Exclusive Pics: बंगाल के ऐतिहासिक धरोहरों को लील रहा चक्रवात, अम्फान ने नुकसान पहुंचाया, यश ने मिटा दिये फ्रेजर बंगलो के निशान

ऐतिहासिक धरोहरों को लील रहा चक्रवात, अम्फान ने नुकसान पहुंचाया, यश ने मिटा दिये फ्रेजर बंगलो के निशान
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ सालों से प्रतिवर्ष आने वाले चक्रवाती तूफान बंगाल की ऐतिहासिक धरोहरों को लील रहे हैं. अम्फान चक्रवात ने जिस फ्रेजर साहब के बंगलो को बर्बाद कर दिया था, यश चक्रवात ने उसके निशान भी मिटा दिये. यह ऐतिहासिक बंगलो दक्षिण 24 परगना जिला में स्थित था.
ब्रिटिश राज में बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर एंड्रयू फ्रेजर ने वर्ष 1903 के आसपास बंगले का निर्माण कराया था. यश चक्रवात ने इसे तबाह कर डाला है. यह बंगला धराशायी हो चुका है. कुछ ईंटें इस बंगला के यहां होने की गवाही दे रहे हैं. सुंदरवन घूमने आने वाले सैलानियों के लिए फ्रेजर साहब का बंगला फेमस डेस्टिनेशन था.
बाघों के लिए संरक्षित इस क्षेत्र में आज यहां सिर्फ मलबा पड़ा है. सुंदरवन के अधिकतर इलाके चक्रवात से आयी बाढ़ के पानी में डूबे हैं. नामखाना फ्रेजरगंज पंचायत के लक्ष्मीपुर, अमरावती, हाटी कार्नर और दास कार्नर में खारा पानी भरा हुआ है.
Also Read: ज्वार की चेतावनी के बाद 10 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया, NDRF तैयारसुंदरवन के दक्षिणी छोर पर स्थित एक सदी से अधिक पुराना फ्रेजरगंज बंगला पिछले महीने आये चक्रवात ‘यश’ और इससे समुद्र में उठी ऊंची लहरों की वजह से तबाह हो गया है. औपनिवेशक युग में यह बंगला ब्रिटिश अधिकारियों के मनोरंजन का केंद्र हुआ करता था. यहीं बैठकर वे मदिरा पान करते थे और नृत्य-संगीत का लुत्फ उठाते थे.
वर्ष 1903 से 1908 तक बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर रहे सर एंड्र्यू फ्रेजर ने फ्रेजरगंज बंगलो का निर्माण करवाया था. यह विशाल आवासीय बंगलो था. चक्रवात के बाद मैंग्रोव वृक्षों की जड़ों से ढके इसके अब कुछ अवशेष ही नजर आ रहे हैं. ईंटों से निर्मित इसकी दीवारें टूटकर बिखर गयी हैं.
Also Read: 11 व 26 जून को बंगाल में हाई-टाइड की आशंका से सहमी सरकार, ममता ने दिये ये निर्देशयहां कभी भारत के ब्रिटिश शासकों की रातें मनोरंजन से सराबोर होतीं थीं. वायसराय लॉर्ड जॉर्ज कर्जन जैसी हस्तियां यहां नृत्य-संगीत का लुत्फ उठाती थीं और हवा में उनकी पत्नियों के ठहाके तथा मदिरा भरे गिलासों की खनक गूंजती थी.
नामखाना के प्रखंड विकास अधिकारी शांतनु सिंह ठाकुर ने कहा कि बंगाल में ‘शक्तिशाली’ ब्रिटिश शासकों की विश्राम स्थली और मनोरंजन केंद्र रहा फ्रेजरगंगज ऐतिहासिक बंगला 26 मई को आये तूफान और इसकी वजह से उठीं लहरों की ‘मार’ नहीं झेल पाया.
तत्कालीन बॉम्बे प्रेसिडेंसी में वर्ष 1848 में जन्मे फ्रेजर ने वर्ष 1871 में भारतीय सिविल सेवा में नौकरी प्राप्त की थी. उसने नारायणतला में एक स्थल को देखा और निर्णय किया कि यह उनके विश्राम स्थल के लिए उपयुक्त रहेगा. बंगाल का लेफ्टिनेंट गवर्नर बनने से पहले ही उन्होंने बंगले का निर्माण शुरू करवा दिया. उस समय बंगाल प्रांत में बिहार, ओड़िशा, आज का बांग्लादेश, असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल आते थे.
पुरातत्वविद देवीशंकर मिद्या ने कहा कि फ्रेजर ने बंगले के पास एक गोल्फ कोर्स भी बनवाया था और ‘मैंने एक दौर में गोल्फ कोर्स के अवशेष देखे थे.’ समुद्र की लहरों और प्रतिकूल मौसम के चलते ऐतिहासिक बंगले में बहुत पहले ही क्षरण की शुरुआत होने लगी थी और पिछले साल आये चक्रवात ‘अम्फान’ तथा पिछले महीने आये चक्रवात ‘यश’ ने फ्रेजर बंगले पर अंतिम प्रहार किया. अब केवल बंगले का बाथरूम ही बचा है.
Posted By: Mithilesh Jha
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