भारत और नेपाल के बीच चाय पर कलह, क्या दार्जिलिंग ब्रांड पर खड़ा हुआ संकट? जानें पूरा मामला

Published by : Anant Narayan Shukla Updated At : 26 May 2026 11:48 AM

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भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्राइम मिनिस्टर बालेन शाह.

India Nepal Tea Dispute: भारत और नेपाल के बीच चाय कारोबार को लेकर विवाद फिर गहरा गया है. दार्जिलिंग चाय की ब्रांड वैल्यू, नेपाली ऑर्थोडॉक्स टी, आयात प्रतिबंध से भारत-नेपाल ट्रेड में तनाव पैदा हुआ है.

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India Nepal Tea Dispute: भारत और नेपाल के बीच विवाद के कई मुद्दे रहे हैं, इसमें अब चाय भी जुड़ गई है. आम तौर पर बातचीत, शाम की चर्चा और रिश्ते बनाने वाली चाय के लिए भारत नेपाल में विवाद थोड़ा तीखा हो रहा है. नेपाल से आने वाली चाय पर भारत की सख्ती कोई नई बात नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह मुद्दा सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहा. अब इसमें दार्जिलिंग चाय की वैश्विक पहचान, राजनीतिक दबाव, बाजार पर नियंत्रण और भारत-नेपाल व्यापार संबंध भी जुड़ गए हैं. हालात ऐसे हैं कि नेपाल की चाय को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है.

काठमांडू पोस्ट ने इस पूरे विवाद पर एक विश्लेषण दिया है. उसका कहना है कि इस विवाद की जड़ें कई साल पुरानी हैं. जुलाई 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी जब भानु जयंती कार्यक्रम में शामिल होने दार्जिलिंग पहुंचे थे. इसी दौरान दार्जिलिंग टी एसोसिएशन ने उनसे मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा. इसमें सिर्फ एक मांग रखी गई थी कि नेपाल से आने वाली चाय के आयात पर रोक लगाई जाए. हालांकि, कई सालों तक इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया. 

2024 में भारत ने शुरू की कड़ी जांच

10 अप्रैल 2024 से भारतीय अधिकारियों ने नेपाली चाय पर सख्त निगरानी शुरू कर दी. गुणवत्ता संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए भारतीय कस्टम विभाग ने हर खेप की 100 फीसदी सैंपल जांच अनिवार्य कर दी. बताया गया कि कोलकाता स्थित कस्टम के चीफ कमिश्नर के मौखिक निर्देश के बाद निगरानी और कड़ी कर दी गई. इससे नेपाल से आने वाली चाय की सप्लाई प्रभावित होने लगी और व्यापारियों को लंबी देरी का सामना करना पड़ा.

ममता बनर्जी ने भी उठाया मुद्दा

जून 2025 में पश्चिम बंगाल सरकार ने भी इस मामले में सख्ती बढ़ाने का फैसला लिया. तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि नेपाल से ड्यूटी-फ्री आने वाली चाय दार्जिलिंग टी की प्रतिष्ठा और ब्रांड वैल्यू को नुकसान पहुंचा रही है. उन्होंने भारतीय चाय बोर्ड और केंद्र सरकार से दार्जिलिंग चाय की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने को कहा. इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर नेपाल-भारत व्यापार संधि के तहत नेपाली चाय को मिली टैक्स छूट की समीक्षा या उसे वापस लेने की मांग भी की. ममता बनर्जी ने कहा था कि नेपाली चाय की एंट्री से दार्जिलिंग चाय की पहचान और बाजार में उसकी साख प्रभावित हो रही है, जिससे स्थानीय उद्योग खतरे में पड़ सकता है.

भारत को क्यों है दार्जिलिंग ब्रांड की चिंता?

भारतीय एजेंसियां लंबे समय से आरोप लगाती रही हैं कि नेपाली चाय को दार्जिलिंग चाय के नाम पर बेचने की कोशिश की जाती है. इससे दुनिया भर में मशहूर दार्जिलिंग टी ब्रांड की असल पहचान कमजोर पड़ सकती है. दार्जिलिंग चाय दुनिया की प्रीमियम चाय ब्रांड्स में गिनी जाती है, लेकिन इसका उत्पादन बेहद सीमित है. सालाना उत्पादन सिर्फ करीब 6,000 से 6,500 टन के बीच रहता है. दूसरी तरफ वैश्विक मांग इससे कहीं ज्यादा है. उद्योग से जुड़े लोगों का दावा है कि इसी कमी को पूरा करने के लिए नेपाली ऑर्थोडॉक्स चाय को दार्जिलिंग चाय में मिलाकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचा जाता है. 

नेपाली चाय को असली खतरा नहीं, प्रतिस्पर्धा माना जा रहा

नेपाल के चाय उद्योग से जुड़े कारोबारी मानते हैं कि गुणवत्ता का मुद्दा तकनीकी से ज्यादा व्यावसायिक और राजनीतिक है. चाय कारोबारी उदय चापागाईं का कहना है कि अगर भारत को सच में गुणवत्ता की चिंता होती तो वह सीमा पर आधुनिक लैब स्थापित कर सकता था. लेकिन सैंपल को कोलकाता भेजकर दो-दो हफ्ते तक खेप रोकना व्यापार को हतोत्साहित करने जैसा है.

उनका दावा है कि नेपाल के पहाड़ी इलाकों में बनने वाली ऑर्थोडॉक्स चाय स्वाद और गुणवत्ता में दार्जिलिंग चाय जैसी या उससे बेहतर मानी जाती है. यही वजह है कि दार्जिलिंग उत्पादकों पर दबाव बढ़ रहा है. ऑर्थोडॉक्स चाय मुख्य रूप से इलाम, पांचथर और धनकुटा जैसे पहाड़ी जिलों में तैयार होती है.

