बिहार: छोटे अपराधों के लिए करनी पड़ेगी सामाजिक सेवा, अधिवक्ता ने कहा- तालाब को गंदा करने पर छह महीने की जेल

Bihar News: पटना उच्च न्यायालय में वरीय महिला अधिवक्ता और एडवोकेट्स एसोसिएशन की उपाध्यक्ष छाया मिश्र ने कई बातें कही है. उन्होंने कहा है कि छोटे अपराधों के लिए सामाजिक सेवा करनी होगी. उन्होंने यह भी कहा कि तालाब या झील को गंदा करने पर छह महीने की जेल होगी.
Bihar News: पटना उच्च न्यायालय में वरीय महिला अधिवक्ता और एडवोकेट्स एसोसिएशन की उपाध्यक्ष छाया मिश्र ने आईपीसी की धारा ३५६ पर चर्चा की. साथ ही उन्होंने कहा कि नए कानून में छोटे- छोटे अपराधों के लिए दंड के स्थान पर सुधारात्मक उपाय के प्रावधान है. अब इन अपराधों में दंडित लोगो को सामाजिक सेवा करनी पड़ेगी. इन्हें यथा रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड की सफाई, थाना में चार पालियों में सफाई और सेवा करना, ट्रैफिक पोस्ट पर पुलिस की मदद करना जैसे काम करने होंगे. इससे जेल में बंदियों की संख्या भी घटेगी.
प्रस्तावित संहिता में महिलाओं, बच्ची, बालकों के प्रति बढ़ रहे अपराध पर नियंत्रण और डेड के लिए कड़े नियम होंगे. जस्टिस वर्मा आयोग द्वारा दिए गए सुझाव को ध्यान में रखते हुए, नाबालिग पर यौन शौषण के लिए मृत्यु दण्ड दिया जाएगा. सात और बारह वर्ष के उम्र वाले द्वारा किया गया कोई अपराध अब नहीं माना जायेगा. संहिता के ३५२ खंड में एक प्रावधान है, जिसके अनुसार भगवान या डिवाइन पावर का भय दिखाना अब अपराध है. कई साधु और मुजावर इस तरह का भय दिखा कर लोगों के साथ खिलवाड़ करते है.
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अधिवक्ता ने कहा कि नए प्रस्तावित संहिता के अनुसार प्रकृति के दोहन पर भी रोक लगेगी. पानी के विभिन्न श्रोत जिसमें तालाब व झील भी शामिल हैं. इसे गंदा करना अथवा गंदगी फैलाने पर स्वच्छता खत्म करने के कारण छह महीने का जेल होगा. संहिता का खंड २९४ भी आधुनिक भारतीय जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. लोग शादी ब्याह जैसे अवसर पर तेज गाना गाते हैं, अब यह अपराध होगा जिसके लिए तीन महीने का कारावास होगा.
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अधिवक्ता बताती है कि आज कल धार्मिक स्थल पर आक्रमण होते हैं. प्रतीमा को नुकसान पहुंचाया जाता है, अब ऐसा करने पर दो साल का कारावास होगा. चैन स्नैचिंग जैसे अपराध जिसमे पांच हजार से कम के समान का चोरी हुआ हो, ऐसा करने वाले अपराधी को अब जेल नही. होगा, उसे समाज में सेवा करनी होगी. खाद्य और पेय पदार्थों में मिलावट के लिए छह महीने का कारावास होगा. तीन साल पहले कोरोना काल में लोग क्वारंटीन सेंटर से भाग जाते थे, अब ऐसा किया तो छह महीने का जेल होना तय है. भ्रूण हत्या या नवजात को फेंक देना अब दंडनीय अपराध होगा और दो वर्ष का जेल ऐसे अपराध के लिए प्रस्तावित है.
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मुजफ्फरपुर में शेल्टर होम में दुष्कर्म की घटनाए हुई. अब नए कानून के अनुसार, रिमांड होने, बाल गृह, पुलिस चौकी में ऐसी घटना हुई तो संबंधित प्रभारी को छह महीने का जेल होगा. काम काजी महिलाओं को कार्य स्थल पर अधिकारी प्रताड़ित करते हैं, प्रमोशन नही देते है, अब ऐसे अधिकारी भी तीन साल की कारावास के पात्र होंगे. खंड ८७ के अनुसार जबरन गर्भपात की सजा सात साल को होगी. आईपीसी की धारा ३०९ समाप्त हुई और अब आत्महत्या के प्रयास को अपराध की श्रेणी से विमुक्त कर दिया गया है.
छाया मिश्र आगे कहती है कि देश में तकनीकी का विकास हुआ है. इसका उपयोग अब त्वरित न्याय के लिए होगा. कोर्ट और कारावास में वीडियो के द्वारा संबंध होगा. सुनवाई होगी और न्याय भी होगा. केस के फाइल होने और निर्णय के बीच तीन साल का समय दिया गया है. बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कानून में बदलाव के लिए लोकसभा में बिल पेश किए. इसके बाद इसे रिव्यू के लिए भेजा गया है. अमित शाह ने कहा है कि कुल 313 बदलाव किए है, जिससे भारत में क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में बड़ा बदलाव आएगा. उन्होंने दावा किया है कि अब लोगों को देश में तीन साल के अंदर न्याय मिल जाएगा. सरकार का दावा है कि इन नए बिलों के कानून बनने के बाद लोगों को जल्द से जल्द न्याय मिलेगा. इसमें हत्या की धारा में बदलाव की बात कही जा रही है. आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या को अपराध माना गया था. अब बीएनएस में हत्या की धारा 101 निर्धारित करने की बात सामने आ रही है. वहीं, अधिवक्ता छाया मिश्र ने भारतीय न्याय संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता पर अपनी राय रखी है.
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By Sakshi Shiva
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