पाकिस्तान में सिख विरासत के अवशेषों पर लिखी किताब

Updated at : 11 Jan 2016 2:48 PM (IST)
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पाकिस्तान में सिख विरासत के अवशेषों पर लिखी किताब

सिंगापुर : भारतीय मूल के एक सिंगापुरी व्यक्ति ने एक यात्रा वृतांत में पाकिस्तान में सिख विरासत के अवशेषों को उकेरा है. इसमें कई ऐतिहासिक स्थलों का ब्योरा है जो 1947 में विभाजन के बाद से रखरखाव के अभाव में नष्ट हो गये हैं. अमरदीप सिंह ने 500 पन्नों की किताब ‘लॉस्ट हेरीटेज : द […]

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सिंगापुर : भारतीय मूल के एक सिंगापुरी व्यक्ति ने एक यात्रा वृतांत में पाकिस्तान में सिख विरासत के अवशेषों को उकेरा है. इसमें कई ऐतिहासिक स्थलों का ब्योरा है जो 1947 में विभाजन के बाद से रखरखाव के अभाव में नष्ट हो गये हैं. अमरदीप सिंह ने 500 पन्नों की किताब ‘लॉस्ट हेरीटेज : द सिख लीगेसी इन पाकिस्तान’ को मूर्त रूप देने के लिए अनुसंधान कार्य और पाकिस्तान की यात्रा करने में दो साल से अधिक समय लगाया. किताब में गुरद्वारों, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक के जन्मस्थल और सिखों द्वारा बनाये गये महलों और किलों की तस्वीरें हैं.

सिंह (49) ने ‘कुछ अलग करने के लिए’ 2013 में अमेरिकन एक्सप्रेस में अपने 21 साल पुराने एक्जीक्यूटिव पद को छोड दिया था तथा पूरी तरह इतिहास अनुसंधान के काम में लग गये. उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2014 में अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान उन्होंने कई त्याग दी गयीं और जर्जर इमारतों को देखा. कुछ इमारतों को पुस्तकालयों और भंडारगृहों में तब्दील कर दिया गया है, जबकि कई इमारतों में गरीब परिवारों का अतिक्रमण है.

सिंह ने सिख समुदाय का भी आह्वान किया है कि वे समुदाय की विरासत के कुछ तत्वों के संरक्षण के लिए पाकिस्तान सरकार के साथ मिलकर काम करें. सिंह ने आज स्ट्रेट्स टाइम्स के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘अब से कुछ सौ साल बाद इन स्थानों का अस्तित्व भी नहीं होगा. वे लगभग नष्ट होने को हैं, वे 10-15 साल से ज्यादा नहीं टिकेंगे.’ विरासत 1700 के दशक के अंत में सिख साम्राज्य का हिस्सा थी. लेकिन आज 18.2 करोड़ की मुस्लिम आबादी वाले पाकिस्तान में सिखों की संख्या घटकर लगभग 20 हजार तक रह गयी है.

सिंह ने विभाजन के समय बडे पैमाने पर हुए पलायन के दौरान अपने पिता की पीछे छूट गयी यादों को याद किया. इस दौरान हुए नरसंहार में उनके रिश्तेदारों की हत्या कर दी गयी थी. उन्होंने कहा, ‘यदि मैंने इसे (किताब) नहीं लिखा होता तो कौन यह काम करने जा रहा था.’ सिंह ने यह किताब स्वयं प्रकाशित की है और 30 जनवरी को नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर में इसका विमोचन करेंगे.

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