Pakistan Crisis: IMF से बातचीत का नहीं निकला कोई सकारात्मक नतीजा, क्या और बिगड़ेंगे पाकिस्तान के हालात?
Pakistan Economic Crisis: पाकिस्तान सरकार द्वारा 1.1 अरब डॉलर की निधि हासिल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से बातचीत का कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला है, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं.
Pakistan Economic Crisis: पाकिस्तान भारी आर्थिक संकट से गुजर रहा है और देश में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 275 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है. पाकिस्तान में महंगाई 27 प्रतिशत से अधिक तक बढ़ गयी है और विदेशी मुद्रा का भंडार 1998 के बाद से सबसे निचले स्तर पर है. इन सबके बीच, पाकिस्तान सरकार द्वारा 1.1 अरब डॉलर की निधि हासिल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से बातचीत का कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला है, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि आईएमएफ की मांग कल्पना से परे थी, क्योंकि देश पिछले साल विनाशकारी बाढ़ के बाद से निपट रहा है. लेकिन, 6.5 बिलियन डॉलर के लोन कार्यक्रम पर आईएमएफ स्टाफ-स्तरीय चर्चाओं के बाद भी निर्णय नहीं लिया जा सका, जो 9 फरवरी की निर्धारित समाप्ति तिथि से आगे बढ़ गया है.
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आईएमएफ की एक टीम ने 10 दिनों के लिए इस्लामाबाद का दौरा किया. समझौता के दौरान पाकिस्तानी पक्ष का नेतृत्व वित्त मंत्री इशाक डार ने किया. 10 दिन तक IMF टीम पाकिस्तान में रही है, लेकिन दोनों पक्षों द्वारा हो रही चर्चाओं का कोई नतीजा नहीं निकला. वित्त मंत्री इशाक डार ने आईएमएफ मिशन प्रमुख से रक्षा बजट में कटौती की शर्तों को हटाने का अनुरोध किया, तभी आईएमएफ प्रमुख ने बातचीत रोक दी और समझौते पर हस्ताक्षर किए बिना पाकिस्तान छोड़ने का फैसला कर लिया.
बताते चलें कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है. भुगतान संतुलन संकट और विदेशी ऋण के उच्च स्तर से प्रभावित है. इस बीच, 3 फरवरी को पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 5.5 प्रतिशत या 17 करोड़ डॉलर घटकर 2.91 अरब डॉलर रह गया, जिसमें वाणिज्यिक बैंकों के 5.62 बिलियन डॉलर शामिल हैं. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी. लोकल डेली न्यूज ने बताया कि देश में कुल 8.54 अरब डॉलर का भंडार बचा है.
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