

सरकार की ओर से स्कूल-कॉलेजों के कैंटीन व मेस में भी मोटे अनाज को शामिल करने का निर्देश दिया गया है. इसको लेकर पिछले दिनों यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालय और कॉलेजों को पत्र भेजा है. यूजीसी ने कहा है कि हॉस्टल में संचालित होने वाले मेस के साथ ही कॉलेजों के कैंटीन में मोटे अनाज से बने व्यंजन शामिल किये जायें. इसके साथ ही छात्र-छात्राओं को भी अपने आस-पास के लोगों को मोटे अनाज की खेती के लिए प्रोत्साहित करने की जिम्मेदारी दी गयी है.

किसानों को भी किया जायेगा खेती के लिए प्रोत्साहित

बिहार सरकार ने अपने कृषि के चौथे रोड मैप में मोटे अनाजों को भी शामिल किया है. इसके तहत राज्य में ज्वार, बाजरा, जौ, कोदो, सांवा, मडुआ की खेती को प्रोत्साहित किया जायेगा. किसानों को भी मोटे अनाजों के फायदे गिनाये जायेंगे. जानकारों का कहना है कि मोटे अनाजों को बिहार के उन इलाकों में उगाने की योजना है, जहां बारिश बहुत कम होती है. पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर भोजपुर जिले में ज्वार और बाजरा की खेती की जा रही है. वहीं गया, रोहतास, कैमूर और जहानाबाद के पहाड़ी इलाकों को खेती के लिए अनुकूल बताया गया है.

उत्तर बिहार में हो रही मडुआ की खेती

उत्तर बिहार के समस्तीपुर, सीतामढ़ी और वैशाली जिले में मडुआ की खेती की जा रही है. प्रतिकूल मौसम में भी मोटा अनाज की बढ़िया उपज मिल सकती हैं. एक तरफ धान और गेहूं की खेती में खाद, उर्वरक से लेकर सिंचाई और निगरानी का काफी खर्च आता है. वहीं मोटा अनाज कम पानी, बिना खाद-उर्वरक और मौसम की प्रतिकूलताओं के बीच 20 प्रतिशत कम लागत में ही पैदा हो जाता है.

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