नेपाल टी प्रोड्यूसर एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिव कुमार गुप्ता ने कहा कि असली समस्या खराब गुणवत्ता नहीं बल्कि बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा है. उनके मुताबिक दार्जिलिंग चाय की उत्पादन लागत काफी ज्यादा है और नेपाली चाय के बढ़ते प्रभाव के बाद गुणवत्ता को बहाना बनाया जा रहा है.

‘दोहरा रवैया’ अपनाने के आरोप

नेपाल के व्यापारियों का आरोप है कि भारतीय कंपनियां एक तरफ अंतरराष्ट्रीय मांग पूरी करने के लिए नेपाली चाय का इस्तेमाल करती हैं, वहीं दूसरी तरफ उसी चाय के आयात पर दबाव बनाती हैं. एक कारोबारी ने कहा कि नेपाली चाय को भारतीय प्रोडक्ट में मिलाकर दार्जिलिंग टी के नाम से निर्यात करना वर्षों से चलता आ रहा है. ऐसे में आयात रोकने की कोशिश दोहरा रवैया दिखाती है.

चाय विशेषज्ञ पृथ्वी विक्रम राय ने इस पूरे विवाद को ब्रांड पॉलिटिक्स बताया. उनका कहना है कि दार्जिलिंग में लगातार उत्पादन घट रहा है और वहां दर्जनभर से ज्यादा फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं. ऐसे में वैश्विक मांग पूरी करने के लिए नेपाली चाय पर निर्भरता बढ़ी है. उनके मुताबिक भारत को डर है कि अगर नेपाली चाय की अलग अंतरराष्ट्रीय पहचान बन गई तो दार्जिलिंग ब्रांड कमजोर पड़ सकता है.

नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है चाय उद्योग

नेपाल के नेशनल टी एंड कॉफी डेवलपमेंट बोर्ड के मुताबिक देश हर साल करीब 2.75 करोड़ किलोग्राम चाय का उत्पादन करता है. नेपाल में 20 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में चाय की खेती होती है और लगभग 60 हजार लोगों को इससे रोजगार मिलता है. बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय के कृषि विकास अधिकारी इंद्र अधिकारी के अनुसार झापा और इलाम में पैदा होने वाली करीब 80 फीसदी चाय भारतीय बाजार में बिकती है, जबकि सिर्फ 20 फीसदी घरेलू खपत में जाती है.

नेपाल हर साल करीब 1.9 करोड़ किलोग्राम सीटीसी चाय (पत्तियो को क्रश करना, टियर यानी मोड़ना और कर्ल यानी दानेदार बनाना) बनाता है, जिसमें लगभग 1 करोड़ किलोग्राम भारत निर्यात होती है. 70 लाख किलोग्राम ऑर्थोडॉक्स चाय के उत्पादन में से करीब 60 लाख किलोग्राम भारतीय बाजार में जाती है. बाकी चाय यूरोप, अमेरिका, जापान और अन्य देशों को निर्यात की जाती है.

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हर साल अरबों रुपये का कारोबार प्रभावित

एक आंकड़े के अनुसार नेपाल हर साल भारत को 4 से 5 अरब रुपये मूल्य की चाय निर्यात करता है. भारतीय चाय बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक 2023 में भारत ने नेपाल से 1.33 करोड़ किलोग्राम से ज्यादा चाय आयात की थी. 2024 में यह आंकड़ा करीब 1.6 करोड़ किलोग्राम तक पहुंचने का अनुमान है. लेकिन बार-बार लगने वाली पाबंदियों और जांच प्रक्रियाओं से नेपाली किसान और निर्यातक लगातार परेशान होते जा रहे हैं. 

भारत ने दी ढील

हालांकि हाल में भारत ने कुछ नियमों में ढील भी दी है. 1 मई से लागू नए प्रतिबंधों के करीब 20 दिन बाद भारत ने एसओपी में बदलाव करते हुए घरेलू बाजार में बिकने वाली नेपाली चाय के लिए अनिवार्य लैब टेस्टिंग की शर्त फिलहाल हटा दी. भारतीय चाय बोर्ड ने वाणिज्य मंत्रालय के निर्देश पर नया नोटिस जारी करते हुए कहा कि भारत में घरेलू बिक्री के लिए आने वाली चाय को अब अनिवार्य टेस्टिंग से छूट रहेगी. हालांकि री-एक्सपोर्ट के लिए आने वाली चाय की जांच जारी रहेगी और अधिकारियों को रैंडम चेकिंग का अधिकार भी रहेगा.

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रवि लामिछाने की यात्रा से सुधरेंगे रिश्ते!

भारत और नेपाल के बीच हाल के सालों में रिश्ते कुछ खट्टे और मीठे रहे हैं. इसमें कई मुद्दे- 2015 का ब्लॉकेड, लिपुलेख, बॉर्डर, नोट, कालापानी, मानसरोवर जैसे शामिल रहे. लेकिन अब व्यापार भी दोनों पड़ोसी देशों में टकराव की वजह बन रहा है. प्रधानमंत्री बालेन शाह नेपाल से बाहर की यात्रा पर नहीं निकलेंगे. उनकी यात्रा की अनिश्चितता के बीच राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने भारत आने वाले हैं. 2 जून को उनकी पीएम मोदी से मुलाकात हो सकती है. इसमें भारत और नेपाल अपने तमाम विवादित मुद्दों को सुलझाने पर चर्चा कर सकते हैं. 

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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