मिनियापोलिस में ICE की कार्रवाई पर हंगामा: परिवार का आरोप- ‘एलेक्स निहत्थे थे, हाथ में हथियार नहीं सिर्फ फोन था’; ट्रंप ने एजेंट्स का किया बचाव

मिनियापोलिस: निहत्थे एलेक्स की मौत पर हंगामा ; ट्रंप ने किया बचाव.
ICE ऑपरेशन के दौरान एक नौजवान, एलेक्स प्रेट्टी की मौत के बाद मिनियापोलिस में तनाव बढ़ गया है. उसके परिवार का आरोप है कि वह निहत्था था और एक महिला को बचाने की कोशिश कर रहा था. प्रदर्शनकारी फेडरल एजेंसियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतर आए. अधिकारियों और परिवार के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है.
अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में शनिवार को गोली लगने से मारे गए एलेक्स प्रेट्टी के परिवार ने इस घटना को लेकर गहरा दुख और गुस्सा जताया है. परिवार ने एक बयान जारी कर कहा कि सरकार और प्रशासन की ओर से जो बातें कही जा रही हैं, वे सच्चाई से दूर हैं. परिवार का कहना है कि उनके बेटे के बारे में जो बातें फैलाई जा रही हैं, वे गलत हैं और इससे उन्हें बहुत तकलीफ पहुंची है.
परिवार का आरोप- एलेक्स निहत्थे थे, हाथ में सिर्फ फोन था
परिवार ने साफ कहा है कि एलेक्स प्रेट्टी के पास कोई हथियार नहीं था. उनके मुताबिक, एलेक्स के दाहिने हाथ में सिर्फ मोबाइल फोन था और बायां हाथ खाली था. परिवार ने बताया कि एलेक्स उस वक्त एक महिला को बचाने की कोशिश कर रहे थे, जिसे एजेंटों ने जमीन पर गिरा दिया था. इसी दौरान एलेक्स पर पेपर स्प्रे किया गया.
Family of Alex Pretti, who was shot dead in Minneapolis today, releases statement:
— BNO News (@BNONews) January 25, 2026
"The sickening lies told about our son by the administration are reprehensible and disgusting. Alex is clearly not holding a gun when attacked by Trump's murdering and cowardly ICE thugs." pic.twitter.com/PnggMiVUb6
लेकिन पुलिस और संघीय अधिकारियों ने अलग कहानी बताई. मिनियापोलिस पुलिस चीफ ने कहा कि शख्स कानूनी तौर पर हथियार रखता था. ICE अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए गोली चलाई क्योंकि शख्स ने उन पर हमला किया.
ट्रंप ने डेमोक्रेटिक नेताओं को घेरा
इस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शहर और राज्य के डेमोक्रेटिक नेताओं की जमकर आलोचना की. उन्होंने कहा कि स्थानीय नेता संघीय अधिकारियों की मदद नहीं कर रहे थे और यह सब कवर-अप है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि पुलिस को रोक दिया गया और अधिकारियों को खुद को बचाने के अलावा कोई रास्ता नहीं मिला.
उन्होंने मिनेसोटा के नेताओं पर भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया और कांग्रेस सदस्य इलहान ओमार को भी निशाना बनाया. डेमोक्रेटिक नेताओं ने घटना की कड़ी निंदा की. इलहान ओमार ने कहा कि यह ICE की मारपीट जैसी घटना है और ट्रंप प्रशासन समुदायों को डराने की कोशिश कर रहा है.
ICU नर्स थे एलेक्स, वेटरन्स की देखभाल करते थे
परिवार ने एलेक्स को एक दयालु और जिम्मेदार इंसान बताया. वे एक ICU नर्स थे और खास तौर पर युद्ध में घायल सैनिकों (वेटरन्स) की देखभाल करते थे. परिवार का कहना है कि एलेक्स दुनिया में कुछ अच्छा करना चाहते थे. उनके मुताबिक, एलेक्स का आखिरी काम भी किसी और की मदद करना था.
राउटर्स द्वारा सत्यापित वीडियो में देखा गया कि एलेक्स सड़क पर खड़े होकर इमिग्रेशन एजेंट्स की कार्रवाई का वीडियो बना रहे थे. वीडियो में दिखता है कि हालात तनावपूर्ण हो गए, तभी एक एजेंट ने एलेक्स और आसपास मौजूद लोगों की ओर पेपर स्प्रे किया. इसके बाद कई एजेंट एलेक्स की ओर बढ़ते हैं, उन्हें जमीन पर गिराते हैं और सिर व शरीर पर मारते हुए दिखाई देते हैं.
जमीन पर दबे एलेक्स पर चली गोलियां
वीडियो में आगे दिखता है कि जब एलेक्स सड़क पर पड़े होते हैं, तब एक एजेंट बंदूक निकालता है और कई गोलियां चलती हैं. इसके बाद एलेक्स का शरीर सड़क पर पड़ा नजर आता है और एजेंट पीछे हट जाते हैं.
🇺🇸🤦♂️ Two different angles seemingly showing an ICE officer disarming the 37 y.o. before he was shot & killed in the morning shooting in Minneapolis.
— Roberto (@UniqueMongolia) January 24, 2026
The agent in the gray jacket & baseball cap can be seen removing the firearm and then walking away as his colleagues shoot the man. pic.twitter.com/nT2e4qSe36
इस घटना के बाद इलाके में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए. हालात को काबू में करने के लिए नकाबपोश और हथियारबंद फेडरल एजेंट्स ने आंसू गैस और फ्लैशबैंग ग्रेनेड का इस्तेमाल किया. प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि फेडरल एजेंसियां शहर छोड़ें.
पहले से तनाव में है मिनियापोलिस
मिनियापोलिस पहले से ही तनाव में है. 7 जनवरी को यहां 37 साल की रेनी निकोल गुड, जो तीन बच्चों की मां थीं, की मौत हो गई थी. उन्हें एक ICE अधिकारी ने इमिग्रेशन कार्रवाई के दौरान गोली मार दी थी. उस घटना के बाद से शहर और आसपास के इलाकों में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं. शुक्रवार को भी, कड़ाके की ठंड के बावजूद, हजारों लोग सड़कों पर उतरे.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इमिग्रेशन कार्रवाई के तरीके से स्थानीय लोगों में डर और गुस्सा बढ़ा है. गवर्नर ने पुष्टि की, उपराष्ट्रपति ने कार्रवाई का बचाव किया. वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फेडरल एजेंट्स की कार्रवाई का बचाव किया. उन्होंने कहा कि इमिग्रेशन अधिकारी अपना काम कर रहे थे और उन्हें राज्य सरकार की ओर से रुकावटों का सामना करना पड़ रहा था.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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