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अब ड्रोन रेस में कूदा अमेरिका, अगले 2-3 सालों में खरीदेगा लाखों ड्रोन, इस सोच को बदलना चाहते हैं ‘अंकल सैम’

8 Nov, 2025 9:17 am
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US Army to buy 1 million drones.

अमेरिकी सेना अगले 2-3 सालों में10 लाख ड्रोन खरीदेगी. फोटो- एआई जेनेरेटेड.

US Army to buy 1 million drones: दुनिया में युद्ध के बदलते परिप्रेक्ष्य में अब ड्रोन और अन्य अनमैन्ड हथियारों की रेस चल रही है. इसी कड़ी में अमेरिकी सेना अगले दो से तीन वर्षों में कम से कम दस लाख ड्रोन खरीद सकती है. वर्तमान में सेना प्रति वर्ष लगभग 50,000 ड्रोन ही खरीदती है.

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US Army to buy 1 million drones: रूस और चीनी सेना के आधुनिकीकरण और विश्व में बियर और ड्रैगन सेना के बढ़ते प्रभुत्व के मद्देनजर अब अमेरिका जागा है. न्यूक्लियर हथियारों के पुनर्परीक्षण की रेस शुरू करने के बाद अमेरिका अब ड्रोन रेस में आगे बढ़ रहा है. अमेरिकी सेना अब अपनी आर्मी के आधुनिकीकरण की ओर कदम बढ़ाने की योजना बना रही है. दुनिया में युद्ध के बदलते परिप्रेक्ष्य में अब ड्रोन और अन्य अनमैन्ड हथियारों की रेस चल रही है. इसी कड़ी में अमेरिकी सेना अगले दो से तीन वर्षों में कम से कम दस लाख ड्रोन खरीद सकती है. अमेरिकी सेना के सचिव डेनियल ड्रिस्कॉल ने कहा है कि आने वाले वर्षों में हर साल पाँच लाख से लेकर कई मिलियन (लाखों) ड्रोन तक हासिल कर सकती है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार सेना सचिव ड्रिस्कॉल ने ड्रोन खरीद में सेना के महत्वाकांक्षी विस्तार की रूपरेखा बताई और यह स्वीकार किया कि यह एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि वर्तमान में सेना प्रति वर्ष लगभग 50,000 ड्रोन ही खरीदती है. उन्होंने फोन पर कहा, “यह एक बड़ा प्रयास है. लेकिन यह ऐसा प्रयास है जिसे हम बहुत अच्छी तरह से करने में सक्षम हैं.” ड्रिस्कॉल उस समय पिकैटिनी आर्सेनल का दौरा कर रहे थे, जहाँ उन्होंने नेट राउंड्स (ऐसे सिस्टम जो जाल के माध्यम से ड्रोन को पकड़ने के लिए बनाए गए हैं) के साथ-साथ नए विस्फोटक और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक काउंटरमेजर सिस्टम की भी जांच-पड़ताल की, जिन्हें हथियार प्रणालियों में एकीकृत किया जा रहा है.

ड्रोन के क्षेत्र में अधिकांश उत्पादन पर चीन का प्रभुत्व है. चीन के पास लगभग 20 लाख रजिस्टर्ड ड्रोन हैं, हालांकि इनमें से ज्यादातर सिविल उपयोग में लाए जाते हैं, जबकि 15000 से कुछ ज्यादा ड्रोन का उपयोग चीनी मिलिटरी करती है. वहीं रूस के पास भी लगभग 15 लाख ड्रोन होने का अनुमान व्यक्त किया गया है, हालांकि उसकी आर्मी के पास कितने ड्रोन हैं, इसकी संख्या का खुलासा सार्वजनिक रूप से नहीं हुआ है. अमेरिकी अधिकारी ड्रिस्कॉल ने कहा, “हम अगले दो से तीन वर्षों में कम से कम एक मिलियन (दस लाख) ड्रोन खरीदने की उम्मीद करते हैं.” 

ड्रोन- कीमती उपकरण नहीं, खर्च होने वाले गोला बारूद

उन्होंने आगे कहा, “और हमें उम्मीद है कि आज से एक या दो वर्षों के भीतर, हम यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि किसी भी संघर्ष की स्थिति में, हमारे पास इतनी मजबूत और गहरी सप्लाई चेन होगी जिसे सक्रिय कर हम आवश्यकतानुसार जितने भी ड्रोन चाहिए, उतने का उत्पादन कर सकेंगे.” ड्रिस्कॉल ने कहा कि वह मूल रूप से यह बदलना चाहते हैं कि सेना ड्रोन को कैसे देखती है. हम उन्हें एक कीमती उपकरण की तरह नहीं बल्कि खर्च होने योग्य गोला-बारूद की तरह देखा जाना चाहिए.

भविष्य का युद्ध?

पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मुख्यालय) ड्रोन अधिग्रहण के अपने मिश्रित रिकॉर्ड को सुधारने की कोशिश कर रहा है. 2023 में, पेंटागन के नेताओं ने रेप्लिकेटर इनिशिएटिव की घोषणा की थी, यह एक डिपार्टमेंट वाइज योजना है, जिसका उद्देश्य अगस्त 2025 तक हजारों स्वायत्त ड्रोन हासिल करना और उन्हें तैनात करना है. हालाँकि, इस कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति पर अभी तक कोई अपडेट नहीं दिया गया है. जुलाई में, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसमें उन्होंने कहा कि वे “उन प्रतिबंधात्मक नीतियों को रद्द कर रहे हैं” जिन्होंने अब तक ड्रोन उत्पादन को प्रभावित किया था. आने वाले समय में अपने DOGE प्रोग्राम के तहत अमेरिकी सस्ते ड्रोन भी खरीदने की योजना बना रहा है. 

ड्रोन रेस और डर

अमेरिका, चीन और रूस इस ड्रोन रेस में अब आगे बढ़ रहे हैं. रूस के पास जहां प्रतिवर्ष 30,000 से 40 लाख ड्रोन बनाने की क्षमता मानी जाती है. वहीं चीन के पास भी इतनी ही क्षमता है. ऐसे में अब अमेरिका भी अपनी गति बढ़ाने की योजना बना रहा है. रूस यूक्रेन युद्ध में ड्रोन ने अपनी क्षमता दिखाई है. इसके साथ ही पूरे यूरोप में ड्रोन की दहशत साफ देखी जा रही है. पोलैंड के बाद जर्मनी के एयरपोर्ट पर भी इन्हें रिपोर्ट किया गया था. 

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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