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इस माह गरीबों को चीनी मिलने पर आफत

Updated at : 06 Apr 2016 1:00 AM (IST)
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इस माह गरीबों को चीनी मिलने पर आफत

रांची: झारखंड सरकार के लिए चीनी आपूर्ति का टेंडर करने में भारत सरकार की मान्यता प्राप्त ट्रेडिंग एजेंसी एनसीडेक्स फेल हो गयी है. मंगलवार को एनसीडेेक्स द्वारा चीनी के लिए आयोजित ट्रेडिंग में कोई भी व्यक्ति या संस्था सफल नहीं हुए. नतीजन, अप्रैल महीने में गरीबों को चीनी वितरण पर संकट हो गया है. आपूर्तिकर्ता […]

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रांची: झारखंड सरकार के लिए चीनी आपूर्ति का टेंडर करने में भारत सरकार की मान्यता प्राप्त ट्रेडिंग एजेंसी एनसीडेक्स फेल हो गयी है. मंगलवार को एनसीडेेक्स द्वारा चीनी के लिए आयोजित ट्रेडिंग में कोई भी व्यक्ति या संस्था सफल नहीं हुए. नतीजन, अप्रैल महीने में गरीबों को चीनी वितरण पर संकट हो गया है. आपूर्तिकर्ता नहीं मिलने की वजह से सरकार के पास बांटने के लिए चीनी उपलब्ध नहीं होगी. इस वजह से चालू महीने में चीनी का वितरण नहीं किया जा सकेगा.
ट्रेडिंग में चीनी का अधिकतम मूल्य 41 रुपये (बिना पैकेट के) व 43 रुपये (पैकेजिंग के साथ) निर्धारित किया गया था. इससे अधिक मूल्य के आवेदन को ट्रेडिंग में स्वीकार नहीं किया जाना था. एनसीडेक्स द्वारा आयोजित ट्रेडिंग में बीटा इडेबल प्रोसेसिंग और गार्डन कोड डिस्टीलरीज प्राइवेट लिमिटेड नाम की दो कंपनियां शामिल हुई थीं. दोनों कंपनियों ने क्रमश: 46 और 50 रुपये का प्राइस कोट किया था. अधिकतम ट्रेडिंग प्राइस से ज्यादा कोट होने की वजह से दोनों ही कंपनियां बाहर हो गयीं.
नमक की आपूर्ति भी नहीं कर पायी थी एनसीडेक्स : झारखंड में नमक की आपूर्ति के लिए एनसीडेक्स के जरिये की गयी ट्रेडिंग का अनुभव अच्छा नहीं रहा है. टेंडर अवधि खत्म हो जाने के बाद भी नमक की आपूर्ति नहीं की गयी है. अब तक राज्य के केवल छह जिलों में ही नमक की आपूर्ति की गयी है. गढ़वा, लातेहार, पलामू, हजारीबाग, जमशेदपुर और बोकारो को छोड़ कर राज्य के शेष जिलों में नमक पहुंचा ही नहीं है. इन छह जिलों में भी नमक प्रखंडों तक नहीं पहुंचाया जा सका है.
बाजार की मांग से कीमत तय करती है एनसीडेक्स : खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा नमक का टेंडर एनसीडेक्स के माध्यम से किया गया है. एनसीडेक्स भारत सरकार की मान्यता प्राप्त ट्रेडिंग एजेंसी है. इसमें खाद्य पदार्थों के लिस्टेड आइटम की दर बाजार मांग के मुताबिक तय होती है. एनसीडेक्स द्वारा आयोजित किये गये टेंडर में कंपनियां और सरकार के बीच में तीसरी पार्टी के माध्यम से काम होता है. इस वजह से सरकार और कंपनियां आपस में डील नहीं कर पाती. बाजार मूल्य के मुताबिक खरीदे गये उत्पाद की कीमत समय-समय पर तय होती है. इस कारण बड़ी कंपनियां टेंडर में हिस्सा भी नहीं लेती हैं. इसका असर आपूर्ति पर पड़ता है. बाजार भाव तेज हो जाने और संसाधनों के सीमित होने की वजह से छोटी कंपनियां कई बार निर्धारित मात्रा में आपूर्ति नहीं कर पाती हैं.
एनसीडेक्स के माध्यम से चीनी का आपूर्तिकर्ता नहीं मिला है. इससे मुश्किल तो होगी, लेकिन गरीबों के बीच चीनी का वितरण जरूर कराया जायेगा. सरकार अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रही है. दो-तीन दिन में निर्णय ले लिया जायेगा. प्रक्रिया में समय लगने पर एक साथ दो माह की चीनी भी वितरित करायी जाती है.
विनय चौबे, सचिव, खाद्य आपूर्ति विभाग
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