शांति वार्ता के लिए जेडी वेंस पाकिस्तान रवाना, 11 अप्रैल को हो सकती है ईरान के साथ बातचीत

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस
Iran US Ceasefire:ईरान अमेरिका के बीच 14 दिनों का युद्ध विराम हुआ है. इसके बाद दोनों देश पाकिस्तान में शांति वार्ता करने वाले हैं. 28 फरवरी को युद्ध शुरु होने के बाद पहली बार है कि ईरान और अमेरिका बातचीत की मेज पर आ रहे हैं. बातचीत इस्लामाबाद में होने वाली है. इसको लेकर वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये हैं.
Iran US Ceasefire: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ईरान के साथ वार्ता का नेतृत्व करने के लिए पाकिस्तान रवाना हो गए हैं. वॉशिंगटन से मिली जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने करीबी सहयोगी वेंस को इस संवेदनशील मिशन की जिम्मेदारी सौंपी है. वार्ता का मकसद ईरान के साथ चल रहे तनाव का समाधान निकालना है. वार्ता की पहल ऐसे समय में हो रही है जब अस्थायी युद्धविराम कमजोर पड़ता दिख रहा है और ईरान के साथ अमेरिका और इजराइल के बीच मतभेद बने हुए हैं. इन मतभेदों को सुलझाना आसान नहीं माना जा रहा.
ईरान-अमेरिकी वार्ता में कौन होंगे शामिल?
ईरान अमेरिका की बातचीत में दोनों देशों के प्रतिनिधि शामिल होने वाले हैं. व्हाइट हाउस के मुताबिक वार्ता शनिवार (11 अप्रैल) को होगी. अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर शामिल हो सकते हैं. जेडी वेंस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे. हालांकि White House ने बातचीत स्वरूप को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं दी है. यह भी नहीं बताया गया है कि बातचीत सीधे होगी या अप्रत्यक्ष. वहीं, ईरान की ओर से अभी तक अपने प्रतिनिधिमंडल की आधिकारिक घोषणा नहीं की है.
क्या बातचीत में बनेगी बात?
ईरान और अमेरिका में बातचीत शुरु होने तो जा रही है. लेकिन इसके नतीजे को लेकर संशय बरकरार है. इस्लामाबाद में होने वाली यह वार्ता 10 सूत्रीय प्रस्ताव के आधार पर होगी, जो अमेरिका की पहले पेश की गई 15 सूत्रीय योजना से काफी अलग है. वहीं, सीजफायर के बाद इजराइल द्वारा लेबनान पर किए गए हमलों ने क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है, जिससे बातचीत का माहौल और जटिल हो गया है. इसके अलावा राष्ट्रपति ट्रंप की धमकियां भी बातचीत का मूड बिगाड़ सकती है. वहीं जब ईरान ने अपनी दस सूत्री मांगों की सूची साझा करना शुरू किया तो उसमें ऐसी मांगें भी शामिल थीं जिनसे अमेरिका कभी सहमत नहीं हो सकता था. जैसे ईरान का होर्मुज पर नियंत्रण की बात स्वीकार करना, युद्ध क्षति के लिए मुआवजा देना और सभी प्रतिबंधों को हटाना.
अमेरिका किन मुद्दों पर कर सकता है बात
सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम ने अपना 15 सूत्रीय प्रस्ताव भी तैयार किया है. इस योजना का पूरा खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन कहा जाता है कि इसमें ईरान को परमाणु हथियार न रखने की प्रतिबद्धता, अपने संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को सौंपना और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना शामिल है. ऐसे में सवाल है कि इस बातचीत में कोई बीच का रास्ता निकलेगा या यह वार्ता विफल हो जाएगी.
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By Pritish Sahay
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