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G-4 देशों ने सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की संख्या बढाए जाने की वकालत की

Updated at : 03 May 2016 3:09 PM (IST)
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G-4 देशों ने सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की संख्या बढाए जाने की वकालत की

संयुक्त राष्ट्र : भारत समेत समूह-4 देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘पुरानी हो चुकी’ संरचना की आलोचना करते हुए कहा कि यदि परिषद में सुधार के लिए केवल अस्थायी सदस्यों को इस शक्तिशाली निकाय में शामिल किया जाता है तो ‘प्रभाव के असंतुलन’ की समस्या को दूर नहीं किया जा सकता. संयुक्त राष्ट्र […]

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संयुक्त राष्ट्र : भारत समेत समूह-4 देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘पुरानी हो चुकी’ संरचना की आलोचना करते हुए कहा कि यदि परिषद में सुधार के लिए केवल अस्थायी सदस्यों को इस शक्तिशाली निकाय में शामिल किया जाता है तो ‘प्रभाव के असंतुलन’ की समस्या को दूर नहीं किया जा सकता. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कल यहां जी-4 की ओर से एक बयान में कहा, ‘हमने बार बार ये तर्क सुने हैं कि स्थायी श्रेणी में विस्तार ‘अलोकतांत्रिक’ होगा. हमारी दृष्टि में, सुरक्षा परिषद में सुधार करने और उसे लोकतांत्रिक, न्यायसंगत, प्रतिनिधित्व प्रदान करने वाली, उत्तरदायी एवं प्रभावशाली बनाने के लिए दोनों श्रेणियों में, खासकर स्थायी श्रेणी में विस्तार जरुरी है.’ भारत के अलावा ब्राजील, जर्मनी और जापान जी-4 के सदस्य देश हैं. अकबरुद्दीन ने जोर दिया कि सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना समकालीन वास्तविकताओं का प्रतिबिंब नहीं है और ‘मकसद को पूरा करने के लिए उचित नहीं है.’

सुरक्षा परिषद की संरचना पुरानी, बदलाव जरुरी

अकबरुद्दीन ने सुरक्षा परिषद सुधार को लेकर अंतर-सरकारी वार्ताओं पर महासभा की अनौपचारिक बैठक में कहा कि केवल अस्थायी श्रेणी में विस्तार करने से परिषद की समस्या का समाधान नहीं होगा जिसकी संरचना मौजूदा वास्तविकताओं की दृष्टि से ‘पुरानी’ हो चुकी है और यह भू-राजनीतिक एवं आर्थिक क्रम में बडे बदलाव का प्रतिनिधित्व नहीं करती है. उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना है कि समस्या स्थायी एवं अस्थायी सदस्यों के बीच सुरक्षा परिषद के बीच प्रभाव के असंतुलन की है. केवल अस्थायी श्रेणी में विस्तार से समस्या का समाधान नहीं होगा.’ उन्होंने ‘सदस्यता की श्रेणियों’ और ‘क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व’ पर बुलाई गई बैठक में कहा, ‘इससे स्थायी और अस्थायी सदस्यों के बीच अंतर और बढेगा.’ अकबरुद्दीन ने कहा कि परिषद में निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक सहभागिता वाली और लोकतांत्रिक होनी चाहिए ताकि प्रभाव का समान वितरण एवं संतुलन सुनिश्चित किया जा सके जो मौजूदा स्थिति को प्रतिबिंबित करे.

अधिक सदस्य मिलकर ने सकेंगे वृहद फैसले

उन्होंने कहा, ‘स्थायी सदस्यों की संख्या बढाए जाने से प्रतिनिधित्व में बढोतरी सुनिश्चित होगी और उन क्षेत्रों एवं सदस्यों की निर्णय लेने की प्रक्रिया में भूमिका बढेगी जिन्हें अभी प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है या उनकी भूमिका की तुलना में कम प्रतिनिधित्व मिलता है.’ अकबरुद्दीन ने कहा, ‘यह सुनिश्चित करके परिषद अधिक तर्कसंगत, प्रभावशाली और उत्तरदायी बनेगा कि निर्णय अधिक संख्या में सदस्यों के हितों को दर्शाएं और इस प्रकार इन फैसलों को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा’ संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की दूत मलीहा लोधी ने इसके विपरीत विचार रखते हुए कहा कि अधिक स्थायी सदस्य परिषद की लोकतांत्रिक साख और प्रभाव को बढाने के बजाए घटाएंगे. संयुक्त राष्ट्र में इटली के राजदूत सेबास्टियानो कार्डी ने ‘यूनाइटेड फॉर कन्सेंसस’ समूह की ओर से बोलते हुए अधिक कार्यावधि वाली अस्थायी सीटों की नई श्रेणी बनाने का प्रस्ताव रखा। पाकिस्तान ‘यूनाइटेड फॉर कन्सेंसस’ का सदस्य है.

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