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राजनीतिक दलों से कितने अलग हैं बिहार के युवाओं के मुद्दे, 2025 में कैसी सरकार चाहते हैं यूथ?

Updated at : 25 Oct 2025 5:28 PM (IST)
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Bihar Election 2025 Issues of Students
प्रभात खबर से युवाओं की बातचीत.

Bihar Election 2025: बिहार में चुनाव का वक्त आ गया है. अपना नेता चुनने की बारी आ गयी है. राजनीतिक दलों ने अपने घोषणा पत्र अब तक जारी नहीं किये हैं, लेकिन जनता ने यह बताना शुरू कर दिया है कि उनके मुद्दे क्या हैं. पटना के युवा पिछली, वर्तमान और आने वाली सरकार के बारे में क्या सोचती है. भविष्य की सरकार से उसकी क्या उम्मीदें हैं, उनकी बातें यहां देखें और सुनें.

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Table of Contents

Bihar Election 2025: बिहार चुनाव की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. हर पार्टी अपनी ओर से जनता को लुभाने के लिए लुभावने वायदे कर रही है. पार्टियां हर जाति, हर समुदाय, हर वर्ग को अपनी ओर आकर्षित करने में लगी है. युवाओं को भी सपने दिखाये जा रहे हैं. राजनीतिक दलों के अपने-अपने मुद्दे हैं, जिसके आधार पर वे चुनाव के मैदान में जा रहे हैं. जनता के भी अपने मुद्दे हैं. प्रभात खबर के इलेक्शन एक्सप्रेस के दौरान कई ऐसे मुद्दे सामने आये, जिसका राजनीतिक दलों के लिए कोई मायने नहीं हैं.

युवाओं से सुनिए, कैसी सरकार चाहते हैं वे

आज हम आपको बताते हैं बिहार के युवाओं के मुद्दों के बारे में. क्या हैं उनके मुद्दे. कैसी सरकार चाहते हैं बिहार के युवा मतदाता. प्रभात खबर की टीम ने युवाओं से बात की, तो पता चला कि उनके लिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार और रोजगार सृजन दो ही अहम मुद्दे हैं. युवाओं ने कहा कि वे ऐसी सरकार चाहते हैं, जो शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करे और रोजगार के अवसर पैदा करे.

बिहार में 18 से 29 साल के 1.63 करोड़ वोटर

प्रभात खबर (prabhatkhabar.com) की टीम ने जिन युवाओं से बात की, उनमें बड़ी संख्या उन वोटर्स की थी, जो बिहार चुनाव 2025 में पहली बार मतदान करेंगे. यानी इनकी उम्र 18 से 19 साल के बीच है. ये लोग राज्य में बेरोजगारी और पलायन की स्थिति से चिंतित हैं. बिहार में युवा मतदाताओं की संख्या 1.63 करोड़ है, जिनकी उम्र 18 से 29 वर्ष के बीच है. कुल मतदाताओं में इन युवा मतदाताओं की हिस्सेदारी 22 से 25 प्रतिशत तक है. यानी इस वर्ग में सरकार बनाने और बिगाड़ने की क्षमता है.

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अभिनव शुक्ला को अब तक की सरकारों ने किया निराश

पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के स्नातकोत्तर के छात्र अभिनव कुमार शुक्ला का कहना है कि सरकारों ने हमेशा युवाओं को निराश किया है. वह भी निराश हैं. उनकी उम्मीदें खत्म हो चुकीं हैं. अभिनव बिहार राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा(एसटीईटी) परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. उनका कहना है कि राज्य में व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन की जरूरत है.

दृष्टिबाधित छात्र संतोष की नजर में पटना विश्वविद्यालय ने खो दिया ‘ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईस्ट’ का गौरव

जमुई जिले के दृष्टिबाधित छात्र संतोष कुमार कहते हैं कि पटना विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति वह नहीं है, जो अतीत में था. पटना विश्वविद्यालय का गौरवशाली अतीत रहा है. इस विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र देश-विदेश में नाम कमा चुके हैं, लेकिन आज इसकी स्थिति बेहद खराब है. संतोष कहते हैं कि पटना विश्वविद्यालय ‘ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईस्ट’ का गौरव अब नहीं रह गया है.

लखनऊ के किशोर बोले- बिहार में विकलांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम, 2016 का नहीं हो रहा ठीक से क्रियान्वयन

किशोर कुमार सिंह लखनऊ स्थित शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के छात्र हैं. अभी पटना विश्वविद्यालय के दृष्टिबाधित छात्रावास में रहते हैं. उन्होंने कहा, ‘विकलांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम, 2016 का बिहार में ठीक से क्रियान्वयन नहीं हो रहा. मैं ऐसी पार्टी को वोट दूंगा, जो शिक्षा को प्राथमिकता दे और इस अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करे.’ किशोर ने दावा किया कि बिहार के विश्वविद्यालयों में दृष्टिबाधित छात्रों के लिए ऑडियो लैब जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं.

