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जमीन लेने के लिए है लैंड लोन, जानें पूरी प्रक्रिया के बारे में

Updated at : 26 Mar 2018 4:56 AM (IST)
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जमीन लेने के लिए है लैंड लोन, जानें पूरी प्रक्रिया के बारे में

अगर आपकी नजर में कोई जमीन का टुकड़ा (प्लॉट) है और आप उसे लेकर अपना मकान बनाना चाह रहे हैं, तो उस जमीन को खरीदने के लिए भी लोन उपलब्ध है. जी हां, आप लोन लेकर मनचाही जमीन खरीद सकते हैं. बैंकों के साथ-साथ अन्य वित्तीय संस्थान जैसे डीएचएफएल इसके लिए लैंड लोन, प्लॉट लोन […]

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अगर आपकी नजर में कोई जमीन का टुकड़ा (प्लॉट) है और आप उसे लेकर अपना मकान बनाना चाह रहे हैं, तो उस जमीन को खरीदने के लिए भी लोन उपलब्ध है.
जी हां, आप लोन लेकर मनचाही जमीन खरीद सकते हैं. बैंकों के साथ-साथ अन्य वित्तीय संस्थान जैसे डीएचएफएल इसके लिए लैंड लोन, प्लॉट लोन और कंपोजिट लोन (जमीन सहित मकान के लिए लोन) दे रहे हैं. सिर्फ आपको इसके लिए जरूरी कागजात को उपलब्ध कराने होंगे. इन कागजातों को बैंक के अधिकारी पहले जांच करते हैं. सही पाये जाने पर आपको आसानी से लोन प्राप्त हो जायेगा.
लोन की अवधि
एक से बीस साल तक, यह अवधि आपके रिटायरमेंट तक ही मान्य होता है या अधिकतम 60 वर्ष. बिजनेस करनेवालों के लिए 65 वर्ष की उम्र तक ही मान्य होता है.
जमीन का स्वभाव
लैंड लोन पाने के लिए जरूरी है कि जमीन का टुकड़ा गैर व्यवसायिक एवं गैर-कृषि योग्य भूमि हो और वह नगर निगम या नगरपालिका के अंदर आता हो. एक-दो वित्तीय संस्थान ऐसे भी हैं जो नगर निगम के बाहर की जमीन पर भी लोन उपलब्ध कराते हैं.
प्रोसेसिंग चार्ज
लैंड लोन या प्लॉट लोन के लिए जरूरी प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए लोन प्रोसेसिंग चार्ज भी देना होता है. अलग-अलग वित्तीय संस्थानों में ये चार्ज अलग-अलग होते हैं जो इसे एक या दो किस्त में लेते हैं.
को-एप्लीकेंट का लाभ
सामान्य रूप से एक व्यक्ति को ही लैंड लोन या प्लॉट लोन दिया जाता है. लेकिन अगर आप लोन की राशि बढ़ाना चाहते हैं, तो लोन लेने के बाद किसी कमानेवाले व्यक्ति को अपने साथ को-एप्लीकेंट के रूप में जोड़ सकते हैं. कुछ वित्तीय संस्थानों में को-एप्लीकेंट की अनिवार्यता होती है. ऐसे में उनका भी आधार, पैन आदि दस्तावेजों की जरूरत होती है.
स्टांप ड्यूटी का भुगतान
लोन के लिए बनने वाले कानूनी दस्तावेज में लगने वाले स्टांप ड्यूटी का भुगतान आवेदक को ही करना होता है. इसके अलावा जमीन के रजिस्ट्रेशन के लिए जितने खर्च होते हैं, उन सबका भुगतान आवेदक को ही करना होता है.
पात्रता या अर्हता
जमीन के बाजार मूल्य का 70-75 फीसदी ही लोन में दिया जाता है या प्लॉट अलॉटमेंट पत्र या जमीन का पंजीकृत सेल डीड के अनुसार मूल्य का 75 प्रतिशत ही लोन के रूप में स्वीकार होता है.
