उत्तर कोरिया: 2 लाख लोग घरों में कैद, पूरा शहर सील, कारण जानकर चौंक जाएंगे आप

Published by : Pritish Sahay Updated At : 28 Mar 2023 10:40 AM

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उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग के एक सनकी फैसले के कारण करीब दो लाख लोग कई दिनों से घरों में कैद हो गए हैं. हालत ये है कि पूरे शहर में लॉकडाउन लगा दिया गया है. किम जोंग सरकार का सख्त आदेश आदेश जारी हो गया है कि जब तक सारी गोलियां नहीं मिल जाती हैं तब तक पूरे शहर में लॉकडाउन लगा रहेगा.

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उत्तर कोरिया के लोग अपने सनकी तानाशाह किम जोंग की अजीब-अजीब आदेश के लिए काफी परेशान होते हैं. इसी कड़ी में किम जोंग के एक और सनकी फैसले के कारण करीब दो लाख लोग कई दिनों से घरों में कैद हो गए हैं. हालत ये है कि पूरे शहर में लॉकडाउन लगा दिया गया है. सारा मामला बंदूक की गोलियों से जुड़ा है. महज 653 गोलियों के लिए पूरा शहर और उसमें रहने वाले करीब 2 लाख लोग बीते 10 दिनों से घरों में कैद हो गये हैं. यह घटना उत्तर कोरिया के रियांगगैंग के हेसन शहर की है.

सेना की गायब हुई 653 गोलियां: रेडियो फ्री एशिया की रिपोर्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीते सात मार्च को एक सैन्य वापसी के दौरान जवानों के पास से 653 गोलियां गायब हो गई थीं. पहले तो जवानों ने खुद गोलियां ढूंढने की कोशिश की, लेकिन जब गोलियां काफी तलाश के बाद भी न मिली तो उन्होंने बड़े अधिकारियों को इसकी सूचना दे दी. जिसके बाद सेना और पुलिस को कारतूसों की खोजबीन में लगाया गया है.

पूरे शहर में लगा है लॉकडाउन: गोलियां कहां गायब हुई इसका पता न तो सेना लगा पा रही है और न ही तलाशी में जनता के घरों से इसका कोई सुराग मिल रहा है. वहीं, गोलियां गायब होने के बाद से ही किम जोंग सरकार का सख्त आदेश आदेश जारी हो गया है कि जब तक सारी गोलियां नहीं मिल जाती हैं तब तक पूरे शहर में लॉकडाउन लगा रहेगा. पुलिस और सेना की तमाम कोशिशों के बाद भी गोलियां बरामद नहीं हो पाई हैं.

घरों में कैद हुए दो लाख से ज्यादा लोग: रेडियो फ्री एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 10 दिन बीते जाने के बाद भी गोलियां नहीं मिल पाई हैं. इस कारण हेसन शहर के लोग घरों में रहने के लिए मजबूर हो गये हैं. पूरे शहर में लॉकडाउन लगा हुआ है. सैनिक और पुलिस घर-घर में तलाशी ले रहे हैं. लेकिन अभी तक गोलियों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है.

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क्या है पूरा मामला: गौरतलब है कि कोरियाई पीपुल्स आर्मी की सातवीं बटालियन चीन सीमा से वापस आ रही थी. वापसी को दौरान जवानों के पास से 653 गोलियां गायब हो गई. लेकिन काफी खोजबीन के बाद जब गोलियां नहीं मिली तो पूरे शहर में लॉकडाउन लगा कर गोलियों की खोजबीन की जाने लगी. पूरे शहर को सील कर दिया गया है. घर-घर तलाशी हो रही है. लेकिन गोलियों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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