अमेरिका के नए रूसी प्रतिबंध कानून से बढ़ सकती हैं भारत की मुश्किलें, जानिए पूरा मामला

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यूएस रूस प्रतिबंध कानून का भारत पर असर

यूएस रूस प्रतिबंध कानून का भारत पर असर

अमेरिका द्वारा रूस पर नए प्रतिबंधों के कानून का मसौदा तैयार किया गया है, जो रूस से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों को प्रभावित कर सकता है. भारत पर इसके क्या असर होंगे, यह जानना महत्वपूर्ण है.

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US Russia Sanctions : रूस से पेट्रोलियम प्रोडक्ट खरीदने वाले देशों पर लगने वाले प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है. अमेरिका रूस के तेल पर प्रतिबंध लगाने के लिए नए कानून लागू कर सकता है. अगर ऐसा होता है तो इससे भारत समेत उन सारे देशों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी जो रूस से तेल, प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदते हैं.

नए कानून से क्या होंगे बदलाव

अमेरिकी संसद में चार सांसदों ने घोषणा की है कि ट्रंप सरकार की नए प्रतिबंधों वाले विधेयक को आगे बढ़ाने पर सहमति बन गई है. इन सांसदों में लिंडसे ग्राहम और रोजर विकर, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के रिचर्ड ब्लूमेंथल और जीन शाहीन शामिल हैं. इनका कहना है कि रूस का हमला यूक्रेन पर लगातार जारी है. ऐसे में रूस को कमजोर करने के लिए उन देशों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए जो रूस से ऊर्जा खरीदते हैं और इसकी अर्थव्यवस्था मजबूत होती है.

इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा?

नए प्रस्तावित कानून के लागू होने की स्थिति में रूस से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले सभी देशों पर भारी टैरिफ सगाया जा सकता है. जिससे अमेरिका को इन उत्पादों को बेचना महंगा हो जाएगा. हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पहले इस विधेयक में 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान था. हालांकि बाद में इसमें कुछ बदलाव किए गए. जिसके बाद इस विधेयक का अंतिम स्वरूप अभी सामने नहीं आया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति के विवेक से फैसला संभव

प्रस्तावित विधेयक में अमेरिकी राष्ट्रपति को एक विशेष अधिकार भी दिया गया है कि यदि वे चाहें तो अमेरिका के मित्र मुल्क को 180 दिनों तक की राहत दे सकते हैं. जिससे अमेरिका के हितों पर कोई बुरा असर न पड़े.

अमेरिकी सांसदों का बड़ा समर्थन

रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले इस विधेयक को बड़ी संख्या में अमेरिकी सांसदों का समर्थन मिल चुका है. इसमें 84 सेनेटर शामिल हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी रुस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए रूस पर दबाव बनाने पर सहमति दे चुके हैं. हालांकि इसे अभी कानून का रूप मिलना शेष है.

भारत निशाने पर, या मिलेगी रियायत?

इस कानून को सीधे लागू कर दिया जाए तो भारत पर गाज तो गिरेगी. सेनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा था कि अगर भारत और चीन रूसी तेल खरीदना कम नहीं करते तो उन्हें इसके परिणाम भुगते पड़ सकते हैं.

भारत का अस्थायी लाइसेंस समाप्त

भारत पिछले कुछ वर्षों से रियायती दरों पर रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है. अमेरिका ने पहले कुछ परिस्थितियों में इसकी अनुमति देने वाला एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया था, लेकिन वह 17 जून को समाप्त हो गया.

अगर अमेरिकी कांग्रेस (संसद) इस विधेयक को मंजूरी देती है और यह कानून बन जाता है, तो भारत जैसे देशों पर अमेरिकी टैरिफ या अन्य प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. हालांकि, अंतिम फैसला कानून के अंतिम स्वरूप और अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा दी जाने वाली संभावित छूट पर निर्भर करेगा.


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Alok Pathak

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