ट्रंप का ऐलान: होर्मुज की होगी घेराबंदी, CENTCOM बोला- सिर्फ ईरानी बंदरगाहों पर पाबंदी, भारत के लिए क्या मायने?

तस्वीर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. सोर्स- एक्स/@WhiteHouse
Strait Of Hormuz Blockade: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब 'ऑयल वॉर' का रूप ले लिया है, जहां राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी के आदेश के बाद वैश्विक तेल सप्लाई पर गहरा संकट मंडराने लगा है. दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अमेरिकी नेवी की तैनाती से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है, जिसका सीधा असर भारत सहित पूरी दुनिया की इकोनॉमी और पेट्रोल-डीजल के दामों पर पड़ सकता है.
Strait Of Hormuz Blockade: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब ‘ऑयल वॉर’ में बदल चुका है. पाकिस्तान के इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे तक शांति वार्ता चली, जो पूरी तरह फेल हो गई. इसके बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि ‘दुनिया की सबसे ताकतवर’ अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से गुजरने वाले जहाजों को रोकने की प्रक्रिया शुरू कर रही है.
सोमवार शाम से शुरू होगी नाकाबंदी
डोनाल्ड ट्रंप के बयान के मुताबिक, 13 अप्रैल 2026 को सुबह 10:00 बजे (भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे) से अमेरिकी नेवी ईरान के बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों को रोक देगी. हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने साफ किया है कि यह पाबंदी सिर्फ ईरानी बंदरगाहों के लिए है. जो जहाज ईरान के अलावा दूसरे देशों के बंदरगाहों पर जा रहे हैं, उन्हें जाने दिया जाएगा. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि ईरान दुनिया को ‘डराने-धमकाने’ (एक्सटॉर्शन) की कोशिश कर रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) अमेरिकी रक्षा विभाग का एक प्रमुख कमांड है, जो मध्य पूर्व, मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के 21 देशों में अमेरिकी सैन्य अभियानों और सुरक्षा हितों की जिम्मेदारी संभालता है.
— U.S. Central Command (@CENTCOM) April 12, 2026
क्या है ट्रंप का पूरा प्लान?
ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में संकेत दिए हैं कि अगर ईरान नहीं माना, तो अमेरिका उसके बिजली घरों, पुलों और पानी साफ करने वाले प्लांट जैसे बुनियादी ढांचों पर हवाई हमले भी कर सकता है. इसके अलावा:
- टोल वसूलने पर रोक: ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से लाखों डॉलर की फीस वसूल रहा है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जो भी जहाज ईरान को यह ‘अवैध टैक्स’ देगा, उसे अमेरिकी नेवी रोक लेगी.
- समुद्री सुरंगें हटाना: अमेरिका उन समुद्री सुरंगों (माइन) को नष्ट करने का काम शुरू कर रहा है, जिन्हें कथित तौर पर ईरान ने बिछाया है.
- चीन को चेतावनी: ट्रंप ने कहा है कि अगर चीन ने इस संघर्ष के दौरान ईरान की मदद की, तो उस पर 50% टैरिफ (अतिरिक्त टैक्स) लगा दिया जाएगा.


क्यों खास है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ?
यह रास्ता दुनिया का सबसे जरूरी तेल सप्लाई रूट है. दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और गैस यहीं से होकर गुजरती है. सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत जैसे देशों का तेल इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचता है. 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से यहां तेल की सप्लाई कम हुई है, जिससे ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं.
ईरान ने दी सीधी धमकी
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा है कि यह समुद्री रास्ता उनके पूरी तरह कंट्रोल में है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने दो-टूक कहा है कि अगर तुम लड़ोगे, तो हम भी लड़ेंगे. ईरान का कहना है कि वह सिर्फ मिलिट्री जहाजों को रोकेगा, लेकिन व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता खुला है. हालांकि, अमेरिकी दबाव के कारण ईरान से होने वाला 20 लाख बैरल प्रतिदिन का तेल निर्यात अब खतरे में है.
भारत की बढ़ सकती है टेंशन
भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है, जिसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. अगर होर्मुज का रास्ता बंद या प्रभावित होता है, तो:
- भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं.
- माल ढुलाई महंगी होने से आम जरूरत की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं (महंगाई बढ़ेगी).
- डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो सकता है और देश का व्यापार घाटा बढ़ सकता है.
भारत की नई रणनीति
इस संकट से निपटने के लिए भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएई के राष्ट्रपति शेख नाहयान से मुलाकात की है. जानकारों के मुताबिक, भारत अब सिर्फ ओमान और दुबई के भरोसे रहने के बजाय अपना ‘ऑयल बास्केट’ बदल रहा है और दूसरे देशों से तेल खरीदने की योजना पर काम कर रहा है ताकि सप्लाई चेन बनी रहे.
Strengthening 🇮🇳 🇦🇪 Comprehensive Strategic Partnership.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) April 13, 2026
Highlights of my visit to the UAE. pic.twitter.com/vjmZmuZmEr
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अब तक कितना नुकसान?
28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक भारी तबाही हुई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में 3,000 और लेबनान में 2,000 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. फिलहाल 22 अप्रैल तक युद्धविराम की स्थिति है, लेकिन शांति वार्ता फेल होने के बाद आगे क्या होगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी है. अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कर दिया है कि जब तक ईरान परमाणु हथियार न बनाने का भरोसा नहीं देता, तब तक अमेरिका पीछे नहीं हटेगा.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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