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‘मोदी की अमेरिका की यात्रा सबंधों को मजबूत करना और उसका जश्न मनाने के लिए है''

Updated at : 02 Jun 2016 1:05 PM (IST)
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‘मोदी की अमेरिका की यात्रा सबंधों को मजबूत करना और उसका जश्न मनाने के लिए है''

वाशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगले सप्ताह होने वाली अमेरिका यात्रा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की ‘मजबूती और उसके जश्न’ के संबंध में है. अमेरिका में भारत के दूत अरुण के सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगले सप्ताह व्हाइट हाउस यात्रा से पहले कल […]

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वाशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगले सप्ताह होने वाली अमेरिका यात्रा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की ‘मजबूती और उसके जश्न’ के संबंध में है. अमेरिका में भारत के दूत अरुण के सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगले सप्ताह व्हाइट हाउस यात्रा से पहले कल भारतीय संवाददाताओं के समूह को बताया, ‘यह निमंत्रण और यात्रा दोनों देशों के संबंधों की मजबूती एवं जश्न का हिस्सा है.’ मोदी छह जून को एंड्रयूज स्थित ज्वाइंट एयरफोर्स बेस पर पहुंचेंगे और अमेरिका की राजधानी में उनके 50 घंटों से अधिक समय बिताने की संभावना है.

बहरहाल, अब तक उनकी यात्रा के संबंध में अंतिम रूप देना बाकी है और इस दौरान वहां पहुंचने पर दोपहर में मोदी आर्लिंगटन नेशनल सीमेटरी में ‘टूम ऑफ अननोन सोल्डर’ पर पुष्पांजलि अर्पित कर सकते हैं. प्रधानमंत्री के समूचे व्हाइट हाउस में पेनसिल्वेनिया एवेन्यु पर अमेरिकी राष्ट्रपति के निजी अतिथि गृह ‘ब्लेयर हाउस‘ में ठहरने की संभावना है. दो बडे लोकतांत्रिक देशों के नेताओं के व्हाइट हाउस में सात जून को मुलाकात की संभावना है, जिसमें प्रतिनिधि स्तर की बैठक एवं सीधी बातचीत शामिल है. इसके बाद दोनों नेता मीडियाकर्मियों को संबोधित कर सकते हैं. इसके बाद ओबामा मोदी के लिए भोज का आयोजन करेंगे.

अमेजन के सीईओ से भी मिलेंगे नरेंद्र मोदी

शाम में मोदी अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस सहित अमेरिका के कॉरपोरेट नेताओं से मुलाकात करेंगे और भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करने के अपने निरंतर प्रयास के तहत यूएस इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) के वार्षिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे. भारत के दूत ने बताया, ‘उनकी (मोदी की) यात्रा का एक अहम पहलू यह भी है कि वह (आठ जून को) अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करेंगे.’ लगातार चार बैठकों में हिस्सा लेने के मकसद से मोदी तकरीबन चार घंटों तक हिल में समय बिता सकते हैं, जहां उनकी अगवानी प्रतिनिधि सभा के स्पीकर पॉल रेयान करेंगे.

गौरतलब है कि रेयान ने ही मोदी को अमेरिकी कांग्रेस में उनके पहले संयुक्त संबोधन के लिए आमंत्रित करने का फैसला किया था. इसके बाद मोदी सीनेट और प्रतिनिधिसभा की विदेशी संबंध मामलों पर समिति और दोनों सदनों के इंडिया कॉकस की ओर से उनके सम्मान में आयोजित भोज में शामिल होंगे. इस तरह के भोज का आयोजन यदा कदा ही होता है. इस भोज में करीब 400 लोगों के शामिल होने की संभावना है.

सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता पर अमेरिका सहमत

अरुण के सिंह ने बताया कि वर्ष 2000 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की भारत यात्रा से एक तरह से भारत-अमेरिका संबंध के नए चरण का सूत्रपात हुआ, जिसे बाद में जॉर्ज बुश एवं ओबामा की दो बार भारत यात्रा से मजबूती मिली. ओबामा ने भारत-अमेरिका संबंध को 21वीं सदी की निर्णायक साझेदारी बताई है. सिंह ने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हमारी स्थायी सदस्यता के लिए उन्होंने समर्थन जताया है.

अमेरिका ने बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं के लिए भारत की सदस्यता का समर्थन किया है. रक्षा कारोबार एवं प्रौद्योगिकी पहल सहित रक्षा सहभागिता में हमने काफी प्रगति की है. यह उन परियोजनाओं का हिस्सा हैं जिसके जरिए विमान वाहन प्रौद्योगिकी एवं जेट इंजन प्रौद्योगिकी से संबंधित हमारी परियोजनाओं को लेकर हम आशान्वित हैं.’ उन्होंने कहा, ‘इसलिए राष्ट्रपति बराक ओबामा के दो कार्यकाल में काफी प्रगति हुई है. और इसका जश्न मनाने के लिए देखें कि आज हम कहां हैं और नए प्रशासन के साथ इसकी शुरुआत हम कैसे करेंगे, यही इस यात्रा का जोर और प्रयास है.’ सिंह ने बताया कि अमेरिका ने बार-बार स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में भारत सुरक्षा का वास्तविक प्रदाता है.

रक्षा एवं सुरक्षा जैसे बहम मुद्दों पर होगी चर्चा

उन्होंने कहा, ‘अमेरिका भारत को बतौर विरोधात्मक नहीं बल्कि एक बेहद उपयोगी सहयोगी के तौर देखता है. इसलिए यह यात्रा उसी की झलक है.’ यात्रा से पहले इस सप्ताह एवं अगले सप्ताह के शुरू में दोनों देशों के वाशिंगटन एवं नयी दिल्ली में कई समझौतों पर हस्ताक्षर करने की संभावना है. इनमें से कुछ वन्यजीव तस्करी, वैश्विक प्रवेश कार्यक्रम से संबंधी समझौते हैं. मोदी की यात्रा से पहले वाशिंगटनहाउस और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के बीच कुछ समझौतों को लेकर गहन चर्चा चल रही है.

माना जाता है कि ये चर्चाएं अधिकतर लागत एवं वित्त पोषण के अधिकार क्षेत्र में होंगी. इस दौरान रक्षा एवं सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा होगी, जिसमें अमेरिका के रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर से उनकी मुलाकात होगी. बहरहाल, अमेरिका-चीन सामरिक एवं आर्थिक वार्ता में शरीक होने के लिए बीजिंग जाने के कारण अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी इन चर्चाओं में शामिल नहीं हो पाएंगे. बहरहाल, अपनी यात्रा के दौरान मोदी के भारत से चोरी कर लाए गए 16 ऐतिहासिक वस्तुओं की स्वदेश वापसी के लिए आयोजित समारोह में शिरकत करने की संभावना है.

नरेंद्र मोदी और बराक ओबामा के बीच ठोस चर्चा की उम्मीद

अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत के साथ संबंधों को ‘महत्वपूर्ण’ करार देते हुए कहा है कि अमेरिका अगले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान उनके साथ ‘अत्यंत ठोस’ और ‘समग्र’ चर्चा की उम्मीद कर रहा है. विदेश विभाग के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने यहां अपने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘हम अगले हफ्ते प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान अत्यंत ठोस एवं समग्र चर्चा की उम्मीद कर रहे हैं.’ मोदी छह जून को तीन दिन की यात्रा पर वाशिंगटन पहुंचेंगे. प्रधानमंत्री व्हाइट हाउस में सात जून को राष्ट्रपति बराक ओबामा से मिलेंगे और आठ जून को अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगे. किर्बी ने कहा, ‘हम प्रधानमंत्री की यात्रा को लेकर आशान्वित हैं. अमेरिका-भारत के संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण और जीवंत हैं.’

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