ऐसे मनाएं मिलावट मुक्त होली
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :21 Mar 2019 7:01 AM (IST)
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होली रंगों और उल्लास का त्योहार है, पर बाजारवाद और मुनाफावादी लोगों ने डॉ क्रांति विभागाध्यक्ष, स्किन एंड वीडी डिपार्टमेंट, आइजीआइएमएस, पटना इसमें मिलावट युक्त जहर घोल दिया है. रंग-गुलाल हो या फिर मिठाई और पकवान, मिलावट होली का रंग फीका कर देता है. अत: जरूरी है कि हम न केमिकल रंग किसी को लगाएं […]
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होली रंगों और उल्लास का त्योहार है, पर बाजारवाद और मुनाफावादी लोगों ने
डॉ क्रांति
विभागाध्यक्ष, स्किन एंड वीडी डिपार्टमेंट, आइजीआइएमएस, पटना
इसमें मिलावट युक्त जहर घोल दिया है. रंग-गुलाल हो या फिर मिठाई और पकवान, मिलावट होली का रंग फीका कर देता है. अत: जरूरी है कि हम न केमिकल रंग किसी को लगाएं और न लगवाएं. खान-पान में भी बाजारू मिठाइयों की जगह घर पर बने पकवानों को तरजीह दें. इसके अलावा होली को खुशनुमा त्योहार बनाने के लिए कुछ बचाव के उपाय भी जरूरी हैं. पूरी जानकारी दे रहे हैं, हमारे विशेषज्ञ.
होली हर्षोल्लास का त्योहार है और इसे हमें वैसे ही मनाना चाहिए. हालांकि, कुछ लोग होली के रंग में भंग डालने यानी उत्सव को पीड़ा में बदलने का काम करते हैं. जैसे किसी का जबरदस्ती रंग-गुलाल लगाने के चक्कर में उनके सेंसिटिव अंगों (आंख, कान, नाक व मुंह) में रंगों का चला जाना या डाल देना. केमिकलयुक्त रंगों से बहुत से लोगों ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है, जैसे वे अंधे, बहरे या गूंगे हो सकते हैं.
होली में रासायनिक रंगों के प्रयोग से कॉन्टैक्ट एलर्जी एवं डर्माटाइटिस का खतरा बढ़ जाता है. यह होली के कई दिन बाद तक परेशान रखता है और ध्यान न देने पर क्रॉनिक एग्जिमा का रूप ले लेता है. अतः होली को खुशियाें के साथ मनाने के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है.
तीन प्रकार की हो सकती है डर्माटाइटिस :
– एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्माटाइटिस : इसमें रंग के संपर्क वाली त्वचा में खुजली होना, लाल दाना या चकत्ता होना शामिल है.
– इरिटेंट कॉन्टैक्ट डर्माटाइटिस : इसमें रंग के संपर्क वाले हिस्सों में जलन होना, लाल होना, रैशेज व दर्द होना शामिल है.
– फोटो एलर्जिक डर्माटाइटिस : इसमें धूप के सीधे संपर्क में आने से रंग लगी स्किन पर खुजली व लाली और कभी-कभी होली खत्म होने के बाद भी एग्जिमा का रूप ले लेना जो जल्दी ठीक नहीं होता. इसके अलावा बालों पर भी रंगों का दुष्प्रभाव पड़ सकता है. इससे ड्राई, मैटेड हेयर या हेयर लॉस की समस्या आती है.
उपचार : त्वचा को साफ पानी से धोएं एवं साबुन रहित क्लींजर (सेटाइल अल्कोहल एवं स्टेरॉइल अल्कोहल) से साफ करें एवं हाइड्रो कोर्टिसोन एवं फुजिडिक एसिड मिला क्रीम एवं एलोवेरा युक्त क्रीम को लगाएं. सुबह-शाम रोज एमोक्सी साइक्लिन पोटैशियम क्लावनेट, फेक्सोफेनाडाइन की गोली लें. कीटोकोनाजोल एवं कंडिसनर मिश्रित शैम्पू से सिर धोएं.
बचाव : होली खेलने में ऑर्गेनिक एवं नैचुरल रंगों का ही प्रयोग करें.
– होली खेलने से पहले त्वचा में एलोवेरा व विटामिन-ई युक्त मॉस्चोराइजर को लगा लें एवं बालों में भी तेल लगा लें.
– रंग लगने के बाद यथा संभव जल्द ही नो सोप क्लींजर, सिंडेट, ग्लिसरीन सोप से आराम से धोएं, लेकिन उसे ज्यादा न रगड़ें.
– धोने के उपरांत एलोवेरा व विटामिन-ई युक्त मॉस्चोराइजर का प्रयोग तुरंत करें.
– खुजली, जलन, लहर ज्यादा होने पे नजदीकी त्वचा रोग विशेषज्ञ से मिलें.
– डायबिटीज, दमा या किडनी रोग से जूझ रहे मरीज रंगों को लेकर विशेष सावधानी बरतें.
– ज्यादा मीठे पकवानों से बचें, क्योंकि ज्यादा कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन से रंगों से होनेवाली एलर्जी बढ़ जाती है और उनमें संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है. याद रखें होली खुशियां बांटने का त्योहार है, छीनने का नहीं. अतः किसी के चेहरे पर रासायनिक रंगों का प्रयोग कर, उन्हें बीमारी की भेंट न दें.
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