वैसे बहुत सारे अन्य कारक भी है जो लोन की राशि का निर्धारण के लिए प्रभावी होते हैं जैसे पुनर्भुगतान करने की क्षमता, आवेदक की उम्र, शैक्षणिक विवरण, आय की स्थायीत्वता व निरंतरता, आवेदक पर निर्भर लोगों की संख्या, संपत्ति, बचाने की आदत इत्यादि.
जमीन की जांच
जिस जमीन के टुकड़े को खरीदने के लिए आपने चुनाव किया है, उसके स्वभाव, मूल्य व उसके डीड-म्यूटेशन के दस्तावेजों की जांच की जाती है. बैंक में लीगल व टेक्नीकल सेल उन कागजातों की जांच व जमीन की वास्तिवक स्थिति की जांच व मूल्यांकन करता है.
टेक्नीकल सेल यह देखता है कि जमीन तक पहुंच रोड है कि नहीं, उसके ऊपर बिजली के तार व आसपास की जनसंख्या कितनी है. इसके अतिरिक्त जमीन का वास्तविक मूल्य व सरकारी मूल्य की भी जांच होती है. इन दोनों जांच में 15-30 दिन का समय लग सकता है. इसके लिए अलग से शुल्क देना पड़ता है, जो प्रोसेसिंग शुल्क से अलग होता है.
प्रक्रिया
लैंड लोन लेने के लिए सबसे पहले जमीन का चुनाव करने के बाद उस जमीन से जुड़े सभी दस्तावेजों की एक फोटोकॉपी बैंक के पास जमा करना पड़ता है.
एक हफ्ते या दस दिनों में बैंक यह बता देता है कि अब आप लोन की प्रक्रिया में आगे बढ़ सकते हैं. ऐसी स्थिति में सबसे पहले जमीन विक्रेता से जमीन की खरीद से संबंधित एक एग्रीमेंट कराना होगा, जिसमें जमीन की मूल्य का वर्णन होना जरूरी है. फिर इस एकरारनामे की प्रति बैंक में पूरे कागजात (जमीन के कागजात व व्यक्तिगत कागजात) के साथ जमा करना होगा. बैंक इन कागजातों की जांच कराता है. और सब कुछ सही पाये जाने पर लोन प्रदान करता है.
ब्याज दर
घर बनाने के लिए मिलने वाला लैंड लोन या प्लॉट लोन के लिए होम लोन की ब्याज दर ब्याज दर ही प्रभावी होता है. लेकिन अगर आप उस जमीन पर एक निश्चित अवधि के अंदर मकान निर्माण शुरू नहीं करते हैं तो उस लोन पर प्रोपर्टी लोन के अनुसार ब्याज दर लग जाता है, जो 10.5 – 12.5 प्रतिशत तक हो सकता है.
जमीन से संबंधित कागजात
-सेल डीड की कॉपी
– म्यूटेशन के कागजात
– रसीद की कॉपी
– पावर ऑफ अटॉर्नी
– डेवलपमेंट एग्रीमेंट – मदर डीड
– खतीयान
– नगर निगम का नक्शा
व्यक्तिगत कागजात (वेतनभोगी लोगों के लिए)
– आधार कार्ड या वोटर कार्ड – पैन कार्ड – बिजली बिल – पिछले तीन वर्ष का रिटर्न – पिछले तीन वर्ष का फार्म-16 – पिछले छह माह का बैंक स्टेटमेंट
बिजनेस करनेवालों के लिए
– बिजनेस का प्रूफ
– बिजनेस एग्रीमेंट
– पिछले तीन वर्ष का बिजनेस आइटीआर
मकान निर्माण के लिए लोन
जमीन खरीद लेने के बाद मकान निर्माण के लिए लोन की प्रक्रिया शुरू होती है. इसके लिए आपको मकान का नक्शा पास करा कर किसी आर्किटेक्ट से उस मकान का इस्टीमेट बनवाना होगा. इन दोनों कागजातों के आधार पर किस्तों में लोन प्राप्त करने का कागजात तैयार होता है.
एक से दो साल के अंदर ही निर्माण कार्य शुरू कर देता होता है. चरणबद्ध निर्माण का वेरिफिकेशन होने पर राशि निर्गत की जाती है. शुरू में प्लिंथ स्तर तक का काम खुद ही कराना होता है. निर्माण पूरा होने पर पूरी राशि निर्गत की जाती है. इस रिपोर्ट के बाद ही आपका होम लोन का इएमआई शुरू होता है.
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