अमेरिका में नफरत भरे भाषण रोकने की चुनौती से निपटने में जुटा सोशल मीडिया

Updated at : 30 Jun 2020 1:12 PM (IST)
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अमेरिका में नफरत भरे भाषण रोकने की चुनौती से निपटने में जुटा सोशल मीडिया

कई वर्षों तक राजनीतिक ध्रुवीकरण (Political polarisation) और घृणा भरे भाषणों (Hate speech) को जगह देने वाले सोशल मीडिया मंच अमेरिका के राष्ट्रपति पद (president of america) के चुनाव में महज चार महीने का वक्त शेष रहने और देश में विभिन्न समूहों के बीच मतभेद चरम पर पहुंच जाने के बीच कट्टरपंथ और हिंसा के खतरों के खिलाफ कमर कस रहे हैं. विश्व की सबसे लोकप्रिय वेबसाइटों में से शामिल ऑनलाइन टिप्पणी वाले मंच रेड्डिट ने नफरत भरे भाषणों पर अपनी कार्रवाई के तहत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन करने वाले एक मंच को सोमवार को प्रतिबंधित कर दिया.

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वाशिंगटन: कई वर्षों तक राजनीतिक ध्रुवीकरण और घृणा भरे भाषणों को जगह देने वाले सोशल मीडिया मंच अमेरिका के राष्ट्रपति पद के चुनाव में महज चार महीने का वक्त शेष रहने और देश में विभिन्न समूहों के बीच मतभेद चरम पर पहुंच जाने के बीच कट्टरपंथ और हिंसा के खतरों के खिलाफ कमर कस रहे हैं. विश्व की सबसे लोकप्रिय वेबसाइटों में से शामिल ऑनलाइन टिप्पणी वाले मंच रेड्डिट ने नफरत भरे भाषणों पर अपनी कार्रवाई के तहत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन करने वाले एक मंच को सोमवार को प्रतिबंधित कर दिया.

अमेजन के मालिकाना हक वाली लाइव स्ट्रीमिंग वेबसाइट ‘ट्विच’ ने सोमवार को ही घृणा फैलाने वाले आचरण संबंधी उसके नियमों का उल्लंघन करने के लिए ट्रंप के अभियान पर अस्थायी रोक लगा दी. इस बीच, यूट्यूब ने कई प्रमुख श्वेत राष्ट्रवादी हस्तियों को अपने मंच से प्रतिबंधित कर दिया है, जिनमें स्टीफन मोलिनेक्स, डेविड ड्यूक और रिचर्ड स्पेंसर शामिल हैं. आलोचकों का कहना है कि ये सोशल मीडिया कंपनियां अपने मंचों पर विभाजन, घृणा और गलत सूचनाओं को बढ़ावा देने के लिए बहाने बनाती रही हैं.

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भाषा के मुताबिक नागरिक अधिकार समूहों ने बड़े विज्ञापनदाताओं से जुलाई के दौरान फेसबुक पर विज्ञापन प्रचार रोकने की अपील की थी और कहा था कि सोशल नेटवर्क अपने मंच पर नस्ली एवं हिंसक सामग्री को रोक पाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहा है. इस बहिष्कार में विश्व के सबसे बड़े विज्ञापनदाता यूनिलीवर के साथ ही वेरिजॉन, फोर्ड और कई छोटे ब्रांड भी शामिल हुए थे. इनमें से कई ने जुलाई माह के लिए, जबकि कुछ ने साल भर के लिए नेटवर्क को विज्ञापन देने से मना कर दिया है.

वहीं भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों के एक समूह ने एक राजनीतिक कार्य समिति का गठन किया है जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए सक्रियता से प्रचार करेगी. इन लोगों का मानना है कि आतंकवाद को हराने और आव्रजन को नियमित करने समेत कई मौजूदा घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय स्थितियों के मद्देनजर ट्रंप ही अमेरिका के लिए सबसे बेहतर हैं. समूह के संस्थापक ए डी अमर ने कहा कि ‘ट्रंप के लिए भारतीय-अमेरिकी’ (इंडियन अमेरिेन्स फॉर ट्रंप) का गठन केवल एक मकसद से किया गया है कि ट्रंप को फिर से राष्ट्रपति बनाने के लिए सभी अमेरिकियों खासकर भारतीय उपमहाद्वीप मूल के अमेरिकियों का समर्थन जुटाया जा सके.

Posted By: Pawan Singh

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