Coronavirus In China: चीन में कोरोना की स्थिति भयावह, बाकी दुनिया के लिए खतरे की घंटी?

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 08 Jan 2023 6:42 AM

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इस लहर की शुरुआत में चीन के विपरीत, अधिकांश देश के लोगों को वायरस से हाई इम्यूनिटी मिल चुकी थी. यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल के अनुसार चीन में कोविड मामलों में होने वाली वृद्धि से यूरोप में कोविड की स्थिति पर फर्क पड़ने की आशंका नहीं है.

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चीन फिलहाल कोविड संक्रमण और इससे होने वाली मौतों की गंभीर लहर का सामना कर रहा है. चीन से लगातार खबरें आ रही हैं कि वहां रोजाना लाखों की संख्या में लोग कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं, तो हजारों की संख्या में लोगों की रोजाना मौत हो रही है. चीन में कोरोना खतरे के बाद पूरी दुनिया में दहशत का माहौल है. कोरोना की नयी लहर को देखते हुए भारत सहित कई देशों ने एहतियातन चीन से अपने यहां आने वाले यात्रियों पर सख्ती बढ़ा दी है. हालांकि इस बीच एक रिपोर्ट में थोड़ी राहत वाली खबर सामने आ रही है. जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि चीन में कोरोना से तबाही के बाद भी बाकी दुनिया में खतरा कुछ कम है.

बाकी दुनिया के लिए क्या खतरा है?

इस लहर की शुरुआत में चीन के विपरीत, अधिकांश देश के लोगों को वायरस से हाई इम्यूनिटी मिल चुकी थी. यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल के अनुसार चीन में कोविड मामलों में होने वाली वृद्धि से यूरोप में कोविड की स्थिति पर फर्क पड़ने की आशंका नहीं है. इसके अलावा, चीन में सामने आए अधिकांश वैरिएंट बीए.5.2 और बीएफ.7 के सब वैरिएंट हैं. ये सब वैरिएंट पिछली गर्मियों में यूरोप में चरम पर थे और इनमें गिरावट जारी है. इसलिए यूरोप में चीन के जरिए बड़े पैमाने पर संक्रमण फैलने की आशंका नहीं है. इस तरह दूसरे महाद्वीप के देश चीन से प्रभावित होंगे, इसकी आशंका भी कम ही नजर आ रही है.

चीन में यह नौबत कैसे आई और इससे कैसे निकला जा सकता है?

कहा जा रहा है कि चीन में ‘जीरो कोविड पॉलिसी‘ के तहत लगी पाबंदियां दिसंबर की शुरुआत में हटाए जाने के कारण ही संक्रमण की यह मौजूदा लहर आई है, लेकिन यह पूरी तरह से सही नहीं है. पाबंदियों में ढील दिए जाने से पहले ही चीन में मामले बढ़ रहे थे. एक अप्रकाशित रिपोर्ट में पता चला है कि पहली बूस्टर डोज लेने के आठ महीने बाद संक्रमण से मिली हर तरह की सुरक्षा खत्म हो जाती है. गंभीर बीमारियों से मिली सुरक्षा लंबी चलती है, लेकिन उसका भी अंत हो जाता है.

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कैसे लगाई जा सकती है प्रकोप पर लगाम?

चीन की मौजूदा लहर आने वाले समय में चरम पर पहुंचेगी और फिर कमजोर होगी. लेकिन यह चरम पर कब पहुंचेगी, और कितनी गंभीर होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वास्तव में संक्रमण के कितने मामले सामने आ रहे हैं- लेकिन हम आंकड़ों के बारे में सचमुच कुछ नहीं जानते. स्वास्थ्य के बारे में आंकड़े देने वाली ब्रिटिश संस्था ‘एयरफिनिटी’ ने अनुमान लगाया है कि एक दिसंबर से अब तक संक्रमण के 3 करोड़ 32 लाख मामले आए और 1,92,400 मौतें हुई हैं. लेकिन चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग की एक बैठक से लीक हुई जानकारी के अनुसार अनुमान है कि दिसंबर के पहले 20 दिन में करीब 25 करोड़ लोग (जनसंख्या का 18 फीसदी हिस्सा) संक्रमित हुए थे.

चीन को अब क्या करना चाहिए?

वास्तव में इस प्रकोप की दिशा के बदलने में बहुत देर हो सकती है. इस प्रकोप के दौरान ‘आरओ’ 10 से ज्यादा और अधिक से अधिक 18 रहा है. ‘आरओ’ का अर्थ होता है कि एक संक्रमित व्यक्ति कितने लोगों में वायरस फैला सकता है. ‘आरओ’ इतना अधिक होने पर लॉकडाउन, स्कूल बंद करना और मास्क पहनना संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त नहीं होता. चीन फिलहाल जो सबसे महत्वपूर्ण काम कर सकता है, वह है अपनी वृद्ध और अधिक संवेदनशील आबादी के बीच टीके के उपयोग को बढ़ावा देना.

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ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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