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ब्रह्मपुत्र के पानी को रोकने के लिए बांध बनाने की तैयारी में चीन, भारत और बांग्लादेश में तनाव!

भारत के पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर जारी तनाव के बीच चीन अब एक नये विवाद को जन्म देने की फिराक में है. 'एशिया टाइम्स' की खबर के मुताबिक, चीन से आनेवाली ब्रह्मपुत्र नदी पर अब बांध बनाने की तैयारी कर रहा है.

By Prabhat khabar Digital
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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
सोशल मीडिया

नयी दिल्ली : भारत के पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर जारी तनाव के बीच चीन अब एक नये विवाद को जन्म देने की फिराक में है. 'एशिया टाइम्स' की खबर के मुताबिक, चीन से आनेवाली ब्रह्मपुत्र नदी पर अब बांध बनाने की तैयारी कर रहा है.

चीन यारलुंग जांग्बो नदी पर बांध बनाने की तैयारी कर रहा है. यही नदी भारत में आने पर ब्रह्मपुत्र के नाम से जानी जाती है. अगर चीन नदी पर बांध बनाता है, तो इससे भारत और बांग्लादेश में जल प्रवाह बाधित होगा.

चीन की आबादी दुनिया की आबादी का करीब 20 है. लेकिन, जल संसाधनों में सात फीसदी है. उत्तरी भाग की तुलना में चीन का दक्षिणी भाग पानी से भरपूर है.

वहीं, भारत की आबादी दुनिया की आबादी का करीब 17 फीसदी है. यहां जल संसाधन मात्र चार फीसदी है. भारत में गर्मियों के मौसम में कई इलाकों में पानी की किल्लत हो जाती है.

भारत के साथ-साथ अन्य दक्षिण एशिया के देशों ने भी बांध बनाने को लेकर चीन द्वारा बातचीत नहीं किये जाने के कारण नाराज हैं. बांग्लादेश ने नदी पर बांध बनाने का विरोध भी किया है. अगर चीन बांध बनाता है, पड़ोसी देशों के साथ उसके संबंध और खराब होंगे.

ब्रह्मपुत्र नदी और ग्लेशियर का उद्गम चीन में है. नदी का ऊपरी क्षेत्र चीन में होने से वह पानी के बहाव को रोक कर बुनियादी ढांचे का निर्माण कर सकता है.

जल विद्युत परियोजना को लेकर चीन पहले भी विवादों में रहा है. दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों मेकांग, लाओस, थाइलैंड, कंबोडिया और वियतनाम को भी सूचना दिये बिना मेकांग नदी पर चीन ने 11 मेगा-बांध बनाये हैं.

अब चीन में बहनेवाली यारलुंग जांग्बो (भारत में ब्रह्मपुत्र) नदी पर बांध बना कर बिजली पैदा करना चाहता है. बताया जाता है कि बीते दिसंबर माह में चीन ने जिंगहोंग शहर के पास एक बांध से पानी के बहाव को 1,904 घन मीटर से घटा कर 1,000 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड कर दिया.

मालूम हो कि ब्रह्मपुत्र नदी में साल में दो बार बाढ़ आती है. एक बार गर्मियों में हिमालय की बर्फ पिघलने के कारण और दूसरी बार मॉनसून के प्रवाह के कारण. उच्च और निम्न प्रवाह पर नदी के विनाशकारी प्रभाव भारत और बांग्लादेश के निचले राज्यों के लिए चिंता के विषय हैं.

इसके अलावा नदी द्वारा लायी जानेवाली गाद को बांध में अवरुद्ध कर दिये जाने से मिट्टी की गुणवत्ता में कमी आयेगी. इसका असर कृषि उत्पादकता पर भी पड़ेगा.

मालूम हो कि भारत में ब्रह्मपुत्र बेसिन में करीब दस लाख लोग रहते हैं. वहीं, बांग्लादेश में करीब एक करोड़ लोग बेसिन में रहते हैं. डोकलाम सीमा गतिरोध के दौरान भी चीन ने बांधों से जल प्रवाह स्तर के संचार को रोक दिया था.

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