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सूरज से उठा शक्तिशाली महाविनाशक तूफान जानिए धरती से कब टकरायेगा, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

By Prabhat khabar Digital
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सूरज से उठा शक्तिशाली महाविनाशक तूफान धरती से टकरायेगा
सूरज से उठा शक्तिशाली महाविनाशक तूफान धरती से टकरायेगा
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Solar Storm Warning पूरी दुनिया में कोरोना महामारी के कम हो रहे प्रभाव के बीच अब धरती पर एक नया खतरा मंडरा रहा है. दरअसल, सूरज की सतह से पैदा हुआ एक शक्तिशाली सौर तूफान तेज गति से आगे बढ़ रहा है. बताया जा रहा है कि यह रविवार या सोमवार (11 or July 12) तक धरती से टकरा सकता है. स्पेसवेदर डॉट कॉम वेबसाइट के मुताबिक, जो लोग उत्तरी या दक्षिणी अक्षांशों पर रहते हैं, उन्हें रात के वक्त खूबसूरत ऑरोरा दिखाई दे सकता है. ऑरोरा ध्रुव के पास रात के समय आसमान में चमकने वाली रोशनी को कहते हैं .

रिपोर्ट के मुताबिक ये सौर तूफान सूर्य के वायुमंडल में पैदा हुआ है और इसके कारण चुंबकीय क्षेत्र के प्रभुत्व वाला अंतरिक्ष का एक क्षेत्र काफी ज्यादा प्रभावित हो सकता है. वहीं, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने तूफान की रफ्तार 1609344 किलोमीटर प्रति घंटा बताई है. बताया गया है कि इसकी गति और ज्यादा भी हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरिक्ष में महातूफान आ जाए, तो उससे धरती के लगभग सभी शहरों की बिजली जा सकती है.

बताया जा रहा है कि सौर तूफान पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर की एक अस्थायी गड़बड़ी है, जो सौर पवन शॉक वेव/या चुंबकीय क्षेत्र के बादल के कारण होती है और यह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से संपर्क करती है. लगभग 4 अरब साल पहले सूरज केवल तीन-चौथाई चमक के साथ चमकता था जो आज हम देखते हैं, लेकिन इसकी सतह विशाल विस्फोटों से घिरी हुई है, जो अंतरिक्ष में भारी मात्रा में सौर सामग्री और विकिरण को बाहर निकाल रही है. इन शक्तिशाली सौर विस्फोटों से पृथ्वी को गर्म करने के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रदान हो सकती है.

विस्फोटों ने साधारण अणुओं को आरएनए और डीएनए जैसे जटिल अणुओं में बदलने के लिए आवश्यक ऊर्जा को भी प्रस्तुत किया हो सकता है, जो जीवन के लिए जरूरी थे. यह शोध नासा के वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा 23 मई 2016 को नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित किया गया था. गौर हो कि सौर तूफान पहली बार नहीं आ रहा है, इससे पहले साल 1989 में भी यही घटना हुई थी. उस दौरान तूफान के कारण कनाडा के क्यूबेक शहर की बिजली करीब बारह घंटे के लिए चली गई थी. इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था. इससे भी कई साल पहले 1859 में जियोमैग्‍नेटिक तूफान आया था. जिसने यूरोप और अमेरिका में टेलिग्राफ नेटवर्क को नष्ट कर दिया था.

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