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अफगानिस्तान के बेहतर भविष्य के लिए अमेरिका और तालिबान के बीच ऐतिहासिक समझौता

Updated at : 29 Feb 2020 10:28 PM (IST)
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अफगानिस्तान के बेहतर भविष्य के लिए अमेरिका और तालिबान के बीच ऐतिहासिक समझौता

Kabul: Afghan President Ashraf Ghani, center, pose for a joint photo with NATO Secretary General Jens Stoltenberg, and U.S. Secretary of Defense Mark Esper after a joint news conference in presidential palace in Kabul, Afghanistan, Saturday, Feb. 29, 2020. The U.S. signed a peace agreement with Taliban militants on Saturday, aimed at bringing an end to 18 years of bloodshed in Afghanistan and allowing U.S. troops to return home from America's longest war. AP/PTI(AP2_29_2020_000249A)

अमेरिका ने तालिबान के साथ शनिवार को एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किये और 14 माह के भीतर अपने सारे सैनिकों को वापस बुलाने की एक रूपरेखा भी पेश की.

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दोहा : अमेरिका ने तालिबान के साथ शनिवार को एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किये और 14 माह के भीतर अपने सारे सैनिकों को वापस बुलाने की एक रूपरेखा भी पेश की. इस समझौते के साथ ही तालिबान और काबुल सरकार के बीच भी बातचीत की उम्मीद जगी है, जिससे 18 साल से चल रहे संघर्ष के भी खत्म होने के आसार है.

दोहा के एक आलीशान होटल में तालिबान के वार्ताकार मुल्ला बिरादर ने समझौते पर हस्ताक्षर किये, वहीं दूसरी ओर से अमेरिका के वार्ताकार जलमय खलीलजाद ने हस्ताक्षर किये. इसके बाद दोनों ने हाथ मिलाये.

इस दौरान होटल के कॉन्फ्रेंस कक्ष में लोगों ने ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे लगाये. यह समझौता अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ की देख-रेख में हुआ. उन्होंने अलकायदा से संबंध समाप्त करने की प्रतिबद्धता भी तालिबान को याद दिलायी. समझौता होने से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान के लोगों को नये भविष्य के लिए बदलाव को अपनाने की अपील की थी.

उन्होंने हस्ताक्षर कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर कहा, ‘अगर तालिबान और अफगान सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर पाते हैं तो हम अफगानिस्तान में युद्ध खत्म करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ सकेंगे और अपने सैनिकों को घर वापस ला पायेंगे.’ यदि तालिबान समझौते का पालन करता है तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश अफगानिस्तान से 14 माह के भीतर अपने बलों को वापस बुला लेंगे.

नाटो के महासचिव जेन्स स्टोल्टनबर्ग ने समझौते को ‘स्थायी शांति की दिशा में पहला कदम’ करार दिया. नार्वे के प्रधानमंत्री ने काबुल में संवाददाताओं से कहा, ‘शांति का रास्ता लंबा और कठिन है. हमें रुकावटों, विघ्न डालने वालों के लिए तैयार होना होगा, शांति का रास्ता आसान नहीं है लेकिन यह पहला अहम कदम है.’

तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने एएफपी से कहा, ‘चूंकि आज समझौते पर हस्ताक्षर हो रहे हैं और हमारे लोग प्रसन्न हैं और जश्न मना रहे हैं, इसलिए हमने देश भर में अपने सैन्य अभियान रोक दिये हैं.’

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AmleshNandan Sinha

लेखक के बारे में

By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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