वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रूस के साथ बातचीत के दिए संकेत, कहा - यूक्रेन की शर्तों पर होगी शांति वार्ता

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोमवार की देर रात अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस को वास्तविक शांति वार्ता के लिए मजबूर करने का आग्रह किया और बातचीत के लिए अपनी सामान्य शर्तों को सूचीबद्ध किया.
कीव : नौ महीने से अधिक समय से रूस की सैन्य कार्रवाई का सामना कर रहे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति के साथ शांतिवार्ता करने के संकेत दिए हैं. लेकिन, इसके साथ ही, उन्होंने शर्त यह भी रखी है कि वे यूक्रेन की शर्त पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत करेंगे. हालांकि, उनका यह संकेत रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत से इनकार करने वाले अड़ियल रुख से अलग है.
मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोमवार की देर रात अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस को वास्तविक शांति वार्ता के लिए मजबूर करने का आग्रह किया और बातचीत के लिए अपनी सामान्य शर्तों को सूचीबद्ध किया. इसमें उन्होंने यूक्रेन की सभी कब्जे वाली भूमि की वापसी, युद्ध से हुई क्षति के लिए मुआवजा और युद्ध अपराधों का मुकदमा चलाने की शर्त रखी है. यह कम से कम उस व्यक्ति के बयानों में बदलाव है, जिसने सितंबर के अंत में पुतिन के साथ बातचीत को असंभव बताते हुए एक शपथपत्र पर हस्ताक्षर किए थे.
मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की शर्तें देखकर नहीं लगता कि मास्को इसके लिए राजी होगा. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि वे बातचीत की दिशा में आगे कैसे बढ़ते हैं. पश्चिमी हथियार और सहायता यूक्रेन की रूस के आक्रमण से लड़ने की क्षमता के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं. शुरू में माना जा रहा था कि यूक्रेन इस युद्ध में लंबे समय तक टिक नहीं पाएगा.
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अमेरिका में मंगलवार को हो रहे मध्यावधि चुनाव हालांकि यूक्रेन के लिए वाशिंगटन के भविष्य के राजनीतिक और वित्तीय समर्थन की राशि और स्वरूप को परिभाषित करेंगे. संसद पर अगर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण होता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के लिए यूक्रेन की सहायता के लिए सैन्य और अन्य सहायता के लिए बड़े पैकेजों को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है. रूस और यूक्रेन ने युद्ध की शुरुआत में बेलारूस और तुर्किये में कई दौर की बातचीत की थी. युद्ध शुरू हुए अब करीब नौ महीने हो रहे हैं. मार्च में इस्तांबुल में प्रतिनिधिमंडलों की पिछली बैठक में कोई परिणाम नहीं निकलने के बाद वार्ता रुक गई थी.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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