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Russia-Ukraine Updates: यूक्रेन बॉर्डर पर रूस का अटैक ? नाटो ने भेजे और घातक जहाज व लड़ाकू विमान

नाटो ने सोमवार को कहा कि यूक्रेन के पास रूसी सैनिकों की तैनाती बढ़ने के बीच वह अपने अतिरिक्त बलों को तैयार कर रहा है और पूर्वी यूरोप में और अधिक संख्या में जहाज तथा लड़ाकू विमान भेज रहा है.

By Prabhat khabar Digital
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रूस और यूक्रेन के बीच जारी विवाद युद्ध के मुहाने तक पहुंच गया है. इस बीच कुछ मीडिया में खबर चल रही है कि यूक्रेन बॉर्डर पर रूस का अटैक हो चुका है और 8,500 अमेरिकी सैनिक 'हाई अलर्ट' पर हैं. इधर, यूक्रेन पर रूसी हमले की आशंका के मजबूत होने के मद्देनजर यूरोपीय संघ (ईयू) के सदस्य देशों के विदेश मंत्री सोमवार को यूक्रेन के समर्थन में एकता और प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने की तैयारी करते दिखे. वहीं, नाटो ने सोमवार को कहा कि यूक्रेन के पास रूसी सैनिकों की तैनाती बढ़ने के बीच वह अपने अतिरिक्त बलों को तैयार कर रहा है और पूर्वी यूरोप में और अधिक संख्या में जहाज तथा लड़ाकू विमान भेज रहा है.

क्या कहा नाटो ने

नाटो ने कहा कि वह बाल्टिक सागर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है. 30 देशों के सैन्य संगठन के कई सदस्यों ने अपने सैनिक और साजो-सामान भेजे हैं. डेनमार्क बाल्टिक सागर में एक युद्धपोत भेज रहा है और लिथुआनिया में एफ-16 युद्धक विमान तैनात कर रहा है. बल के अनुसार, स्पेन नाटो के समुद्री बल में शामिल होने के लिए जहाज भेज रहा है तथा बुल्गारिया में लड़ाकू विमान भेजने पर विचार कर रहा है, वहीं फ्रांस बुल्गारिया को सैनिक भेजने को तैयार है.

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अमेरिका के साथ मजूबत समन्वय में अभूतपूर्व एकजुटता

नाटो महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने एक बयान में कहा कि नाटो सभी गठबंधन सहयोगियों को बचाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाता रहेगा. यह घोषणा तब हुई जब ईयू के विदेश मंत्रियों ने यूक्रेन के समर्थन में नये सिरे से संकल्प प्रदर्शित करने की मांग की, और किसी भी रूसी आक्रमण का सामना करने के सर्वोत्तम तरीके पर मतभेद के बारे में चिंताओं को सामने रखा गया. बैठक की अध्यक्षता कर रहे ईयू की विदेश नीति के प्रमुख जोसप बोर्रेल ने बताया कि हम अमेरिका के साथ मजूबत समन्वय में अभूतपूर्व एकजुटता दिखा रहे हैं.

जानें रूस और यूक्रेन के बीच विवाद की तीन बड़ी वजह

-क्रीमिया प्रायद्वीप है, जो कभी यूक्रेन का हिस्सा हुआ करता था. इसे वर्ष 2014 में रूस ने यूक्रेन से अलग कर दिया था. इस मुद्दे पर अमेरिका और पश्चिमी देश यूक्रेन के साथ खड़े हैं, तो वहीं रूस अलग-थलग पड़ गया है.

-नार्ड स्‍ट्रीम-2 पाइपलाइन है, इसके जरिये रू्स जर्मनी समेत यूरोप के अन्य देशों को सीधे तेल और गैस सप्लाई कर सकेगा. इससे यूक्रेन को जबर्दस्त वित्तीय नुकसान उठाना होगा.

-विवाद की तीसरी वजह यूक्रेन के नाटो में शामिल होने की मंशा है. अमेरिका भी चाहता है कि यूक्रेन नाटो का सदस्य देश बने. वहीं, रूस ने यूक्रेन से इस बाबत लीगल गारंटी तक मांगी है कि वह कभी नाटो का सदस्य नहीं बनेगा.

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भाषा इनपुट के साथ

Posted By : Amitabh Kumar

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