ePaper

रूस-यूक्रेन विवाद से भारत में बढ़ेगी महंगाई! पेट्रोल-डीजल के दामों में फिर हो सकता है इजाफा, ये है कारण

Updated at : 28 Jan 2022 9:18 AM (IST)
विज्ञापन
रूस-यूक्रेन विवाद से भारत में बढ़ेगी महंगाई! पेट्रोल-डीजल के दामों में फिर हो सकता है इजाफा, ये है कारण

यह बात दीगर है कि सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ ही पेट्रोल-डीजल के दामों में इजाफा करना शुरू कर देती हैं, लेकिन जब अंतरराष्ट्रीय मार्केट में क्रूड ऑयल का दाम गिरता है, तो उसका फायदा आम उपभोक्ताओं को नहीं मिलता.

विज्ञापन

नई दिल्ली : रूस-यूक्रेन विवाद का असर दुनिया के दूसरे देशों पर कितना पड़ रहा है, इसे तो अर्थशास्त्री और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ ही बता सकते हैं, लेकिन फिलहाल इसका गहरा प्रभाव भारत पर जल्द ही दिखने वाला है. इसका कारण यह है कि रूस-यूक्रेन विवाद की वजह से अंतरराष्ट्रीय मार्केट में क्रूड ऑयल सात साल में पहली बार 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिसका सीधा असर भारत के पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले पेट्रोल-डीजल के दामों पर दिखाई देगा.

आम आदमी को नहीं मिलता क्रूड ऑयल में गिरावट का फायदा

यह बात दीगर है कि सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ ही पेट्रोल-डीजल के दामों में इजाफा करना शुरू कर देती हैं, लेकिन जब अंतरराष्ट्रीय मार्केट में क्रूड ऑयल का दाम गिरता है, तो उसका फायदा आम उपभोक्ताओं को नहीं मिलता, बल्कि सरकार पेट्रोलियम कंपनियों उसे अपने खाते में डाल देती हैं.

2014 के बाद पहली बार महंगा हुआ क्रूड ऑयल

रूस-यूक्रेन में तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल सात साल बाद 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा है. 2014 के बाद पहली बार क्रूड ऑयल की कीमत इस स्तर पर पहुंची है. भारत में पांच राज्यों में फरवरी-मार्च के दौरान होने वाले विधानसभा चुनावों की वजह से पिछले 83 दिनों से पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी नहीं की गई है, लेकिन अब आशंका यह जाहिर की जा रही है कि रूस-यूक्रेन विवाद के बीच अंतरराष्ट्रीय मार्केट में क्रूड ऑयल के महंगा होने की वजह से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक बार फिर से बढ़ोतरी होने लगेगी.

दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है रूस
Also Read: टल गई रूस और यूक्रेन की जंग! पेरिस बैठक में संघर्ष विराम पर सहमत हुए देश, ये है लड़ाई का असली कारण

रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है. आशंका यह जाहिर की जा रही है कि वह यूरोप के लिए ऊर्जा आपूर्ति को बाधित कर सकता है. विश्लेषकों का अनुमान है कि ओमिक्रॉन के कमजोर असर के कारण क्रूड ऑयल में कीमतों में तेजी बनी रहेगी. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रूस और यूक्रेन में तनाव बना रहा, तो क्रूड ऑयल के दाम आसमान पर पहुंच जाएंगे. ऐसा भी संभव है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola