Trinidad-Tobago : त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री का बिहार से है खास नाता, जानकर रह जाएंगे दंग
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 04 Jul 2025 6:21 AM
PM Modi Trinidad-Tobago visit/ PM Kamla Persad-Bissessar bihar
Trinidad-Tobago : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच देशों की यात्रा के दूसरे चरण में गुरुवार को त्रिनिदाद और टोबैगो पहुंचे. पीयार्को इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर ने 38 मंत्रियों और चार सांसदों के साथ उनका भव्य स्वागत किया. इसके बाद पीएम मोदी को एयरपोर्ट पर औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया.
Trinidad-Tobago : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच देशों की यात्रा के तहत त्रिनिदाद और टोबैगो पहुंचे हैं. पोर्ट ऑफ स्पेन में पीएम कमला ने अपने तमाम मंत्रियों और सांसदों के साथ उनका स्वागत किया. पहले यहां आदिवासी समुदाय रहते थे. 16वीं सदी में कोलंबस के आगमन के बाद स्पेन ने इसे उपनिवेश बना लिया. 1797 में ब्रिटेन ने इसे अपने कब्जे में ले लिया और 1889 में टोबैगो को त्रिनिदाद में मिला दिया. वर्ष 1962 में त्रिनिदाद एंड टोबैगो को ब्रिटेन से आजादी मिली.
कमला प्रसाद बिसेसर का बिहार से है खास नाता
कैरीबियाई देश त्रिनिदाद और टोबैगो में कमला प्रसाद बिसेसर प्रधानमंत्री हैं. उनका बिहार से खास नाता है. जी हां…उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद इसकी चर्चा वहां से हजारों किलोमीटर दूर बिहार के गांव भेलूपुर में हुई. दरअसल, बिहार के बक्सर जिले का भेलूपुर गांव कमला प्रसाद बिसेसर का पैतृक गांव है.
उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूर कैसे पहुंचे त्रिनिदाद और टोबैगो
भारत ने त्रिनिदाद एंड टोबैगो की स्वतंत्रता के बाद सबसे पहले राजनयिक संबंध स्थापित किए थे. दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंध 1845 में शुरू हुए, जब ‘फातेल रज्जाक’ नाम का जहाज 225 भारतीय मजदूरों को त्रिनिदाद लेकर पहुंचा. इनमें अधिकांश मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार से थे, जिन्हें 5 से 7 साल के अनुबंध पर काम के लिए ले जाया गया था. इन मजदूरों के साथ हुए इस अनुबंध को बोलचाल की भाषा में ‘गिरमिट’ कहा जाने लगा, जिससे ‘गिरमिटिया’ शब्द प्रचलित हुआ.
एग्रीमेंट पर काम करने वाले मजदूर ‘गिरमिटिया’ कहलाए. उनके वंशज आज भी त्रिनिदाद और टोबैगो में बसे हैं और देश की 13 लाख की आबादी में लगभग 40% हिस्सा रखते हैं. वर्तमान में वहां 5 लाख से ज्यादा लोग भारतीय मूल के हैं, जो अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं.
गिरमिटिया मजदूरों की वंशज हैं राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री
साल 1834 में ब्रिटेन ने अफ्रीका में गुलामी प्रथा खत्म की, जिससे यूरोपीय उपनिवेशों में मजदूरों की भारी कमी हो गई. इस कमी को पूरा करने के लिए भारत जैसे देशों से मजदूर लाए गए. त्रिनिदाद की राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री उन्हीं गिरमिटिया मजदूरों की वंशज हैं. पीएम कमला के परदादा राम लखन मिश्रा बिहार के बक्सर जिले के थे.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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