7 साल में इस पुरुष नर्स ने किया 180 लोगों का खून

Published at :03 Sep 2017 12:12 PM (IST)
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7 साल में इस पुरुष नर्स ने किया 180 लोगों का खून

कहा जाता है कि अस्पताल में रोगी के इलाज में डॉक्टर के बाद अगर किसी की महत्वपूर्ण भूमिका है, तो वह हैं नर्स. डॉक्टर तो सिर्फ मरीज के इलाज तक खुद को सीमित कर लेते हैं, लेकिन नर्स ही हैं जो अपनी सभी सीमाओं से परे जाकर मरीजों की सेवा करती हैं और मरीजों का […]

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कहा जाता है कि अस्पताल में रोगी के इलाज में डॉक्टर के बाद अगर किसी की महत्वपूर्ण भूमिका है, तो वह हैं नर्स. डॉक्टर तो सिर्फ मरीज के इलाज तक खुद को सीमित कर लेते हैं, लेकिन नर्स ही हैं जो अपनी सभी सीमाओं से परे जाकर मरीजों की सेवा करती हैं और मरीजों का ध्यान रखती हैं.
कई देशों में पुरुष नर्स भी होते हैं. लेकिन, जिस तरह से अपवाद हर क्षेत्र में हैं, उसी तरह इस क्षेत्र में भी एक अपवाद सामने आया है. वह है, जर्मनी के डेलमेनहोर्स्ट हॉस्पिटल से. यहां पर नील्स होजेल नाम का शख्स नर्स का काम करता था. ज्यादातर अस्पतालों में जहां नर्सिंग की जिम्मेदारी महिलाओं के ऊपर होती है, वहीं होजेल एक पुरुष होते हुए भी अस्पताल में नर्स का काम कर रहा था.
कुछ साल पहले उसे दो लोगों की हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनायी गयी थी, लेकिन हाल ही में तहकीकात में पता चला कि इस सनकी नर्स ने सिर्फ दो नहीं, बल्कि 180 से अधिक मरीजों की जान ली है.
1998 में मात्र 18 वर्ष की उम्र में जेम्स होजेल ने नर्स का काम शुरू किया. अपने काम में वह बहुत माहिर था. थोड़ा सनकी होने के बावजूद वह अपने काम से किसी को शिकायत का मौका नहीं देता था. सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था कि अचानक अस्पताल में हो रही मौतों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचना शुरू कर दिया. आये दिन अस्पताल में हो रही मौत की खबर प्रशासन तक पहुंची और उसने पुलिस को इसकी जांच का आदेश दे दिया. पुलिस ने अपनी छानबीन में सबकुछ सामान्य पाया. और मामला शांत हो गया.
2005 में जर्मनी के डेलमेनहोर्स्ट हॉस्पिटल में हो रही सिलसिलेवार मौतों ने फिर से लोगों को चौंकन्ना कर दिया. इस बार कातिल रंगे हाथों पकड़ा गया. हुआ यूं कि जून, 2005 में एक महिला को पेट में दर्द की शिकायत रहने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था. रात में उस महिला ने देखा कि एक नर्स किसी मरीज को जबरदस्ती इंजेक्शन लगाने की कोशिश कर रहा है.
उसके लाख मना करने के बावजूद वह नहीं माना और उसे इंजेक्शन लगा दिया. अगले सुबह उस मरीज की मौत हो गयी. उस महिला ने अस्पताल प्रबंधन से नर्स की शिकायत की और नर्स को मरीज की मौत का जिम्मेदार बताया. महिला की शिकायत पर पुलिस ने नर्स को गिरफ्तार कर लिया और मौत के कारणों की जांच में जुट गयी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह सामने आया कि मरीज की मौत ड्रग के ओवरडोज के कारण हुई थी.
ड्रग के ओवरडोज के कारण हर्ट अटैक और रक्त प्रवाह संबंधी तकलीफ ने मरीज को मौत के मुंह में पहुंचा दिया. इसके बाद पुलिस ने जब उसके ऊपर सख्ती बरती तो उसने अपने सारे गुनाह कबूल कर लिए. उसने इस बात को स्वीकार किया कि रोगियों को दवा के ओवरडोज का इंजेक्शन उसी ने लगाया था. अपने बयान में उसने जो बताया वह बड़ा ही भयावह था.
बयान में कहा, मरीजों को मौत के करीब पहुंचा बचाना चाहता था
नील्स होजेल ने बताया कि 1999 से ही उसने ऐसा करना शुरू कर दिया था. वास्तव में वह इस काम से बोर हो गया था. वह कुछ नया करना चाहता था. इसी क्रम में उसने सोचा कि क्यों न मरीजों को मौत के करीब पहुंचाकर फिर उन्हें बचाने की कोशिश की जाये. इससे वह लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो जाता और लोग उसे भगवान के रूप में मानने लगे. लोगों को मौत के मुंह में पहुंचाने के लिए उसने ड्रग ओवरडोज का सहारा लिया. लेकिन लोगों को बचाने में वह नाकामयाब रहा.
तब उसने सबूत मिटाने के लिए लोगों को मारना और जलाना शुरू कर दिया. इसके बाद पुलिस ने डेड बॉडी को ढूंढ़ निकालने के लिए एक टीम गठित की. पुलिस ने बताया कि फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने 130 से अधिक डेड बॉडी को जली हुई हालत में खोज निकाला है.
दो और अस्पतालों में मौत के साक्ष्य मिल चुके हैं, जहां होजेल ने 1999 और 2005 के बीच ऐसा घृणित अपराध किया था. पुलिस प्रमुख जोहान क्यूमे ने कहा कि जिन सबूतों को हम हासिल करने में सक्षम थे, हमने किया.
उन्होंने कहा कि इकट्ठा किये गये सबूत भयावह हैं. हम उन चीजों की सिर्फ कल्पना कर सकते हैं. खोजी दल के मुख्य आर्ने श्मिट ने कहा कि मृतकों की संख्या जर्मन गणराज्य के इतिहास में अनोखी और हैरतअंगेज है. उन्होंने इस हत्याकांड को 1945 के द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे भयानक हत्याकांड करार दिया.
दो साल से जेल में
होजेल को 2015 में जेल में बंद कर दिया गया. लेकिन उस वक्त तक भी यह स्पष्ट नहीं था कि उसने और कितने लोगों की हत्या की है. खुद जांचकर्ताओं ने भी इस बात को स्वीकार करते हुए अपनी रिपोर्ट में लिखा कि वे लोग भी सही संख्या का पता नहीं लगा पाये. और शायद कभी लग भी न पाये.
डेलमेनहोर्स्ट के कई सीनियर मेडिकल स्टाफ भी अब अलग-अलग परीक्षणों का सामना कर रहे हैं, क्योंकि होजेल के ड्यूटी पर होने के वक्त वे लोग भी हॉस्पिटल में होते थे. मामले पर अस्पताल प्रशासन भी पूरे मामले से अनजान बना रहा. आखिर ऐसा कैसे संभव हुआ? अगर अस्पताल प्रबंधन सचेत और मुस्तैद होता तो इन हत्याओं को रोका जा सकता था.
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