पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान को सिफर मामले में 10 साल की जेल

Edited by Amitabh Kumar
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Pakistan's former prime minister Imran Khan talks with reporters regarding the current political situation and the ongoing cases against him at his residence, in Lahore, Pakistan, Thursday, Aug. 3, 2023. Khan has been slapped with more than 150 legal cases, including several on charges of corruption, "terrorism" and inciting people to violence over deadly protests in May that saw his followers attack government and military property across the country. (AP/PTI) (AP08_03_2023_000448A)

पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की मुश्किल और बढ़ गई है. जानकारी के अनुसार सिफर मामले में उन्हें 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई है.

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पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है. पाकिस्तान मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पीटीआई के संस्थापक इमरान खान और शाह महमूद कुरेशी को सिफर मामले में 10 साल की जेल की सजा दी गई है.


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इमरान खान की पार्टी की ओर से बताया गया है कि पाकिस्तान की अदालत ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को गोपनीयता उल्लंघन मामले में 10 साल की सजा सुनाई है.

सिफर क्या होता है जानें

आपको बता दें कि पिछले साल अक्टूबर के महीने में पाकिस्तान की एक विशेष अदालत ने सिफर मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को दोषी ठहराया था. 70 साल की उम्र को पार कर चुके इमरान खान पर वाशिंगटन में पाकिस्तान के दूतावास द्वारा भेजे गए एक गुप्त राजनयिक केबल (सिफर) को लीक करने के मामले में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद अगस्त 2023 में पूर्व पीएम इमरान को गिरफ्तार किया गया था. यहां चर्चा कर दें कि सिफर या डिप्लोमैटिक केबल वह संवाद होता है जो विदेशी मिशन की ओर से अपने देश को भेजने का काम किया जाता है. इसमें सभी तरह के बातचीत की जानकारी होती है, जिसको डिकोड किया जाता है और उसको पढ़ा जाता है.

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पहली बार कब मामला आया सामने

सिफर मामले की बात करें तो यह पहली बार 27 मार्च, 2022 को सामने आया था. अप्रैल, 2022 में इमरान खान को सत्ता से हटाए जाने के बाद उन्होंने एक सार्वजनिक रैली में कई आरोप लगाए थे. पूर्व पीएम ने भीड़ के सामने एक पत्र को लहराया था और दावा किया था कि विदेशी ताकतों ने उन्हें सत्ता से हटाने की साजिश को अंजाम दिया था. राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने साजिश रची और पीटीआई सरकार को उखाड़ फेंका.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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