यूपीआई और वॉलेट में क्या अंतर है?

Edited by Rajeev Kumar
Updated:
विज्ञापन

यूपीआई बनाम डिजिटल वॉलेट / सिम्बॉलिक एआई इमेज

फोनपे की नई पॉलिसी के बाद यूपीआई और डिजिटल वॉलेट पर चर्चा तेज है. जानिए दोनों में क्या अंतर है, पैसा कहां रहता है और कौन-सा विकल्प आपके लिए बेहतर है...

विज्ञापन

फोनपे ने हाल ही में कुछ इनएक्टिव वॉलेट यूजर्स के लिए अपनी वॉलेट-संबंधी नीतियों को अपडेट किया है. इस घोषणा से ग्राहकों के मन में अनेक सवाल उठने लगे हैं और उनका ध्यान इस ओर गया कि डिजिटल वॉलेट क्या है और यह कैसे काम करता है.

ग्राहकों के बीच हो रही इस बातचीत में एक दिलचस्प बात यह देखने को मिली कि कई ग्राहक वॉलेट और यूपीआई शब्दों का इस्तेमाल एक ही अर्थ में करते हैं, जबकि ये दोनों बुनियादी रूप से अलग-अलग पेमेंट प्रोडक्ट हैं. इस बातचीत से कई सवाल उठते हैं, जैसे ‘‘क्या यूपीआई और वॉलेट एक हैं?”, ‘‘पैसा वास्तव में कहां रखा रहता है?” और ‘‘प्रत्येक मामले में पेमेंट की प्रोसेसिंग कैसे होती है?”

ये सवाल इस बारे में जागरूकता बढ़ाए जाने की जरूरत पर जोर देते हैं कि ये पेमेंट प्रोडक्ट कैसे काम करते हैं. डिजिटल पेमेंट दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं. चाहे ग्रोसरी का पेमेंट देना हो, फूड ऑर्डर करना हो, कैब बुक करना हो या फिर बिल को दोस्तों में बांटना हो, यूपीआई और डिजिटल वॉलेट का उपयोग हर कोई कभी न कभी करता है. इन दोनों के बीच का अंतर जानकर ग्राहक ज्यादा विश्वास से पेमेंट विकल्प चुन सकते हैं. वो बेहतर तरीके से समझ सकते हैं कि उनके द्वारा किस प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है. आइए जानें कि यूपीआई और वॉलेट कैसे काम करते हैं, पैसा कहां जमा रहता है और इन दोनों को किन-किन जरूरतों के लिए बनाया गया है.

यूपीआई क्या है?

यूपीआई (यूनिफाईड पेमेंट इंटरफेस) एक पेमेंट सिस्टम है, जो सीधे आपके बैंक खाते से जुड़ा होता है. आप जब भी यूपीआई से कोई पेमेंट करते हैं, तो पैसा सीधे आपके बैंक खाते से दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में हाथों-हाथ पहुंच जाता है. आपको पेमेंट करने के लिए अलग से पैसे को वॉलेट में डालने की जरूरत नहीं पड़ती है. इस तरह के पेमेंट यूपीआई आईडी, क्यूआर कोड या यूपीआई से लिंक्ड मोबाईल नंबर से होते हैं.

आसान भाषा में इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि यूपीआई एक ऐसा डिजिटल पुल है, जो आपके बैंक खाते को दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते से जोड़ता है. जब तक आप पेमेंट नहीं कर देते हैं, तब तक पैसा आपके बैंक खाते में ही बना रहता है.

वॉलेट क्या है?

डिजिटल वॉलेट पैसे रखने के लिए एक खाता है, जिसमें आप पहले पैसे डालते हैं और फिर उस पैसे से धीरे-धीरे पेमेंट करते रहते हैं. पेमेंट करने से पहले आपको वॉलेट को टॉप-अप करना होता है, यानी आपको पहले उसमें पैसे डालने पड़ते हैं. वॉलेट में बैंक खाते, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या किसी अन्य पेमेंट विधि से पैसा डाला जा सकता है. जब वॉलेट से पेमेंट किया जाता है, तो पैसा बैंक खाते की बजाय वॉलेट बैलेंस से कटता है. वॉलेट एक पर्स की तरह होता है, जिसमें आपका पैसा डिजिटल रूप में रखा होता है. पैसा तब तक वॉलेट में रखा रहता है, जब तक आप इसे खर्च नहीं करते हैं.

इन दोनों मामलों में पैसा कहां रखा रहता है?

यूपीआई

बैंक खाता → यूपीआई → मर्चेंट/दोस्त

पैसा तब तक आपके बैंक खाते में रहता है, जब तक पेमेंट नहीं कर दिया जाता.

वॉलेट

बैंक खाता/कार्ड → वॉलेट → मर्चेंट/दोस्त

पैसा पहले वॉलेट में जाता है और उसके बाद उससे पेमेंट किया जाता है.

यह भी पढ़ें: PhonePe Inactivity Fee को लेकर कंपनी ने दूर किया भ्रम, UPI पर नहीं पड़ेगा कोई असर

विज्ञापन
Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola