एक ही कार अलग-अलग राज्यों में अलग कीमत पर क्यों मिलती है? जानें वजह

Updated at : 17 Mar 2026 2:12 PM (IST)
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Car Prices Variation

कार शोरूम और उलझन में एक आदमी की सांकेतिक फोटो (Photo: Canva)

Car Prices Variation: एक ही कार की कीमत हर शहर में अलग दिखती है क्योंकि असली खेल एक्स-शोरूम नहीं, ऑन-रोड प्राइस का होता है. अलग-अलग राज्यों के टैक्स, RTO चार्ज और लोकल फीस मिलकर कीमत बदल देते हैं. आइए इसके बारे में डिटेल में जानते हैं.

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Car Prices Variation: भारत में कार खरीदने का प्लान बना रहे कई लोग एक बात देखकर हैरान हो जाते हैं. वही कार, वही मॉडल, लेकिन कीमत हर शहर में अलग-अलग. कभी ऑनलाइन चेक करो तो अलग रेट, और शोरूम जाओ तो कुछ और ही कीमत सुनने को मिलती है. पहली बार कार खरीदने वालों के लिए ये काफी कन्फ्यूजिंग हो जाता है. आखिर जब गाड़ी एक ही है, तो शहर बदलते ही उसकी कीमत क्यों बदल जाती है? आइए इस सवाल का जवाब आपको डिटेल में देते हैं.

क्यों बढ़ जाती है कार की असली कीमत?

सबसे पहले जो कीमत आपके सामने आती है, उसे एक्स-शोरूम प्राइस (ex-showroom price) कहा जाता है. यह कीमत कंपनी तय करती है और आमतौर पर पूरे भारत में लगभग एक जैसी होती है. लेकिन असल में आप सिर्फ इतनी रकम देकर कार घर नहीं ले जा सकते. क्योंकि जब आप कार खरीदने जाते हैं, तो इसमें कई और चार्जेज जुड़ जाते हैं. इन्हीं एक्स्ट्रा खर्चों को मिलाकर जो कुल रकम बनती है, उसे ऑन-रोड प्राइस (on-road price) कहते हैं. और यही वो असली कीमत होती है, जो आपको आखिर में चुकानी पड़ती है.

कौन-कौन से चार्जेज होते हैं? 

ऑन-रोड प्राइस में रोड टैक्स, रजिस्ट्रेशन फीस, इन्शुरन्स और कभी-कभी TCS (Tax Collected at Source) जैसे चार्जेज जुड़े होते हैं. रजिस्ट्रेशन का काम हर राज्य का RTO (Regional Transport Office) करता है. यही वजह है कि ये चार्जेज शहर या राज्य के हिसाब से बदलते रहते हैं. इसीलिए, एक ही कार की कीमत अलग-अलग शहरों में थोड़ी ऊपर-नीचे हो सकती है.

रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस डालती हैं कीमत पर बड़ा असर

कार की कीमत अलग-अलग राज्यों में अलग होने का सबसे बड़ा कारण होता है रोड टैक्स. भारत में हर राज्य सरकार खुद तय करती है कि रोड टैक्स कितना लगेगा. यही वजह है कि कहीं यह टैक्स कार की कीमत का एक फिक्स परसेंट होता है, तो कहीं स्लैब सिस्टम लागू होता है. यानी जितनी महंगी कार, उतना ज्यादा टैक्स. और इसी फर्क की वजह से गाड़ी की ऑन-रोड कीमत में बड़ा बदलाव आ जाता है.

सिर्फ रोड के अलावा रजिस्ट्रेशन फीस भी आपकी जेब पर असर डालती है. यह फीस हर राज्य के RTO (रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस) द्वारा ली जाती है. इसके नियम भी जगह के हिसाब से बदलते रहते हैं. कुछ राज्यों में तो इसके साथ अलग से लोकल चार्जेस भी जोड़ दिए जाते हैं. यही कारण है कि किसी गाड़ी को रजिस्टर कराने की कुल लागत हर जगह एक जैसी नहीं होती.

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Ankit Anand

लेखक के बारे में

By Ankit Anand

अंकित आनंद, प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वह पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं. टेक जर्नलिस्ट के तौर पर अंकित स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) न्यूज, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी खबरें कवर करते हैं. इसके अलावा, वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी अहम खबरों पर भी लिखते हैं. अंकित ने GGSIP यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन की है.

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