Russia-Ukraine War: विनाशकाल के एक साल पूरे! युद्ध की वर्षगांठ पर जेलेंस्की ने लिया जीत का संकल्प

Russia-Ukraine War: शुक्रवार को यूक्रेन पर रूस के हमले को एक साल हो गया. यह ऐसा युद्ध है जिसका अभी कोई समाधान नजर नहीं आ रहा. जेलेंस्की ने एक वीडियो संबोधन में कहा कि यह युद्ध द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से यूरोप का सबसे बड़ा और घातक युद्ध है. उन्होंने इसे रूस द्वारा फैलाया गया आतंक करार दिया.
Russia-Ukraine War: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने 2023 में जीत के लिए पूरी ताकत झोंकने का संकल्प लिया और कहा कि देश पर 24 फरवरी, 2022 की तारीख “हमारे जीवन का सबसे लंबा दिन” था, जब रूस ने देश पर आक्रमण किया था. शुक्रवार को यूक्रेन पर रूस के हमले को एक साल हो गया. यह ऐसा युद्ध है जिसका अभी कोई समाधान नजर नहीं आ रहा. जेलेंस्की ने एक वीडियो संबोधन में कहा कि यह युद्ध द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से यूरोप का सबसे बड़ा और घातक युद्ध है. उन्होंने इसे रूस द्वारा फैलाया गया आतंक करार दिया.
उन्होंने कहा, “हमें नहीं पता कि कल क्या होगा, लेकिन हम स्पष्ट रूप से समझते हैं कि प्रत्येक कल के लिए आपको लड़ने की जरूरत है…और हम लड़े हैं.” जेलेंस्की ने ट्वीट किया कि यूक्रेनवासियों ने खुद को ‘अजेय’ साबित किया है. उन्होंने बीते वर्ष को ‘दर्द, दुख, विश्वास और एकता का वर्ष’ कहा. उन्होंने कहा, ‘हम जानते हैं कि 2023 हमारी जीत का वर्ष होगा.’ यूक्रेनवासियों ने युद्ध में मारे गए हजारों लोगों की याद में मोमबत्ती जुलूस और शोक सभाओं का आयोजन किया, विशेष रूप से पूर्वी यूक्रेन में जहां लड़ाई में हर समय मृतकों की संख्या बढ़ रही है.
ऐसी चिंताएं थीं कि इस दिन रूस यूक्रेन के खिलाफ मिसाइल हमले और तेज कर सकता है. लेकिन गनीमत यह रही कि राजधानी कीव में रात भर हवाई हमले की चेतावनी सुनाई नहीं दी और सुबह शांति रही. यूक्रेन युद्ध में मारे गए लोगों की याद में विदेशों में भी श्रद्धांजलि दी गई. पेरिस में एफिल टावर को यूक्रेन के रंगों- पीले और नीले रंग में रोशन किया गया. युद्ध के एक साल बाद, हताहतों के आंकड़े दोनों पक्षों के लिए भयावह हैं. अनुमान के अनुसार, युद्ध में हजारों लोग मारे गए हैं और हजारों घायल हुए हैं.
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दुनिया के कई देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं और पश्चिमी देश यूक्रेन को सैन्य, आर्थिक एवं राजनीतिक रूप से समर्थन दे रहे हैं. हालांकि भारत ने इसपर अपना रुख साफ नहीं किया है. भारत अभी भी रूस से ही सस्ता तेल खरीद रहा है. साथ ही शांति वार्ता पर भारत ने जोर दिया है और इस प्रतिबंध से खुद को किनारे किया है.
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By Aditya kumar
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