COVID-19 : कोरोना के खिलाफ नेशनल एंथम को बनाया हथियार, जानें क्या है स्थिति

Author : Rajneesh Anand Published by : Prabhat Khabar Updated At : 16 Mar 2020 5:52 PM

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London: A religious street preacher stands alongside protesters who are calling for greater action from the government to prevent the spread of coronavirus, outside Downing Street in London, Monday March 16, 2020. For most people, the new coronavirus causes only mild or moderate symptoms, such as fever and cough. For some, especially older adults and people with existing health problems, it can cause more severe illness, including pneumonia.AP/PTI(AP16-03-2020_000122B)

COVID-19 कोरोना वायरस से आज पूरा विश्व त्रस्त हो चुका है, ऐसे में स्पेन से एक बहुत ही पोजिटिव और उत्साहवर्द्धन करने वाली खबर सामने आ रही है. प्रभात खबर डॉट कॉम से बात करते हुए लंदन में रहने वाले रांची के आनंद वर्मा ने बताया कि स्पेन में स्थिति गंभीर है, यहां आठ हजार से ज्यादा कोरोना के मरीज पाये गये हैं.

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रांची : कोरोना वायरस से आज पूरा विश्व त्रस्त हो चुका है, ऐसे में स्पेन से एक बहुत ही पोजिटिव और उत्साहवर्द्धन करने वाली खबर सामने आ रही है. प्रभात खबर डॉट कॉम से बात करते हुए लंदन में रहने वाले रांची के आनंद वर्मा ने बताया कि स्पेन में स्थिति गंभीर है, यहां आठ हजार से ज्यादा कोरोना के मरीज पाये गये हैं. सरकार ने वहां ‘टोटल लॉक डाउन’ कर दिया है, लेकिन जब वहां कचड़ा उठाने और साफ-सफाई के लिए गाड़ी आती है तो लोग अपने घरों की खिड़कियां खोलकर राष्ट्रीय गीत गाते हैं. यह गायन ना सिर्फ उनकी एकजुटता को प्रदर्शित करता है, बल्कि उनके संकल्प को भी बताता है कि उनका देश इस महामारी से निपट लेगा और वे इस संकट से उबर जायेंगे.

गौरतलब है कि कोरोना वायरस से स्पेन में 8,744 लोग पीड़ित है. पिछले 24 घंटे में यहां एक हजार नये लोग इस बीमारी से संक्रमित हो गये हैं. अबतक 297 लोगों की मौत हो चुकी है. वहां के स्वास्थ्य मंत्री ने इस बारे में जानकारी दी है. अकेले मैड्रिड में 4,665 केस पाये गये हैं. 46 मिलियन की आबादी घरों में कैद है. लोग सिर्फ जरूरी काम निपटाने खाद्य पदार्थ खरीदने और दवा लेने जा रहे हैं.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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