टाटा-महिंद्रा ने कसी कमर, अब लंदन की सड़कों पर दौड़ेंगी भारतीय इलेक्ट्रिक कारें, भारत-ब्रिटेन FTA से खुला रास्ता

Edited by Rajeev Kumar
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ब्रिटेन ने खोला भारतीय इलेक्ट्रिक एसयूवी के लिए अपना बाजार / एआई इमेज

भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते से देसी ऑटो कंपनियों की लॉटरी लग गई है. जानिए कैसे 15 जुलाई से लागू हो रही इस मेगा डील के बाद टाटा और महिंद्रा की इलेक्ट्रिक गाड़ियां बिना किसी टैक्स के ब्रिटेन में एंट्री करेंगी.

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भारत और ब्रिटेन के बीच होने जा रहा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होने वाला है. इस मेगा डील के आधिकारिक तौर पर लागू होने के बाद भारतीय वाहन निर्माता कंपनियों के लिए ब्रिटेन का विशाल इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाजार पूरी तरह खुल जाएगा. टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसी दिग्गज घरेलू कंपनियां अब ब्रिटेन में बड़े पैमाने पर अपनी मेड-इन-इंडिया इलेक्ट्रिक कारों को निर्यात करने की बड़ी योजना पर काम कर रही हैं. यह समझौता न केवल दोनों देशों के बीच व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत को ईवी मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भी स्थापित करेगा.

15 जुलाई से बदलेगी पूरी तस्वीर: द्विपक्षीय व्यापार को मिलेगी रफ्तार

भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के तहत दोनों देशों ने साल 2030 तक अपने आपसी व्यापार को दोगुना करके 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. यह ऐतिहासिक समझौता आने वाली 15 जुलाई से पूरी तरह से प्रभावी होने जा रहा है. भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए यह इसलिए भी सबसे मुफीद मौका है क्योंकि ब्रिटेन भी भारत की तरह ही एक ‘राइट-हैंड-ड्राइव’ मार्केट है. इसका सीधा मतलब यह है कि भारतीय कंपनियों को ब्रिटेन के बाजार के लिए गाड़ियों के स्टीयरिंग व्हील की पोजीशन या बेसिक डिजाइन में कोई बड़ा बदलाव नहीं करना पड़ेगा, जिससे उनका उत्पादन खर्च काफी कम हो जाएगा.

कोटा प्रणाली के तहत मिलेगा टैक्स फ्री एंट्री का सबसे बड़ा फायदा

इस समझौते के तहत ब्रिटेन भारतीय इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन से चलने वाले यात्री वाहनों को चरणबद्ध तरीके से कस्टम ड्यूटी (आयात शुल्क) से पूरी राहत देने जा रहा है. हालांकि, यह व्यवस्था एक खास कोटा प्रणाली के तहत संचालित होगी, जो समझौते के छठे वर्ष से लागू हो जाएगी. शुरुआती चरण यानी छठे वर्ष में भारत से कुल 17,600 वाहनों को बिना किसी टैक्स के ब्रिटेन में प्रवेश मिलेगा, जो समय के साथ लगातार बढ़ता जाएगा. समझौते के 15वें वर्ष तक इस टैक्स-फ्री एक्सपोर्ट का कोटा बढ़ाकर सालाना 88,000 वाहनों तक कर दिया जाएगा, जो भारतीय ऑटो जगत के लिए एक बेहद बड़ा बाजार तैयार करेगा.

बजट और प्रीमियम कैटेगिरी के लिए तय हुईं ये खास शर्तें

ब्रिटेन के इस टैक्स-फ्री कोटे का लाभ उठाने के लिए एक मूल्य सीमा भी तय की गई है. इसके तहत केवल 80,000 पाउंड तक की कीमत वाले भारतीय वाहनों को ही निर्धारित कोटा के भीतर शुल्क-मुक्त प्रवेश की अनुमति मिलेगी. इस सीमा के भीतर अलग-अलग बजट श्रेणियों के लिए कोटा तय किया गया है, जिसमें 15वें वर्ष तक ‘20,000 पाउंड से कम’ और ‘20,000 से 40,000 पाउंड’ वाले सेगमेंट के लिए 34,000-34,000 वाहनों की सीमा होगी, जबकि ‘40,000 से 80,000 पाउंड’ वाली प्रीमियम श्रेणी के लिए यह सीमा 20,000 वाहन सालाना होगी. हालांकि, जो गाड़ियां 80,000 पाउंड से अधिक महंगी होंगी, उन्हें इस रियायत का कोई फायदा नहीं मिलेगा.

मारुति, टाटा और महिंद्रा ने शुरू की वैश्विक बाजार पर कब्जे की तैयारी

भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां इस मौके को भुनाने के लिए पहले से ही रणनीतियां तैयार कर चुकी हैं. मारुति सुजुकी अपनी पहली इलेक्ट्रिक एसयूवी ‘ई-विटारा’ को यूरोप भेजने की शुरुआत कर चुकी है और कंपनी के लिए ब्रिटेन एक मुख्य टारगेट मार्केट है. दूसरी तरफ, महिंद्रा अपने अपकमिंग इलेक्ट्रिक एसयूवी पोर्टफोलियो के वैश्विक विस्तार के लिए ब्रिटेन को एक बड़े लॉन्चपैड के रूप में देख रही है. टाटा मोटर्स भी इस डील को पर्यावरण के अनुकूल परिवहन और भारतीय इंजीनियरिंग की वैश्विक साख बढ़ाने वाले एक बड़े गेम-चेंजर के तौर पर देख रही है. यह कदम निश्चित रूप से ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान देगा.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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