टैक्स लगाकर फंसे ट्रंप, कोर्ट के आदेश के बाद अमेरिका को रिफंड करने पड़े 81 अरब डॉलर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फोटो पीटीआई
Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति खुद उनकी सरकार के लिए मुसीबत बन गई है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिकी सरकार को कंपनियों से वसूला गया 81 अरब डॉलर (करीब 6.7 लाख करोड़ रुपये) का टैक्स रिफंड के रूप में लौटाना पड़ा है. दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के इस विवादित टैरिफ को 'गैर-कानूनी' करार देते हुए रद्द कर दिया था.
Trump Tariff: इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने मई और जून के महीने में करीब 71 अरब डॉलर (लगभग 5.8 लाख करोड़ रुपये) कंपनियों के खातों में वापस भेज दिए हैं. अभी कंपनियों का और भी पैसा लौटाना बाकी है.
क्या है पूरा मामला?
राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने भारत, चीन और यूरोप समेत दुनिया के कई देशों से अमेरिका आने वाले सामानों पर भारी टैक्स लगा दिया था. ट्रंप का मानना था कि इससे विदेशी सामान महंगे हो जाएंगे, लोग अमेरिका में बने सामान खरीदेंगे और अमेरिकी सरकार की कमाई बढ़ेगी. लेकिन बड़ी-बड़ी कंपनियों ने इस टैक्स के खिलाफ अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में केस कर दिया. इसी साल फरवरी में कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ट्रंप सरकार का यह टैक्स नियम कानूनन गलत था. कोर्ट के आदेश के बाद अब सरकार को यह सारा पैसा कंपनियों को ब्याज समेत वापस करना पड़ रहा है.
कोर्ट के फैसले के बावजूद ट्रंप नए टैक्स लगाने की तैयारी में
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप का पुराना टैक्स नियम 24 जुलाई को खत्म हो रहा है, लेकिन वे अब दुनिया के देशों पर 10% से 12.5% का नया टैक्स लगाने की प्लानिंग कर रहे हैं. ट्रंप के इस नए टैक्स की मार भारत, चीन, ब्रिटेन, जापान और ताइवान पर पड़ सकती है.
ब्राजील और यूरोप को धमकी
ट्रंप ने ब्राजील पर 25% टैक्स लगाने की धमकी दी है. साथ ही कहा है कि जो भी यूरोपीय देश अमेरिकी टेक कंपनियों (जैसे गूगल, एप्पल) पर टैक्स लगाएगा, अमेरिका उसके सामानों पर 100% टैक्स ठोक देगा.
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By अरबिंद कुमार मिश्रा
अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.
झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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