भारत ने एनपीटी के खिलाफ वोट किया

संयुक्त राष्ट्र : भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) मसौदा प्रस्ताव के प्रावधानों के खिलाफ यह कह कर वोट किया कि गैर परमाणु संपन्न देश के रूप में संधि में शामिल होने का सवाल ही नहीं है. प्रसार नेटवर्को के जरिये बढ़ रहे परमाणु तथा जनसंहार के अन्य हथियारों के खतरों पर गंभीर चिंता जताते […]
संयुक्त राष्ट्र : भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) मसौदा प्रस्ताव के प्रावधानों के खिलाफ यह कह कर वोट किया कि गैर परमाणु संपन्न देश के रूप में संधि में शामिल होने का सवाल ही नहीं है. प्रसार नेटवर्को के जरिये बढ़ रहे परमाणु तथा जनसंहार के अन्य हथियारों के खतरों पर गंभीर चिंता जताते हुए 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा की निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों से जुड़ी प्रथम समिति ने गुरुवार को एक मसौदा प्रस्ताव को मंजूरी दी. प्रावधान के पक्ष में 164 वोट पड़े. भारत के साथ इस्राइल व कोरिया ने भी विरोध में वोट किया.
आतंक के खिलाफ स्पष्ट, दृढ़ रुख अपनाएं : भारत ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद से प्रभावी ढंग से निपटने और मानवाधिकार मानकों के बीच सही संतुलन बिठाते हुए दहशतगर्दी के खिलाफ ‘स्पष्ट और दृढ़’ रुख अपनाना चाहिए.यूएन में भारतीय मिशन में प्रथम सचिव मयंक जोशी ने यहां ‘मानवाधिकार प्रोत्साहन और संरक्षण ’ विषय पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में कहा, ‘आतंकवाद भय के जरिये स्वतंत्रता के सिद्धांत को चुनौती देता है. यह मानवाधिकारों के पूर्ण उपयोग के लिए बड़े खतरों में से एक है. लोकतंत्र, मानव गरिमा, मानवाधिकार व विकास पर आतंकवाद एक हमला है.’
जोशी ने कहा कि आतंकवाद का मुकाबला करने और मानवाधिकार प्रोत्साहन के बीच संबंध की समझ को लेकर ‘दुर्भाग्य’ से संदेह व गलतफहमी है.आतंकवाद से अनिवार्य ढंग से निपटने, अंतरराष्ट्रीय कानून व मानवाधिकार मानकों का पूरी तरह से पालन के बीच संतुलन चुनौती है.’ जोर देकर कहा कि मानवाधिकारों, मौलिक स्वतंत्रता, लोकतंत्र पर चोट एवं क्षेत्रीय अखंडता एवं देशों की सुरक्षा और वैध तरीके से गठित सरकारों को अस्थिर करने पर केंद्रित आतंकवाद को नियंत्रित करने, रोकने में सहयोग मजबूत करने के क्रम में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दहशतगर्दी के खिलाफ ‘स्पष्ट और दृढ़’ रुख अपनाना चाहिए.
जोशी ने जोर देकर कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्टो की सिफारिशों से सहमत है कि राष्ट्रों को सभी नागरिकों के लिए समानता के सिद्धांत सुनिश्चित करने तथा असहिष्णुता, भेदभाव और धर्म या आस्था के आधार पर हिंसा से निपटने के लिए लगातार कदम उठाने की आवश्यकता है.
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