बिहार: अगुवानी पुल का मलबा हटाने का काम नहीं हो सका शुरू, ट्विन टावर को जमींदोज करने वाले विशेषज्ञ बुलाए गए

भागलपुर में अगुवानी-सुलतानगंज निर्माणाधीन पुल ध्वस्त होने के बाद अब उस पुल का मलबा हटाना एक चुनौती बनी हुई है. गंगा में गिरे मलबे को हटाने के लिए सरकार ने 15 दिनों की मोहलत दी थी. लेकिन अभी तक इस ओर काम शुरू नहीं हो सका है.
भागलपुर में अगुवानी-सुलतानगंज पुल निर्माण के दौरान ही भरभराकर पिछले दिनों गंगा में समा गया. अब गंगा में गिरे करीब 14 हजार टन मलबा हटाना एक चुनौती बन गया है. मलबा हटाने के लिए मुंबई व मद्रास से विशेषज्ञ आ रहे हैं. मलबा हटाने के लिए उच्च क्षमता की पांच पोकलेन मशीन लाया जा रहा है. वहीं मलबा हटाने का काम दूसरे दिन भी ठप ही रहा. जबकि सरकार की ओर से 15 दिनों के अंदर मलबा हटाने का निर्देश जारी किया गया था.
गंगा में हजारों टन गिरे मलबे ने अब एक चुनौती सामने रख दी है. नोएडा में जिन विशेषज्ञों की देखरेख में ट्विन टावर को जमींदोज किया गया था, उन्हीं विशेषज्ञों को इस पुल का मलबा हटाने के लिए बुलाया गया है. कोलकाता से विशेष प्रकार की पोकलेन मशीनें मंगवाई जा रही है. मलबा एसपी सिंगला कंपनी को ही हटाना है. जिस कंपनी ने इस पुल को बनाया और ध्वस्त होने के बाद उसे ब्लैकलिस्टेड किया गया.
बताते चलें कि घटना के बाद अभी तक मलबा हटाने का काम शुरू नहीं किया जा सका. बड़ी पोकलेन मशीन नहीं होने की वजह से भी परेशानी आई है. करीब एक सप्ताह का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक मलबा हटाने के लिए कोई पहल नहीं हुई है. वहीं इस हादसे में एक गार्ड गायब हो गया है जिसका अभी तक कोई अता-पता नहीं चल सका. लापता गार्ड विभाष यादव को खोजने के लिए सर्च अभियान चलाया गया लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी है.
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बता दें कि बीते 4 जून को अगुवानी-सुल्तानगंज गंगा पुल का सुपर स्ट्रक्चर अचानक ध्वस्त हो गया. पुल का बड़ा हिस्सा गंगा में भरभराकर गिर गया. लोगों में इसे लेकर आक्रोश है. आरोप लग रहे हैं कि पुल बनाने में काफी अनियमितता बरती गयी जिसके कारण 1700 करोड़ से अधिक का पुल पानी में बह गया.
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