क्या आपकी बाइक में भी नहीं है किक स्टार्ट? जानिए इलेक्ट्रिक स्टार्ट का वो सच जो कोई नहीं बताता

Edited by Rajeev Kumar
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बाइक का किक स्टार्ट और सेल्फ स्टार्ट / सिम्बॉलिक एआई पिक

बाइक में किक स्टार्ट और इलेक्ट्रिक स्टार्ट के काम करने का तरीका पूरी तरह अलग है. जानिए सेल्फ स्टार्ट की वो बड़ी कमजोरियां जो भारी बारिश या कड़ाके की ठंड में आपकी गाड़ी को बीच रास्ते में ठप कर सकती हैं

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आज की आधुनिक मोटरसाइकिलों और स्कूटर्स से किक स्टार्ट का गायब होना सिर्फ एक फैशन या डिजाइन का बदलाव नहीं है, बल्कि इसके पीछे ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग का एक पूरा गणित छिपा हुआ है. आधी सदी से भी ज्यादा समय तक दुपहिया वाहनों की जान रहे किक स्टार्ट को अब इलेक्ट्रिक स्टार्ट (सेल्फ स्टार्ट) ने लगभग पूरी तरह रिप्लेस कर दिया है. जहां एक तरफ सेल्फ स्टार्ट ने राइडर्स की जिंदगी को बेहद आसान और आरामदायक बना दिया है, वहीं दूसरी तरफ खराब मौसम या बैटरी डेड होने की स्थिति में यह तकनीक राइडर्स के लिए एक बड़ी मुसीबत भी खड़ी कर देती है. आइए समझते हैं कि ये दोनों सिस्टम अंदर से कैसे काम करते हैं और आपके सफर के लिए कौन सा ज्यादा भरोसेमंद है.

कैसे काम करता है पैर से इंजन जगाने वाला किक स्टार्ट मैकेनिज्म?

किक स्टार्ट एक पूरी तरह से मैकेनिकल प्रक्रिया है, जिसे चालू करने के लिए किसी बाहरी इलेक्ट्रिकल पावर या बैटरी की जरूरत नहीं होती. जब आप बाइक के लीवर पर पैर से दबाव बनाते हैं, तो यह लीवर सीधे इंजन के क्रैंकशाफ्ट से जुड़े एक खास रैटचेट गियर को तेजी से घुमाता है. इस घूमने की प्रक्रिया से इंजन के अंदर मौजूद पिस्टन ऊपर-नीचे गति करता है और सिलेंडर में मौजूद फ्यूल कंप्रेस होकर चिंगारी के संपर्क में आता है. जैसे ही ईंधन में ब्लास्ट होता है, इंजन अपने आप चालू हो जाता है. इस सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी इसका रैटचेट गियर है, जो इंजन स्टार्ट होते ही किक लीवर को फ्री कर देता है ताकि चलती बाइक में पैडल अपने आप न घूमने लगे. कम्यूटर और बजट बाइक्स में आज भी इसे सबसे भरोसेमंद बैकअप माना जाता है.

बटन दबाते ही चालू होने वाले इलेक्ट्रिक स्टार्ट का इनसाइड साइंस

इलेक्ट्रिक स्टार्ट पूरी तरह से एक इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम है, जो आपके वाहन की बैटरी पर निर्भर करता है. जब आप हैंडल पर लगे स्टार्ट बटन को दबाते हैं, तो बैटरी से भारी मात्रा में करंट निकलकर सीधे स्टार्टर मोटर में जाता है. इस मोटर के अंदर तांबे के तारों की सैकड़ों-हजारों वाइंडिंग होती है, जो करंट मिलते ही एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र (मैग्नेटिक फील्ड) बनाती हैं. इस चुंबकीय शक्ति से मोटर का गियर (रोटर) बाहर की तरफ निकलता है और इंजन के रिंग गियर से मिलकर उसे तेजी से घुमा देता है. जैसे ही इंजन स्टार्ट होता है और आप बटन छोड़ते हैं, यह रोटर तुरंत पीछे हट जाता है. यह पूरी प्रक्रिया महज कुछ सेकेंड्स में बिना किसी शारीरिक मेहनत के पूरी हो जाती है.

भारी बारिश और कड़ाके की ठंड: दोनों सिस्टम्स की सबसे बड़ी कमजोरी

सुविधाजनक होने के बावजूद इन दोनों तकनीकों की अपनी कुछ सीमाएं और कमजोरियां हैं. किक स्टार्ट की सबसे बड़ी समस्या यह है कि कड़ाके की ठंड में या लंबे समय तक वाहन खड़ा रहने पर यह आसानी से स्टार्ट नहीं होता और राइडर को शारीरिक रूप से थका देता है. वहीं दूसरी ओर, इलेक्ट्रिक स्टार्ट का सबसे बड़ा दुश्मन पानी और अत्यधिक ठंड है. अगर भारी बारिश या जलभराव के कारण बाइक का इलेक्ट्रिकल सिस्टम गीला हो जाए, तो शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है और बाइक पूरी तरह ठप हो सकती है. इसके अलावा, अत्यधिक ठंडी जगहों पर बैटरियां अक्सर फ्रीज हो जाती हैं या उनका वोल्टेज गिर जाता है, जिससे स्टार्टर मोटर को पर्याप्त क्रैंकिंग एम्प्स (पावर) नहीं मिल पाती और सेल्फ स्टार्ट काम करना बंद कर देता है.

अगर रास्ते में बैटरी हो जाए पूरी तरह डेड, तो क्या हैं आपके पास विकल्प?

बिना किक वाली आधुनिक बाइक के साथ सफर करते समय अगर बीच रास्ते में बैटरी पूरी तरह डिस्चार्ज हो जाए, तो राइडर के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाता है. ऐसी स्थिति में वाहन को दोबारा चालू करने के दो ही मुख्य तरीके बचते हैं. पहला तरीका है ‘जंप-स्टार्ट’, जिसमें किसी दूसरी चालू गाड़ी की बैटरी से केबल जोड़कर आपकी बाइक को शुरुआती पावर दी जाती है. दूसरा और सबसे व्यावहारिक तरीका है ‘पुश-स्टार्ट’ या धक्का मारना, जो केवल मैनुअल गियरबॉक्स वाली बाइक्स में ही संभव है. इसमें बाइक को दूसरे गियर में डालकर, क्लच दबाकर तेजी से धक्का दिया जाता है और गति पकड़ते ही क्लच छोड़ने पर पहियों का मोमेंटम इंजन को बैकवर्ड घुमाकर स्टार्ट कर देता है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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