इन कारणों से बढ़ता हैं स्पॉन्डिलाइटिस का खतरा
Author Prabhat khabar digital desk
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देश में हर सौ में एक वयस्क एंक्लूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस रोग से ग्रस्त है, जिसे जोड़ों, रीढ़ और कूल्हे की क्रॉनिक सूजन के रूप में जाना जाता है. विशेषज्ञों का कहना है एंक्लूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक पाया जाता है. यह रोग 40 साल से कम उम्र के लोगों में ज्यादा देखा […]
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देश में हर सौ में एक वयस्क एंक्लूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस रोग से ग्रस्त है, जिसे जोड़ों, रीढ़ और कूल्हे की क्रॉनिक सूजन के रूप में जाना जाता है.
विशेषज्ञों का कहना है एंक्लूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस महिलाओं की तुलना में ���ुरुषों में अधिक पाया जाता है. यह रोग 40 साल से कम उम्र के लोगों में ज्यादा देखा जा रही है. प्रमुख कारणों में निष्क्रिय जीवनशैली, बैठने का गलत तरीका, तनाव, काम का अधिक दबाव शामिल हैं.
40 फीसदी मामलों में इसका असर अन्य जोड़ों पर भी पड़ सकता है, जैसे कंधे, पसलियां, घुटने और हाथ-पैर के छोटे जोड़ों में. कभी-कभी असर आंखों पर पर भी पड़ सकता है. भारत में करीब 40 लाख लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं.
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