कोरोना के इलाज के लिए रेमेडिसिवर के इस्तेमाल को मिली मंजूरी, FDA ने दिया अप्रूवल

Updated at : 23 Oct 2020 7:53 AM (IST)
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कोरोना के इलाज के लिए रेमेडिसिवर के इस्तेमाल को मिली मंजूरी, FDA ने दिया अप्रूवल

कोरोना महामारी (covid-19 pandemic) के इलाज के लिए रेमेडिसिवर (Remdesivir) के इस्तेमाल को मंजूरी मिल गयी है. यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने एंटीवायरल ड्रग वैक्लेरी (रेमेडिसिवर) को 12 साल और उससे अधिक उम्र के वयस्क और बाल रोगियों में इस्तेमाल करने के लिए मंजूरी दे दी है. इसका इस्तेमाल अस्पताल में भर्ती होने का बाद लिए कम से कम 40 किलोग्राम वजन तक के मरीजों पर किया जा सकेगा.

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कोरोना महामारी के इलाज के लिए रेमेडिसिवर के इस्तेमाल को मंजूरी मिल गयी है. यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने एंटीवायरल ड्रग वैक्लेरी (रेमेडिविर) को 12 साल और उससे अधिक उम्र के वयस्क और बाल रोगियों में इस्तेमाल करने के लिए मंजूरी दे दी है. इसका इस्तेमाल अस्पताल में भर्ती होने का बाद लिए कम से कम 40 किलोग्राम वजन तक के मरीजों पर किया जा सकेगा.

एंटीवायरल ड्रग वैक्लेरी का इस्तेमाल करने की इजाजत सिर्फ उन अस्पतालों को दी गयी है जहां पर कोरोना का इलाज किया जाता है. जहां मरीजों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हो. एंटीवायरल ड्रग वैक्लेरी कोविड-19 की इलाज करने वाली पहली दवा है जिसे एफडीए की मंजूरी मिली है.

आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण (ईयूए) द्वारा वैक्लेरी के इस्तेमाल को लेकर 1 मई 2020 को जारी गाइडलाइन के मुताबिक इसका इस्तेमाल पूरी आबादी के लिए नहीं किया जा सकता है. हालांकि उस वक्त भी इसका इस्तेमाल करने की मंजूरी मिली थी. पर अब कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने के लिए रेमेडिसिवर के इस्तेमाल को मंजूरी मिल गयी है बशर्तें मरीज की उम्र 12 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए. हालांकि इसे लेकर अभी परीक्षण जारी है. फिलहाल अस्पताल में भर्ती मरीजों का इलाज रेमेडिसिवर से किया जा सकता है.

एफडीए के कमिश्नर स्टीफन एम हैन ने कहा कि कोरोना वायरस के इलाज के लिए एफडीए पूरी तरह समर्पित है. साथ ही दवाओं की उपलब्धता सुनश्चित हो इसके लिए भी एफडीए कार्य कर रहा है. आज जबकि रेमेडिसिवर के इस्तेमाल को मंजूरी मिल गयी, हलांकि इसके पीछे बहुत मेहनत करनी पड़ी है. हमने बड़े पैमाने पर परीक्षण किये. एफडीए कोरोना वायरस ट्रीटमेंट एक्सीलेरेशन प्रोग्राम के तहत वैज्ञानिकों ने इसका टेस्ट जारी रखा. उन्होंने कहा कि यह संस्था कोरोना वायरस का सटीक इलाज खोजने के लिए अपना प्रयास जारी रखेगी और जल्द ही मरीजों को एक बेहतर दवा मिलेगी.

वैक्लुरी रेमेडिसिवर का इस्तेमाल को तब मंजूरी मिली जहब लगातार इसके इस्तेमाल से संबंधित आंकड़े जमा किये गये. साथ ही अस्पताल में कोरोना संक्रमण से भर्ती मरीजो के ठीक करने में इससे सफलता मिली.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज द्वारा संचालित इस टेस्ट के दौरान रैंडम जांच में यह देखा गया कोरोना वायरस से ठीक होने में कितना समय लगा. 1062 कोरोना संक्रमितों पर इसका टेस्ट किया गया जिनमें कोरोना के माइल्ड और गंभीर लक्षण थे. जिनमें इसका इस्तेमाल किया गया उनमें देखा गया कि वो 15 दिन में अस्पताल से छूट गये, या फिर अस्पताल में रहते हुए उन्हें ऑक्सीजन या किसी प्रकार की दवा की जरूरत नहीं पड़ी.

एफडीए की मंजूरी मिलने के वेक्लेरी ने बच्चों के खुराक से संबंधित निर्देश दिये है. साथ ही संभावित साइड इफेक्ट के बारे में भी बताया है. इसके इस्तेमाल से लिवर से इंजाइम बढ़ सकता है साथ ही कुछ एलर्जीक समस्याएं आ सकती हैं.

Posted By: Pawan Singh

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