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अब रूस ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन पर लगाया प्रतिबंध, भारतीय मूल के मंत्रियों पर भी लगा बैन

रूस के विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस को अलग-थलग करने के लिए ब्रिटेन की ओर से उसके खिलाफ कई कड़े प्रतिबंध लगाये गये हैं. रूस के खिलाफ कई तरह के राजनीतिक अभियान चलाये गये.

By Prabhat khabar Digital
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ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन
ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन
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Russia-Ukraine War: यूक्रेन के खिलाफ जंग शुरू करने की वजह से पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाये थे. अब रूस ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री समेत 13 राजनेताओं को बैन कर दिया है. रूस ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन समेत 13 नेताओं पर शनिवार को प्रतिबंध लगा दिया. जिन ब्रिटिश राजनेताओं पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें भारतीय मूल के वित्त मंत्री ऋषि सुनक और गृह मंत्री प्रीति पटेल के अलावा उप प्रधानमंत्री डोमिनिक राब, विदेश मंत्री लिज ट्रूस और रक्षा मंत्री बेन वालास शामिल हैं.

रूस की ओर से शनिवार को एक बयान जारी करके यह जानकारी दी गयी. मास्को से जारी बयान में कहा गया है कि यूक्रेन संघर्ष को लेकर इन नेताओं की ‘अभूतपूर्व शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों’ के चलते ये कदम उठाया गया है. रूस के विदेश मंत्रालय ने जो बयान जारी किया है, उसमें कहा गया है कि ब्रिटिश सरकार की अभूतपूर्व शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों के चलते, खासकर रूसी संघ के शीर्ष अधिकारियों पर लगाये गये प्रतिबंधों के जवाब में ब्रिटेन के राजनेताओं पर प्रतिबंध लगाये जा रहे हैं.

रूस ने क्यों उठाया ये कदम?

रूस के विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस को अलग-थलग करने के लिए ब्रिटेन की ओर से उसके खिलाफ कई कड़े प्रतिबंध लगाये गये हैं. रूस के खिलाफ कई तरह के राजनीतिक अभियान चलाये गये. रूस से जारी बयान में कहा गया कि यह अभियान हमारे देश की घरेलू अर्थव्यवस्था (जीडीपी) को कमजोर करने के लिए चलाया गया. ब्रिटिश सरकार की ओर से जान-बूझकर यूक्रेन को घातक हथियार उपलब्ध कराये गये.

बयान में आगे कहा गया है कि ब्रिटेन की सरकार ने हालात को विकट बनाने के उद्देश्य से ही यूक्रेन को हथियार और अन्य मदद मुहैया करायी. रूस ने कहा है कि ब्रिटेन की सरकार ने हथियार और आर्थिक मदद देकर कीव को उकसाने की कार्रवाई की है. इतना ही नहीं, ब्रिटिश सरकार नाटो की ओर से की जा रही ऐसी ही कोशिशों का समन्वय कर रहा है. इसलिए रूस को उसके खिलाफ कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़ा है.

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