CoronaVirus : 'ट्रायल दवा' से कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों के इलाज में चीनी डॉक्टरों को मिल रही सफलता

Portland: In this undated photo provided by the Oregon Health & Science University on Wednesday, March 4, 2020, Dr. Andreas Lauer, right, prepares to perform the first-ever in vivo CRISPR gene edit procedure for the BRILLIANCE clinical trial at the school's Casey Eye Institute in Portland, on a patient who had an inherited form of blindness. It may take up to a month to see if it worked to restore vision.AP/PTI(AP05-03-2020_000003A)
चीन ने कोरोना वायरस के इलाज के लिए दवाओं एवं उपचार का विस्तार किया है और अन्य तरीके ढूंढे हैं जिससे हल्के मामले गंभीर नहीं बन सके और गंभीर रूप से बीमार रोगियों को भी बचाया जा सका.
बीजिंग : चीन ने कोरोना वायरस के इलाज के लिए दवाओं एवं उपचार का विस्तार किया है और अन्य तरीके ढूंढे हैं जिससे हल्के मामले गंभीर नहीं बन सके और गंभीर रूप से बीमार रोगियों को भी बचाया जा सका. स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह जानकारी दी. सरकारी शिन्हुआ संवाद समिति ने बताया कि दवा टोसिलिजुमैब जिसका सामान्य ब्रांड नाम एक्टेरमा है. इसको कोविड-19 के जांच एवं उपचार में शामिल किया गया.
चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के उप महासचिव और शिक्षाविद झाउ क्वी ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि टोसिलिजुमैब काफी प्रभावी साबित हुई है. झाउ ने बताया कि शुरुआती क्लीनिकल ट्रायल में टोसिलिजुमैब का प्रयोग कोविड-19 के 20 गंभीर मामलों में किया गया और सभी रोगियों के शरीर का तापमान एक दिन के अंदर नीचे आ गया. 19 रोगियों को दो हफ्ते के अंदर अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी, जबकि एक अन्य व्यक्ति भी ठीक हो गया.
झाउ ने कहा कि वर्तमान में इस दवा का वुहान के 14 अस्पतालों में क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है. यह शहर कोरोना वायरस के संक्रमण का केंद्र है. चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग (एनएचसी) ने शुक्रवार को बताया कि 30 और लोगों की मौत के साथ वायरस से मरने वालों का आंकड़ा 3,042 हो गया है. जबकि संक्रमण के पुष्ट मामलों की संख्या 80,552 हो गयी है. एनएचसी ने शुक्रवार को कहा कि 53,726 रोगियों को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी.
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By AmleshNandan Sinha
अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.
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