हिरासत में लिए गए युवाओं को रिहा करेगा मिश्र
Updated at : 20 Jan 2015 11:57 AM (IST)
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काहिरा : मिस्र हिरासत में लिए गए उन युवाओं की एक सूची तैयार कर रहा है, जिन्हें मामूली आरोप लगाकर गलत तरीके से गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है. मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सीसी ने कहा कि उन सभी युवाओं को पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को सत्ता से बेदखल करने वाली 25 […]
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काहिरा : मिस्र हिरासत में लिए गए उन युवाओं की एक सूची तैयार कर रहा है, जिन्हें मामूली आरोप लगाकर गलत तरीके से गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है. मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सीसी ने कहा कि उन सभी युवाओं को पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को सत्ता से बेदखल करने वाली 25 जनवरी की बगावत की चौथी बरसी से पहले रिहा किया जाना चाहिए .
राष्ट्रपति ने संयुक्त अरब अमीरात के अपनी दो दिवसीय दौरे के दौरान कल कहा कि हिरासत में लिए गए इन युवाओं की सूची तैयार की जा रही है जिनमें कार्यकर्ता, पत्रकार एवं ब्लॉगर भी शामिल हैं. इसे संबंधित अधिकारियों द्वारा इस समय संशोधित किया जा रहा है, ताकि क्रांति की वर्षगांठ के दौरान उन्हें रिहा किया जा सके.
उन्होंने कहा कि इस सूची को गृह मंत्रालय द्वारा तैयार किया जा रहा है और इसमें वे सभी मामले शामिल होंगे, जिन्हें मीडिया और मिस्र संगठनों ने पेश किया है. अहरमऑनलाइन की एक रिपोर्ट के अनुसार, हिरासत में लिए गए व्यक्तियों में से दो वे युवा हैं, जो पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को सत्ता से बेदखल करने के प्रयास में तीन-तीन साल की सजा काट रहे हैं.
सीसी ने कहा कि उनका देश युवाओं पर विशेष ध्यान दे रहा है और जवान लोगों को निशाना नहीं बना रहा है. उन्होंने कहा ‘इसके विपरीत मैं सरकारी पदों पर युवाओं का चयन करने से हिचकता नहीं हूं, क्योंकि मैंने उन्हें ज्यादा साहसी, उत्साहपूर्ण एवं योग्य पाया है’.
राष्ट्रपति का यह बयान तब आया है, जब सीसी ने पिछले हफ्ते राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से कहा था कि वे उन युवाओं की एक सूची बनाए, जिन्हें अनुचित रूप से गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने कहा ‘यह मुद्दा विचाराधीन है, लेकिन निर्णय लेने में देरी हुई है’.
इससे पहले राष्ट्रपति सीसी ने ‘स्काइ न्यूज’ पर एक साक्षात्कार में कहा था कि मिस्र में कोई भी राजनीतिक बंदी नहीं है. वर्ष 2013 में मुर्सी के शासन के खिलाफ बड़े पैमान पर सड़कों पर हुए प्रदर्शन के कारण सेना ने मुर्सी को सत्ता से बेदखल कर दिया था और इसके बाद हजारों मुर्सी समर्थित एवं मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्यों को हिरासत में ले लिया गया था और उन पर मुकदमा चलाया गया था.
मुर्सी पर जासूसी के आरोपों के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के दस्तावेजों को विदेशी खुफिया एजेंसियों को सौंपने का आरोप भी लगाया गया था. उन्हें अब तक किसी भी मामले में सजा नहीं दी गयी है.
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