ePaper

सारा गिल्बर्ट: कोरोना वैक्सीन बनाने वाली 'नायक', कभी साइंस छोड़ना चाहती थीं

Updated at : 24 Nov 2020 8:09 PM (IST)
विज्ञापन
सारा गिल्बर्ट:  कोरोना वैक्सीन बनाने वाली 'नायक', कभी साइंस छोड़ना चाहती थीं

सारा गिल्बर्ट आयरिश मूल की हैं. सारा का जन्म अप्रैल 1962 में हुआ था. महामारी विशेषज्ञ या वायरोलॉजिस्ट के तौर पर सारा ने साल 1994 में मलेरिया का वैक्सीन ईजाद करने वाली टीम के साथ अपना करियर शुरू किया था.

विज्ञापन

नयी दिल्ली: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने बताया कि उनकी कोरोना वैक्सीन 90 फीसदी तक कारगर है. करोड़ों लोगों को इस वैक्सीन का इंतजार है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि इस वैक्सीन की कामयाबी के पीछे किसका हाथ है. नहीं तो इस वीडियो में जान लीजिए.

पूरी दुनिया की उम्मीद इस वैक्सीन के पीछे महामारी विशेषज्ञ सारा गिल्बर्ट और उनकी टीम की मेहनत है. मार्च महीने से ही वे कोरोना का वैक्सीन ईजाद करने में जुटे हैं.

undefined

आयरिश मूल की हैं वैज्ञानिक सारा गिल्बर्ट

सारा गिल्बर्ट आयरिश मूल की हैं. सारा का जन्म अप्रैल 1962 में हुआ था. महामारी विशेषज्ञ या वायरोलॉजिस्ट के तौर पर सारा ने साल 1994 में मलेरिया का वैक्सीन ईजाद करने वाली टीम के साथ अपना करियर शुरू किया था. इसके बाद इबोला और मर्स जैसी महामारी के दौरान भी सारा गिल्बर्ट ने वैक्सीन बनाने में योगदान दिया.

undefined

एक समय साइंस छोड़ना चाहती थीं सारा

समाचार एजेंसी बीबीसी के साथ बातचीत में सारा गिल्बर्ट ने बताया कि यूनिवर्सिटी में पीएचडी के दौरान उन्होंने साइंस छोड़ने का मन बना लिया था. सारा ने इसकी वजह खुद में एकाग्रता की कमी को बताया था. सारा एक संगीतकार फैमिली से आती हैं.

undefined

अब तक की जिंदगी में सारा ब्रूइंग रिसर्च से लेकर ह्यूमन हेल्थ जैसे विषयों में काम कर चुकी हैं. फिलहाल सारा और उनकी टीम दुनिया को कोरोना महामारी से बचाने में लगी है.

सारा गिल्बर्ट के रिसर्च से भी मिला फायदा

कहा जाता है कि कोरोना वैक्सीन की नींव बहुत पहले ही रखी जा चुकी थी. इस तरह के वायरस को लेकर सारा गिल्बर्ट का किया गया शोध काफी पहले ही पेंटेट करवाया जा चुका था. यही वजह है कि सारा गिल्बर्ट की टीम का कोरोना वैक्सीन सबसे ज्यादा कारगर साबित होने जा रहा है.

वैक्सीन ईजाद करने के लिए यूनाईटेड किंगडम के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ रिसर्च और यूके रिसर्च एंड इनोवेशन ने सारा गिल्बर्ट और उनकी टीम को 2.2 मिलियन पाउंड की रकम दी थी.

undefined

दुनिया को बचाने में जुटी सारा गिल्बर्ट की टीम

सारा गिल्बर्ट और उनकी टीम मार्च महीने से ही कोरोना का टीका ईजाद करने में जुटे हैं. टीम ने टीका बना लिया अब उसका फाईनल ट्रायल किया जा रहा है. अब तक मिले नतीजों के आधार पर ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका ने दावा किया है कि उनकी वैक्सीन कोरोना के खिलाफ जंग में 90 फीसदी तक कारगर है. इस कामयाबी की नायक वाकई सारा गिल्बर्ट हैं.

undefined

इस वक्त ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका के अलावा मॉर्डना इंक, जॉनसन एंड जॉनसन, सिनोवैक बायोटेक, फाइजर बायोएनटैक और स्पूतनिक वैक्सीन के कारगर होने का दावा किया गया है. कीमत की बात की जाए तो इन सब में ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन सबसे कम कीमत वाली है.

Posted By- Suraj Thakur

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola