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यूरोप में 18 प्लस से अधिक को लगेगी फाइजर वैक्सीन की तीसरी बूस्टर डोज, EU के ड्रग वॉचडॉग ने दी मंजूरी

Updated at : 04 Oct 2021 9:58 PM (IST)
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यूरोप में 18 प्लस से अधिक को लगेगी फाइजर वैक्सीन की तीसरी बूस्टर डोज, EU के ड्रग वॉचडॉग ने दी मंजूरी

EU के ड्रग वॉचडॉग ने 18 साल और उससे अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए फाइजर/बायोएनटेक की कोविड वैक्सीन की बूस्टर डोज लगाने की मंजूरी दे दी है. एएफपी ने इसकी जानकारी दी है. दरअसल, माना जा रहा है कि कोविड वैक्सीन की दो खुराक के साथ वैक्सीनेशन होने के बाद भी कोरोनावायरस के खिलाफ सुरक्षा कम हो रही है.

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Pfizer Third Booster Dose यूरोपियन संघ के ड्रग वॉचडॉग ने सोमवार को 18 साल और उससे अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए फाइजर/बायोएनटेक की कोविड वैक्सीन की बूस्टर डोज लगाने की मंजूरी दे दी है. एएफपी ने इसकी जानकारी दी है. दरअसल, माना जा रहा है कि कोविड वैक्सीन की दो खुराक के साथ वैक्सीनेशन होने के बाद भी कोरोनावायरस के खिलाफ सुरक्षा कम हो रही है.

एम्स्टर्डम स्थित यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी द्वारा गंभीर रूप से कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों के लिए मॉडर्ना और फाइजर दोनों वैक्सीनों की एडिशनल डोज को भी मंजूरी दी गई है. ईएमए ने फाइजर वैक्सीन के ब्रांड नाम का जिक्र करते हुए एक बयान में कहा कि 18 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए दूसरी डोज के कम से कम छह महीने बाद कॉमिरनेटी बूस्टर डोज पर विचार किया जा सकता है. बूस्टर के लिए निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य निकायों द्वारा लिया जाएगा.

ईएमए के दवा विशेषज्ञों ने कॉमिरनेटी बूस्टर डोज के लिए डेटा का मूल्यांकन किया. बताया गया कि बूस्टर डोज लेने के बाद एंटीबॉडी के स्तर में वृद्धि होती है. ईएमए ने कहा कि बूस्टर डोज लेने के बाद दिल संबंधी या अन्य दुर्लभ बीमारियों के साइड-इफेक्ट देखने को नहीं मिले हैं और इनका सावधानीपूर्वक निगरानी की जा रही है. इसके अलावा, ईएमए ने गंभीर रूप से कमजोर इम्युन सिस्टम वाले लोगों को उनकी दूसरी डोज लेने के कम से कम 28 दिनों बाद मॉडर्ना और फाइजर की एडिशनल डोज लेने के लिए मंजूरी दी.

बता दें कि दुनियाभर में बूस्टर डोज को लेकर मांग तेज हुई है. दरअसल, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बूस्टर डोज इसलिए जरूरी है, ताकि वायरस के बदलते वेरिएंट से बचा जा सके. दरअसल, जिनका इम्युन सिस्टम कमजोर है उनके लिए वैक्सीन की दो डोज कई बार पर्याप्त नहीं है. इसमें ऐसे लोग शामिल हैं, जिनका अंग प्रत्यर्पण हुआ है. इसके अलावा, गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोग भी शामिल हैं. यही वजह है कि दुनियाभर में बूस्टर डोज की मांग तेज हुई है.

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