कुछ छात्रों ने की प्रशांत किशोर की घोषणा की सराहना

पटना में पढ़ने वाले छात्रों ने जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर के उस दावे की सराहना की, जिसमें इलेक्शन स्ट्रैटेजिस्ट ने कहा कि उनकी पार्टी सत्ता में आयी, तो बिहार के युवाओं को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा.

बिहार की जनता के क्या हैं मुद्दे.

उर्दू विभाग की महजबीन को जन सुराज से है ‘उम्मीद’

पटना विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग की प्रथम वर्ष की छात्रा महजबीन फिरदौस पहली बार मतदान करेंगी. उनका कहना है कि जन सुराज उन्हें ‘उम्मीद की किरण’ लगती है, हालांकि उन्होंने कहा कि मतदान से पहले वह परिवार से सलाह लेंगी.

शिक्षा और स्वास्थ्य की हालत खराब – गौरव कुमार

मनोविज्ञान विभाग के स्नातकोत्तर में पढ़ रहे गौरव कुमार ने कहा, ‘शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र की हालत खराब है. भ्रष्टाचार चरम पर है. पलायन बिहार की सबसे बड़ी समस्या बन गया है.’ उन्होंने कहा, ‘हमारे क्षेत्र जहानाबाद ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) शासन में सबसे ज्यादा नुकसान झेला था, हम नहीं चाहते कि वह दौर दोबारा लौटे.’

Bihar Election 2025: डीके प्रताप को है इंडिया गंठबंधन से उम्मीदें

पटना साइंस कॉलेज के क्रिकेट ग्राउंड पर प्रैक्टिस करने वाले बेतिया के छात्र डीके प्रताप ने कहा, ‘राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार शिक्षा, रोजगार और पलायन नियंत्रण के मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है.’ डीके को इंडिया गठबंधन से उम्मीदें हैं.

भूगोल के छात्र ने कहा- उम्मीदवार को देखकर करेंगे वोट

भूगोल विभाग में अध्ययन कर रहे ध्रुव कुमार ने कहा, ‘मैं इस कॉलेज में बड़ी उम्मीदों के साथ आया था, लेकिन शिक्षण पद्धति पुरानी और अप्रभावी है. शिक्षा प्रणाली में शीर्ष से लेकर निचले स्तर तक लापरवाही झलकती है.’ उन्होंने कहा कि वे अपनी सीट के उम्मीदवारों की गुणवत्ता देखकर ही वोट तय करेंगे.

नयी शिक्षा नीति के क्रियान्वयन से निराश हैं पूर्णिया के छात्र

पूर्णिया के एक अन्य छात्र ने कहा कि ‘नयी शिक्षा नीति का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर बेहद कमजोर है.’ उन्होंने इच्छा जतायी कि ‘ऐसा युवा नेता उभरे, जो आधुनिक शिक्षा की जरूरतों को समझता हो.’

सारण की अंशाली बोलीं- शिक्षा की बुनियाद मजबूत करने और नागरिक अनुशासन को विकसित करने की जरूरत

सारण की रहने वाली छात्रा अंशाली पाठक ने कहा कि शिक्षा की बुनियाद को मजबूत करने और नागरिक अनुशासन को विकसित करने की जरूरत है, जो केवल एक सक्षम सरकार और जागरूक नागरिकों के संयुक्त प्रयास से ही संभव है.

बिहार में चुनाव कब होगा?

बिहार में विधानसभा के चुनाव की तारीख की घोषणा हो चुकी है. नामांकन की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है. बिहार में इस बार 2 चरणों में चुनाव कराये जा रहे हैं. पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर को और दूसरे चरण की वोटिंग 11 नवंबर को होगी.

बिहार में युवाओं के क्या हैं मुद्दे?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में युवाओं ने कहा है कि उन्हें अब तक की सरकारों ने निराश ही किया है. वे ऐसी सरकार बिहार में चाहते हैं, जो शिक्षा व्यवस्था में सुधार कर सके और रोजगार का सृजन करने में सक्षम हो.

बिहार का मुख्यमंत्री कौन है?

जनता दल यूनइटेड (जदयू) के नेता नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं. वर्ष 2005 से वह लगातार बिहार के सीएम की कुर्सी पर विराजमान हैं. वर्तमान में वह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और अन्य दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं.

नीतीश कुमार का मुकाबला इस बार किससे है?

बिहार चुनाव 2025 में सीधे तौर पर नीतीश कुमार का मुकाबला किसी से नहीं है, क्योंकि वह खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. हां, मुख्यमंत्री के रूप में उनका मुकाबला तेजस्वी यादव से है, जो लालू प्रसाद यादव के पुत्र हैं. तेजस्वी महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित किये गये हैं. इस गठबंधन में कांग्रेस और वीआईपी जैसे दल शामिल हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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